योगी के इस सरकारी अस्पताल के पुरुष इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों ने प्रसूता का कराया प्रसव जन्म लेती ही नवजात ने तोड़ा दम

अरशद क़ुददूस

जिला संवाददाता बहराइच(सू.सं.)। “तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है, उधर जम्हूरियत का ढोल पीते जा रहे हैं वो, इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है नवाबी है, लगी है होड़ – सी देखो अमीरी औ गरीबी में, ये गांधीवाद के ढाँचे की बुनियादी खराबी है, तुम्हारी मेज़ चांदी की तुम्हारे जाम सोने के, यहाँ जुम्मन के घर में आज भी फूटी रक़ाबी है” मशहूर शायर अदम गोंडवी की ये पंक्तियां योगी सरकार के बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों और उन दावों की ज़मीनी हकीकत बयां कर रही हैं। एक तरफ मातृत्व योजना चलाने का प्रचार प्रसार कर प्रदेश सरकार अपनी उपलब्धियां गिना रही है तो वहीं दूसरी ओर योगी सरकार के बीमार अस्पताल का हाल अब लाइलाज सा होता जा रहा है जहां इनसानियत भी अब दम तोड़ती दिख रही है। जिस अस्पताल के भीतर मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैय्या कराने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है आज उसी मुफ्त इलाज वाले सरकारी अस्पताल की हालत बद से बद्दतर होती जा रही है। इस सरकारी जिला अस्पताल में आपको शायद सब कुछ मिल सकता है बस एक इलाज के सिवा। यहांआपको प्राइवेट अस्पतालों के दलालों की फौज के साथ-साथ कमीशन की दवाओं व इंजेक्शनों की सौदगिरी करने बाहरी मेडिकल स्टोरों मालिकों से लेकर एजेंट और फिर दूध दही मक्खन सब मिल सकता है लेकिन अगर आप इस सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आये हैं तो फिर आपका भगवान ही मालिक है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार भले ही प्रदेश में आमजन को त्वरित व बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के कितने भी दावे क्यों न कर ले लेकिन उसके यह दावे महज़ खोखले ही साबित होते दिख रहे हैं। योगी सरकार के लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों और बदहाल जिला अस्पताल का आज एक ऐसा काला अध्याय देखने को मिला जिसने इनसानियत को पूरी तरह से शर्मसार कर दिया है। केन्द्र और प्रदेश सरकार भले ही प्रसूताओं को बेहतर इलाज और उनके लिए कितने ही लाभकारी योजनाओं का पिटारा खोलने के दावे क्यों न करे लेकिन जब अस्पताल की चौखट पर पहुंचने के बावजूद भी प्रसूताओं को चिकित्सीय लाभ न मिले तो समझ जाइए की सरकार के बेहतर इलाज के दावों वाले ढोल में पोल है। जिला महिला अस्पताल का मानवता को शर्मसार करने वाला ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने अस्पताल प्रशासन और अस्पताल व्यव्यस्था के अब तक के सबसे घिनौने चेहरे को समाज के सामने उजागर कर दिया। मामला एक प्रसूता का है जो अस्पताल इलाज कराने के लिये जिला महिला अस्पताल की चौखट पर तो पहुंच गयी लेकिन प्रसव पीड़िता का है जिसे प्रसव पीड़ा के दौरान महिला अस्पताल से पुरुष अस्पताल में रेफर कर दिया और इसके बाद प्रसूता ने पुरुष इमरजेंसी वार्ड में नवजात को जन्म दिया जिसकी इलाज के अभाव में जन्म के बाद ही मौत हो गयी। मामला मीडिया की सुर्खियों में आने के बाद से जिले में हड़कम्प से मच गया। सवाल यह उठता है कि क्या इनसानियत अब इतनी भी छोटी या खत्म हो गयी है कि जिस अस्पताल के भीतर इलाज किया जाना चाहिए उस अस्पताल में स्वास्थ्यकर्मियों के लिये प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक माँ का दर्द कोई मायने नहीं रखता क्या इनसानियत बिल्कुल खत्म ही हो गयी है हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है जिला अस्पताल के ऐसे कई हाई वोल्टेज कारनामे जग जाहिर होते रहे हैं। मामला आता है तो उच्चाधिकारी भी एलर्ट हो जांच और दोषियों पर कार्यवाही करने के आश्वासन की चाशनी चटाते हैं और फिर जैसे जैसे समय बीतता जाता है मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है और सभी फिर अपने उसी पुराने ढर्रे पर काम करने लगते हैं। अब देखना है कि मानवता को शर्मसार कर दिल को झकझोड़ देने वाली इस घटना के बाद क्या योगी सरकार या उसके जिम्मेदार लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ कोई थोन्स कार्यवाही करने की जहमत उठा पायेगी। 

               योगी सरकार की बीमार हो चुकीं स्वास्थ्य सेवाएं अब ला इलाज हो चुकी हैं। जिसकी वास्तविकता से आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं जो आपकी अन्तरात्मा को झकझोड़ देगी। जनपद को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिली तो जनपदवासियों को लगा था कि अब उन्हें बेहतर उपचार व्यवस्था मिल सकेगी वहीं जिला अस्पताल का नाम स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय बहराइच में बदल गया और जिला महिला अस्पताल को सात तलीय नई बिल्डिंग मिलने के बाद से आमजन की इस बेहतर इलाज की उम्मीदों को और भी पंख से लग गये। लेकिन आमजन की उम्मीदें लगातार खस्ताहाल अस्पताल व्यवस्था बदहाल  चिकित्सीय सेवाओं के कारण अब टूटने सी लगी है। वहीं नाम बदलने और नई बिल्डिंग के मिलने के बाद भी जिला अस्पताल में तैनात धरती के भगवान कहे जाने वाले सरकारी चिकित्सक अब भी अपने उसी पुराने ढर्रे पर कायम हैं। ऐसा लगता है कि उनके लिये इंसानी जान और उनकी मान मर्यादाओं का कोई मोल ही नहीं है। ताज़ा मामला जनपद बहराइच का है जहां प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने पयागपुर निवासिनी पम्मी देवी पत्नी अखिलेश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन महिला विंग से मान-मर्यादाओं को तार-तार करते हुए प्रसूता को पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में किया रेफेर कर दिया गया। इसी दौरान प्रसव पीड़ा अधिक होने पर परिजनों ने इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर को बुलाया। इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर ने महिला डॉक्टरों को बुलवाया लेकिन महिला।चिकित्सक मौके पर नहीं पहुंची जिसके बाद प्रसूता ने पुरुष अस्पताल की इमरजेंसी में बच्चे को जन्म दिया। लेकिन समय से सही उपचार न मिल पाने के कारण जन्म के तुरंत बाद नवजात की मौत हो गयी। नवजात की मौत से परिवार में कोहराम सा मच गया। मामले ने टूल पकड़ा तो अस्पताल के आलाधिकारी भी मौके पर पहुंच गये और अब पूरे मामले में लीपापोती में जुट गये हैं। सवाल यह उठता है कि क्या यही है योगी सरकार की बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं जहां स्वास्थ्यकर्मियीं के लिये प्रसव पीड़ा से कराह रही एक माँ के दर्द का कोई मोल नहीं आखिर ऐसे लापरवाह स्वास्थ्यकर्मियों पर योगी सरकार के जिम्मेदार सख्त कदम उठाने से पीछे क्यों हटते हैं क्या वजह है कि आये दिन मानवता को शर्मसार करने वाली इस बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का काया कल्प नहीं हो पा रहा है।

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