<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>Editor&#039;s Pick Archives | Soochana Sansar</title>
	<atom:link href="https://soochanasansar.in/category/editors-pick/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://soochanasansar.in/category/editors-pick/</link>
	<description>Hindi Dainik</description>
	<lastBuildDate>Thu, 20 Nov 2025 07:00:17 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/cropped-icon-32x32.png</url>
	<title>Editor&#039;s Pick Archives | Soochana Sansar</title>
	<link>https://soochanasansar.in/category/editors-pick/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>मीडिया सेल की चुप्पी, पत्रकारों मे अनभिज्ञता, राजाभैया यादव की पुनः गिरफ्तारी और सिस्टम की निकृष्टता…</title>
		<link>https://soochanasansar.in/the-silence-of-the-media-cell-the-ignorance-of-journalists-the-re-arrest-of-rajabhaiya-yadav-and-the-degradation-of-the-system/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Nov 2025 06:41:46 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[Main Stories]]></category>
		<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चित्रकूट]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बाँदा]]></category>
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड खबर]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[breakingnews]]></category>
		<category><![CDATA[CM yogi]]></category>
		<category><![CDATA[latestnews]]></category>
		<category><![CDATA[pm modi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://soochanasansar.in/?p=16806</guid>

					<description><![CDATA[<p>@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। &#8220;पिछले एक साल से मुकदमा अपराध संख्या 0314/2024 थाना अतर्रा मे हाईकोर्ट से विवेचना की समयावधि मे &#8220;नो कोर्सेव एक्शन&#8221; का स्टे मिलने के बाद पुलिस के खासमखास बन चुके राजाभैया यादव को बीते 4 नवम्बर 2025 को माननीय उच्च न्यायालय से स्टे डिसमिस/खारिज होने के बाद झटका लगा था। तब &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-silence-of-the-media-cell-the-ignorance-of-journalists-the-re-arrest-of-rajabhaiya-yadav-and-the-degradation-of-the-system/">मीडिया सेल की चुप्पी, पत्रकारों मे अनभिज्ञता, राजाभैया यादव की पुनः गिरफ्तारी और सिस्टम की निकृष्टता…</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1400" height="1050" class="wp-image-14429" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1736518691054.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1736518691054.jpg 1080w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1736518691054-300x225.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1736518691054-1024x768.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1736518691054-768x576.jpg 768w" sizes="(max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p>@<strong>आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। </strong></p>



<p><strong>&#8220;पिछले एक साल से मुकदमा अपराध संख्या 0314/2024 थाना अतर्रा मे हाईकोर्ट से विवेचना की समयावधि मे &#8220;नो कोर्सेव एक्शन&#8221; का स्टे मिलने के बाद पुलिस के खासमखास बन चुके राजाभैया यादव को बीते 4 नवम्बर 2025 को माननीय उच्च न्यायालय से स्टे डिसमिस/खारिज होने के बाद झटका लगा था। तब से राजाभैया यादव फरारी के अलर्ट मोड पर थे। गत 18 नवंबर को राजाभैया यादव को गिरफ्तार</strong> <strong>करने के बाद बाँदा पुलिस मीडिया सेल का मौन और स्थानीय पत्रकारों मे इसकी कोई जानकारी साझा न करना अतर्रा सीओ पर बड़े सवाल खड़े करता है। तब जबकिं पिछली बार अतर्रा कोतवाली प्रभारी तत्कालीन एसएचओ कुलदीप तिवारी ने मीडिया को जानकारी दी थी। गिरफ्तारी की तस्वीर पुलिस मीडिया सेल से भी जारी की गई थी। </strong></p>



<p><img decoding="async" width="1400" height="933" class="wp-image-16809" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120123.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120123.jpg 1080w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120123-300x200.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120123-1024x683.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120123-768x512.jpg 768w" sizes="(max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p><strong>बाँदा</strong>। जिले के थाना अतर्रा अंतर्गत संचालित विद्याधाम समिति व चिंगारी संगठन के कर्ताधर्ता राजाभैया यादव पर अब तक कुलजमा विभिन्न संगीन धाराओं के 12 आपराधिक मुकदमे अलग-अलग थानों मे दर्ज है। बीते जून माह को राजाभैया यादव मुकदमा अपराध संख्या 043/2025 थाना अतर्रा मे दुराचार / अपरहरण आदि मे नामजद होकर ज़िला कारागार बाँदा से पांच माह बाद छूटे थे। तब से राजाभैया यादव हाईकोर्ट और ज़िला सेशन कोर्ट / विशेष न्यायालय एससी/एसटी मे कानूनी दाँवपेची से केस-केस खेल रहे थे। इधर एक अन्य मुकदमे 0315/2024 थाना अतर्रा मे राजाभैया यादव पर आईपीसी की धारा 354 व 504 का मुकदमा एक महिला ने लिखाया था। <strong>जिसमें आईओ विवेचक ने पीड़िता द्वारा तमाम शिकायत पत्र के बावजूद राजाभैया यादव पर 354 की धारा का विलोप कर दिया था। जबकि यह केस घटनास्थल उड़ीसा राज्य की थी। </strong></p>



<p><img decoding="async" width="1400" height="1786" class="wp-image-16811" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120109.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120109.jpg 1080w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120109-235x300.jpg 235w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120109-803x1024.jpg 803w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251120_120109-768x980.jpg 768w" sizes="(max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p>पीड़िता ने अपनी एफआईआर मे राजाभैया के साथ बाँदा से ट्रेन द्वारा साथ जाने से लेकर वहां रुकने का ज़िक्र किया था। वापसी मे पीड़िता को उड़ीसा अकेला छोड़कर राजाभैया यादव मुंबई चले गए थे। ऐसा पीड़िता ने ट्रेन टिकट से दावा किया था। काबिलेगौर है कि राजाभैया यादव को बीते 18 नवंबर दिन मंगलवार को अपराह्न ढाई से तीन के बीच सीओ अतर्रा प्रवीण यादव के नेतृत्व मे पूछताछ को हिरासत मे अतर्रा-नरैनी मार्ग से लिया गया। फिर थाने से गिरफ्तार करके देरशाम बाँदा न्यायालय चलान काटकर लाया गया,जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। राजाभैया यादव जिस मुकदमे मे जेल गए है वह बीते 17 दिसंबर को थाना अतर्रा मे दर्ज हुआ था। तब से फरारी काट रहे राजाभैया इसी केस मे माननीय हाईकोर्ट से विवेचना जारी रहते &#8220;नो कोर्सेव एक्शन&#8221; का स्टे ले आये थे। सीओ अतर्रा प्रवीण यादव ने इस मामलें को ठंडे बस्ते मे डालने जैसा माहौल यह कहते हुए बनाया की उन्होंने मुक़दमा संख्या 043/2025 व 0314/2024 को आपस मे कनेक्ट कर दिया है। लेकिन दोनों मुकदमें मे घटनास्थल भिन्न है।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="404" height="505" class="wp-image-16549" style="width: 404px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235.jpg 1080w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235-240x300.jpg 240w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235-819x1024.jpg 819w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1755926233235-768x960.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 404px) 100vw, 404px" /></p>



<p>वहीं मुख्य मुलजिम एक व अन्य भी अलग है। इस मुकदमे की वादी दलित महिला है जो चित्रकूट ज़िले की मूल निवासी है। यह पूर्व मे राजाभैया यादव की एनजीओ विद्याधाम समिति व चिंगारी मे सामुदायिक कार्यकर्ता की तरह काम करती थी। एनजीओ मे काम करते हुए दलित पीड़िता ने अपने साथ हुए घटनाक्रम को तहरीर मे बखूबी बयानी किया है। वहीं अतर्रा पुलिस और स्थानीय पुलिस प्रशासन मुल्जिम को जिस तर्ज पर संरक्षण दिये था। उसने राजाभैया यादव के चक्रव्यूह मे षडयंत्र के तहत अनवर रजा रानू, महेंद्र पाल वर्मा राजू, दोनों पीड़िता व उनके परिजनों और अन्य पत्रकारों को भी साज़िश रचकर कूटरचना से मुकदमों मे फंसाने की पटकथा लिखी थी। लगातार लिख रहें है। किंतु न्यायालय से न्याय की उम्मीद लगाए पत्रकारों व समाज के लोगों ने राजाभैया यादव की फर्जी मुकदमे लिखवाने वाली टीम के प्यादों को सिलसिले वार लिखापढ़ी से बेनकाब किया है। लेकिन राजाभैया यादव कभी फर्जी तहरीर तो कभी 175(4) से झूठे मुकदमों की इबारत लिखने मे माहिर है। उन्ही काले कोट वाले अधिवक्ता के साथ जो बार संघ पदाधिकारी रहते विद्याधाम समिति के सारे प्रायोजित केस निज स्वार्थ मे लड़ने के अभ्यस्त है। राजाभैया यादव ने समाज कल्याण से पीड़िता को मिलने वाली आर्थिक सहायता पर वही विभाग के बाबुओं से रोक लगवाई है। मुलजिम का दावा है कि उनके केस मे हाईकोर्ट से स्टे है और मुकदमे झूठे है। फिर भी हाईकोर्ट ने राजाभैया का मुकदमा अपराध संख्या 0314/2024 आईपीसी की धारा 376,120 बी आदि की धाराओं पर दर्ज केस मे अब स्टे हटाया है। जिसके चलते राजाभैया यादव पांच माह बाद पुनः ज़िला कारागार बाँदा पहुंच गए है।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-silence-of-the-media-cell-the-ignorance-of-journalists-the-re-arrest-of-rajabhaiya-yadav-and-the-degradation-of-the-system/">मीडिया सेल की चुप्पी, पत्रकारों मे अनभिज्ञता, राजाभैया यादव की पुनः गिरफ्तारी और सिस्टम की निकृष्टता…</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>संगठित पत्रकारों ने आज एकजुटता से मतदान की बैठक मे हिस्सा लिया&#8230;</title>
		<link>https://soochanasansar.in/organized-journalists-today-unitedly-participated-in-a-voting-meeting-organized-by-the-press-trust-of-bundelkhand/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Oct 2025 12:53:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चित्रकूट]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[बाँदा]]></category>
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महोबा]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[breakingnews]]></category>
		<category><![CDATA[CM yogi]]></category>
		<category><![CDATA[latestnews]]></category>
		<category><![CDATA[pm modi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://soochanasansar.in/?p=16744</guid>

					<description><![CDATA[<p>@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी) मतदान प्रक्रिया 2025 के लिए हार्पर क्लब मे सम्पन्न हुई खुली बैठक। सहभागिता कर रहें पत्रकारों ने रखे अपने विचार, प्रत्याशियों ने लिए नामांकन पत्र। त्यौहार के मद्देनजर अवकाश खत्म होने मे अंगले दिन तक मिलेंगे नामांकन पत्र। एक दिन नामांकन वापसी को मिलेगा। आज &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/organized-journalists-today-unitedly-participated-in-a-voting-meeting-organized-by-the-press-trust-of-bundelkhand/">संगठित पत्रकारों ने आज एकजुटता से मतदान की बैठक मे हिस्सा लिया&#8230;</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>@<strong>आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। </strong></p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="1400" height="793" class="wp-image-16747" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0031.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0031.jpg 1280w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0031-300x170.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0031-1024x580.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0031-768x435.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी) मतदान प्रक्रिया 2025 के लिए हार्पर क्लब मे सम्पन्न हुई खुली बैठक।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>सहभागिता कर रहें पत्रकारों ने रखे अपने विचार, प्रत्याशियों ने लिए नामांकन पत्र।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>त्यौहार के मद्देनजर अवकाश खत्म होने मे अंगले दिन तक मिलेंगे नामांकन पत्र। एक दिन नामांकन वापसी को मिलेगा।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>आज जो पत्रकार साथी अनुपस्थित रहें है किसी कारणवश वे बिजलीखेड़ा स्थित अस्थाई कार्यालय सीएमओ आवास के सामने से नामांकन पत्र ले सकतें है। व मतदान देने के लिए अपने आवश्यक कागज जमा कर सकतें है।</li>
</ul>



<ul class="wp-block-list">
<li>उपस्थित पत्रकारों ने रखे अपने विचार और एकजुटता का लिया संकल्प।</li>
</ul>



<p><strong>बाँदा</strong>। आज हार्पर क्लब बाँदा के सभागार मे पत्रकार साथियों (इलेक्ट्रॉनिक व प्रिन्ट / डिजीटल ) की एक आवश्यक बैठक आयोजित की गई। <strong>द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी)</strong> के आम चुनाव 2025 के यह बैठक आयोजित की गई थी। आज की इस खुली बैठक मे उपस्थित पत्रकारों मे क्रमशः खबर लहरिया की मुख्य सम्पादक कविता बुंदेलखण्डी व उप सम्पादक मीरा के साथ जीशान अख्तर, अभिषेक शुक्ला, राजेश पांडेय,आत्माराम त्रिपाठी ने बैठक की अध्यक्षता की है।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="1406" height="788" class="wp-image-16749" style="width: 1406px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182639.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182639.jpg 1079w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182639-300x168.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182639-1024x574.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182639-768x431.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1406px) 100vw, 1406px" /></p>



<p> वहीं इस आवश्यक बैठक मे करीब 70 पत्रकारों ने सहभागिता की है। गौरतलब है कि खुले मंच से मौजूद पत्रकार साथियों ने अपने उद्गार व सवाल-जवाब का सम्प्रेषण किया। उन्होंने संवाद करते हुए बाँदा के इतिहास मे पहली बार पत्रकारों के लिए इस चुनाव प्रक्रिया का खुले समर्थन से स्वागत किया। बैठक मे पत्रकार अनवर रजा रानू ने पत्रकारो की एकजुटता को बिना की जातिवाद और मजहब वाद के साथ पार्टीवाद से दूर करके एक साथ जुड़ने और संघठित होने की अपील की गई है। उन्होंने कुछ उदाहरण पेश करतें हुए अपनी आपबीती व घटनाक्रम का जिक्र भी किया। वहीं पत्रकार दीपक पांडेय ने कहा कि पत्रकार का मतलब यह नही की वह यूट्यूबर है या बड़ा -छोटा बल्कि वह पत्रकार है औऱ खबर लिख रहा है, खबरों को दिखा रहा है तो यही  प्रमाण बहुत है। उसके बीच मे छोटे-बड़े का मतभेद नही होना चाहिए। वहीं बैठक मे पत्रकार के.के. गुप्ता व पंकज त्रिपाठी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मुसीबत के वक्त खड़े हो, एक दूसरे की टांग न खींचे, ग्रुप व सोशल मीडिया पर एकदूसरे के ऊपर कीचड़ न उछालें और प्रशासनिक दायरे मे आपसी तनातनी मिटाकर आपसी बुराइयों पर विराम लगाना आवश्यक है। </p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="1400" height="788" class="wp-image-16750" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0003.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0003.jpg 1280w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0003-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0003-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0003-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p><strong>उल्लेखनीय</strong> है बैठक व कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कोरम ने भी अपनी बातों को बेबाकी से रखा। इस कड़ी मे खबर लहरिया की मुख्य सम्पादक कविता बुंदेलखण्डी ने इस नेक पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा यह बड़ी प्रसन्नता का क्षण है कि <strong>द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी)</strong> सभी कलमकारों को एक मंच पर लाया है। उन्हें संघठित होने व उनके हितार्थ आवाज बुलंद करने की ज़मीन तैयार कर रहा है। उन्होंने कई संगठनों मे जुड़े होने की बात करते हुए यहां प्रताड़ित पत्रकारो की बात भी उन फोरम तक पहुंचाने की बात कही है। वहीं पत्रकारों की आवाज को एकजुटता की माला मे पिरोते हुए युवा जुझारू पत्रकार अभिषेक शुक्ला ने खुले मन से इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने अपनी क्षमता अनुरूप पत्रकारिक जींवन मे साथियों का साथ देने की बात कही है। अध्यक्षता कोरम से पत्रकार जीशान अख्तर ने भी अभिषेक शुक्ला की बातों को अपने संबोधन मे कोड करते हुए साथ आने की मांग उठाई। पत्रकार राजेश पांडेय ने कहा कि पूर्व मे जो संगठन स्वयंभू परंपरा से अस्तित्व मे है उन्हें यह बैठक आईना दिखाती है। यह संगठन बड़ी लकीर के रूप मे स्थापित होगा ऐसी उम्मीद रखी जा सकती है। इस क्रम मे आत्माराम त्रिपाठी ने उपस्थित समूह का आभार जताया और सबके साथ खड़े रहने की बात कही। उल्लेखनीय है कि मंच व बैठक का संचालन पत्रकार आशीष सागर दीक्षित ने किया । उन्होंने <strong>द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी)</strong> के स्थापना मार्च 2018 से लेकर आज तक की प्रस्तावना रखी।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="1400" height="830" class="wp-image-16751" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182654.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182654.jpg 1063w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182654-300x178.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182654-1024x607.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20251019_182654-768x455.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p> वहीं उपस्थित पत्रकार साथियों के सवालों का जवाब पीटीबी के संविधान को सार्वजनिक तौर पर पेश करते हुए संगठन की दिशा व भविष्य की रणनीति और योजना को विस्तृत तरीक़े से खुले मंच पर सबके बीच रखा है। उन्होंने किसी भी भ्रम को तोड़ते हुए द प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड (पीटीबी) को भविष्य मे पत्रकारों के हितों मे मील का पत्थर बताया है। उन्होंने पत्रकारिक जींवन की कठिनाइयों मे साथ चलने की बात कहते हुये <strong>बटेंगे तो कटेंगे, जुड़ेंगे तो जीतेंगे</strong> का नारा दिया। पत्रकार साथी इकबाल खान ने कहा कि यह शुरुआत है इसकी बुनियाद और ऊँचाई को हम सब मिलकर तय करेंगे। पत्रकारो की तरफ से शिवम सिंह ने नामांकन पत्र वितरण की ज़िम्मेदारी संभाली और कुछ प्रत्याशियों को नामांकन पत्र दिये। उन्होंने बताया कि आगामी 28 अक्टूबर के आसपास मतदान सम्पन्न कराया जाएगा। जिसकी सूचना व गाइडलाइंस मतपत्र,वोटर आईडी-कार्ड वितरण के बाद नामांकन पत्र सत्यापन के पश्चात सोशल मीडिया प्लेटफार्म, पीटीबी ऑफिशियल ग्रुप,पीटीबी इलेक्शन ग्रुप पर दी जाएगी।</p>



<p><strong>इन्होंने लिए प्रत्याशी नामांकन पत्र</strong>&#8211; </p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="1400" height="788" class="wp-image-16752" style="width: 1400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0013.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0013.jpg 1280w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0013-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0013-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG-20251019-WA0013-768x432.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 1400px) 100vw, 1400px" /></p>



<p>अध्यक्ष पद के लिए इलेक्ट्रानिक न्यूज चैनल से जुड़े पत्रकार अनवर रजा रानू और रमाकांत तिवारी ने आज नामांकन पत्र लिया। वहीं ज़िला कार्यकारणी सदस्य पद के लिए अंशु गुप्ता और के.के. गुप्ता ने लिए। वहीं प्रबंध कार्यकारणी अध्यक्ष पद के लिए खबर लहरिया मुख्य सम्पादक कविता बुंदेलखण्डी ने नामांकन पत्र लिया है। बाँदा मे आज दीपावली पर्व की व्यस्तता के चलते आंशिक पत्रकारों ने शिरकत नही कि लेकिन उन्होंने आश्वासन दिया है कि आगामी दो तीन दिन मे नामांकन पत्र लेंगे। नामांकन पत्र की वापसी को एक दिन न्यास मंडल की तरफ से दिया जाएगा। वहीं किसी भी पद पर एक ही नामांकन पत्र लिए जाने की स्थिति मे सभी की सहमति मुताबिक उस प्रत्याशी को निर्विरोध घोषित किया जाएगा। बतलाते चलें कि आज की बैठक इस महत्वपूर्ण बैठक मे क्रमशः अरबिंद सिंह गौतम (इन्होंने सम्बोधित भी किया है।) , पंकज शुक्ला, प्रदीप शुक्ला, नरेश निगम, कुलदीप त्रिपाठी, वरिष्ठ इलेक्ट्रॉनिक पत्रकार मनोज कुमार, शिवाकान्त अवस्थी,दुर्गेश कश्यप, सुरेश साहू, बालेन्द्र तिवारी उर्फ राज, कृष्ण कुमार दीक्षित सहित 70 पत्रकारों ने उपस्थिति रजिस्ट्रर पर दस्तखत किए है व उपस्थित रहें है। वहीं करीब 20 पत्रकार विलम्ब से पहुंचे जो लौट गए।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/organized-journalists-today-unitedly-participated-in-a-voting-meeting-organized-by-the-press-trust-of-bundelkhand/">संगठित पत्रकारों ने आज एकजुटता से मतदान की बैठक मे हिस्सा लिया&#8230;</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बुंदेलखंड पैकेज से निर्मित विशिष्ट अनाज मंडियों पर अधिकारियों के भ्रष्टाचार की कालिख…</title>
		<link>https://soochanasansar.in/the-special-grain-markets-built-under-the-bundelkhand-package-are-tainted-by-the-corruption-of-officials-in-district-bandaup/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 02 Sep 2025 12:18:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[अपराध]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चित्रकूट]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[झांसी]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
		<category><![CDATA[बाँदा]]></category>
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड खबर]]></category>
		<category><![CDATA[महोबा]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://soochanasansar.in/?p=16381</guid>

					<description><![CDATA[<p>@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। &#8220;चित्रकूट मंडल मुख्यालय के बाँदा मे 2012 मे प्रस्तावित 64 करोड़ फिर बढ़ा हुआ बजट 300 करोड़ रुपया से 86 एकड़ कृषि भूमि पर बनी विशिष्ट अनाज मंडी का 11 साल बाद भी लोकार्पण नही हो सका है। अब मंडी समिति के उप निदेशक इंजीनियर महेश खरे ने तत्कालीन अधिकारियों पर &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-special-grain-markets-built-under-the-bundelkhand-package-are-tainted-by-the-corruption-of-officials-in-district-bandaup/">बुंदेलखंड पैकेज से निर्मित विशिष्ट अनाज मंडियों पर अधिकारियों के भ्रष्टाचार की कालिख…</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>@<strong>आशीष सागर दीक्षित, बाँदा। </strong></p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="232" class="wp-image-16384" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250902_174259.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250902_174259.jpg 1063w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250902_174259-300x174.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250902_174259-1024x594.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250902_174259-768x446.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p><br>&#8220;<strong>चित्रकूट मंडल मुख्यालय के बाँदा मे 2012 मे प्रस्तावित 64 करोड़ फिर बढ़ा हुआ बजट 300 करोड़ रुपया से 86 एकड़ कृषि भूमि पर बनी विशिष्ट अनाज मंडी का 11 साल बाद भी लोकार्पण नही हो सका है। अब मंडी समिति के उप निदेशक इंजीनियर महेश खरे ने तत्कालीन अधिकारियों पर मुकदमा अपराध संख्या 716/2025 नगर कोतवाली बाँदा धारा बीएनएस 409 पंजीकृत कराया है। लेकिन रिकवरी मे शासनादेश आड़े आएगा और भ्रष्टाचार के दीमक मौज मे रहेंगे।&#8221;</strong></p>



<ul class="wp-block-list">
<li>बुंदेलखंड के 7 जिलों में 625 करोड़ रुपया से 138 विशिष्ट अनाज मंडी/ ग्रामीण अवस्थापना केंद्र बनाए गए थे।</li>



<li>साल 2009-10 में सामाजवादी मुख्यमंत्री रहे अखिलेश यादव ने योजना स्वीकृति दी जिसको साल 2012 मे धरातल पर अवतरित किया गया।</li>



<li>सात जनपदों मे ज़िला स्तर पर 6 विशिष्ट अनाज मंडी और 132 ग्रामीण अवस्थापना केंद्र बने थे।</li>



<li>बाँदा मे सिर्फ स्टील/लोहे की आपूर्ति मे ही 6 तत्कालीन उप निदेशक मंडी निर्माण अफसरों ने ही 5 करोड़ 49 लाख 89 हजार 806 रुपया का गबन किया है।</li>



<li>आज बाँदा विशिष्ट अनाज मंडी खंडहर हो रही है। उसमें अराजक तत्वों की बैठकी होती है। ओवरलोडिंग नम्बर 2 बालू वाले पकड़े गए ट्रक/ परिवहन खड़े होते है।</li>



<li>बाँदा की विशिष्ट अनाज मंडी के एक अदने हिस्से मे राष्ट्रीय आजीवका मिशन योजना से स्वावलंबन हेतु महिला समूह द्वारा प्रेरणा लघु उद्योग संचालित होता है।</li>
</ul>



<p><strong>बाँदा</strong>। उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड मे यूपीए की केंद्र सरकार मे अस्तित्व पर आये बुंदेलखंड विशेष पैकेज से यूपी वाले हिस्से मे सात ज़िलों के अंदर 625 करोड़ रुपया से 138 अनाज मंडी बनी। जिसमें ज़िला मुख्यालय पर 6 विशिष्ट अनाज मंडी व ग्रामीण तहसील स्तर 132 अवस्थापना केंद्र बनाए गए थे। कुल 7266 करोड़ के बुंदेलखंड पैकेज पर शुरू से बड़े स्तर मे भ्रष्टाचार पनपता रहा है। फिर वो कूपवेल योजना से निर्मित कुएं रहें हो। या बकरी पालन उद्योग या फिर विशेष ट्री प्लांटेशन स्कीम अथवा विशिष्ट अनाज मंडियां।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="405" height="228" class="wp-image-16386" style="width: 405px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01.jpg 1920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01-768x432.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145133_01-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 405px) 100vw, 405px" /></p>



<p> आज बुंदेलखंड संदर्भ मे ज़िला बाँदा की विशिष्ट अनाज मंडी की पड़ताल कर रहें है जो झांसी-महोबा हाइवे पर शहर से करीब 10 किलोमीटर दूर स्थित है। वैसे गल्ला व्यापारियों के लिए शहर मे पुरानी गल्ला मंडी है लेकिन यहां उतना स्पेस / जगह नही जितना कि 300 करोड़ रुपया की लागत से बनी 86 एकड़ जमीन पर निर्मित विशिष्ट अनाज मंडी मे है। बाँदा से लेकर बुंदेलखंड के तकरीबन हर ज़िले मे यह बड़ी विशिष्ट अनाज मंडी/ ग्रामीण अवस्थापना केंद्र फटेहाल है। इन पर भ्रष्टाचार की कालिख पुती है। जिससे यह 11 साल बाद वही कभी किसानों का भला नही कर सकी है।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="420" height="236" class="wp-image-16387" style="width: 420px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01.jpg 1920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01-768x432.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902150434_01-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 420px) 100vw, 420px" /></p>



<p><br><strong>सात ज़िलों मे बनी अनाज मंडी-</strong></p>



<p>बुन्देलखंड पैकेज से 625 करोड़ रुपया सपा सरकार मे आया। जिससे कृषि भूमि अधिग्रहण करके शहर के बाहर विशिष्ट अनाज मंडी बनाई गई। जिसमें बाँदा मे 20 ( एक विशिष्ट / 19 ग्रामीण अवस्थापना केन्द्र), चित्रकूट मे 16, हमीरपुर मे 24, महोबा मे 11, झांसी मे 25, ललितपुर मे 24, जालौन मे 20 अनाज मंडी बनी थी। बाँदा मे यह शुरुआत मे 64 करोड़ बजट से शुरू हुई जो विस्तार लेकर 300 करोड़ रुपया खा गई। वहीं महोबा मे 40 करोड़ से विशिष्ट अनाज मंडी पनवाड़ी रोड मे बनी जो भ्रष्टाचार का सबूत है। इसको बनाने वाली तत्कालीन कम्पनी तक ब्लैकलिस्ट कर दी गई है। आज तक यह हैंडओवर नही हो सकी है। कमोबेश यही हालत बाँदा के यहां भी किसान तिंदवारी रोड पर स्थित पुरानी छोटी अनाज मंडी मे अपना गल्ला विक्रय करते है। जो अक्सर बारिश मे सड़ता है और खाद वितरण की किल्लत का साक्षी बनता है। यहीं चुनावी मतगणना भी होती है। यहां न किसानों के बैठने व छाया का स्थान है उल्टा आवारा जानवरों का नुकसान भी है। इन्ही सबको देखते हुए शहर से बाहर बड़े स्थल पर विशिष्ट अनाज मंडी बनी थी। कुल 86 एकड़ भूमि पर लगभग हर तरह की सुविधा किसानों हेतु रखी गई। कर्मचारियों को रुकने को आवास, ब्लाकवार अनाज गोदाम और अन्य आधुनिक सुविधाओं से लैस अनाज मंडी। लेकिन पुरानी अनाज मंडी मे दुकानों का किराया 400 रुपया है। जबकि विशिष्ट अनाज मंडी मे 4000 रुपया निर्धारित है। जिसके चलते शहर से बाहर और असुरक्षा के मद्देनजर आढ़तियों व किसानों का वहां जाना नही होता है। </p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="406" height="228" class="wp-image-16388" style="width: 406px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01.jpg 1920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01-768x432.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145510_01-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 406px) 100vw, 406px" /></p>



<p>लगभग सभी जिलों मे यही सूरतेहाल है। विशिष्ट अनाज मंडियों को बरसाती जंगलों मे मे बबूल की झखाड़ का अड्डा बनाया जा रहा है। आवासों के दरवाजे, जंगले कबाड़ होने लगें है। उनमें जंगली जीव रहते है। यह अराजकता का स्थान बनते दिखती है। यदि 86 एकड़ मे किसानी होती तो कितना अनाज उत्पादन होता इसका अंदाजा लगाइए। या कोई उद्योग लगता तो मजदूरों, बेरोजगार युवाओं को रोजीरोटी मिलती लेकिन दुर्भाग्यवश यह बजट भ्रष्टाचार की गर्त मे मिल रहा है।</p>



<p><strong>बाँदा उप निदेशक मंडी इंजीनियर महेश खरे ने दर्ज करा दी रिपोर्ट-</strong></p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="402" height="226" class="wp-image-16389" style="width: 402px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01.jpg 1920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01-768x432.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145530_01-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 402px) 100vw, 402px" /></p>



<p><br>बुंदेलखंड पैकेज से बाँदा मे महोबा रोड पर बनी विशिष्ट अनाज मंडी मे वित्तीय घोटाले की जांच आख्या 30 सितंबर 2022 अब सामने आने के बाद दो दिन पूर्व पुरानी गल्ला मंडी के उप निदेशक इंजीनियर महेश खरे ने कुल 6 तत्कालीन उप निदेशक मंडी निर्माण पर प्रथम सूचना रिपोर्ट नगर कोतवाली मे दर्ज करा दी है। मुकदमा अपराध संख्या 716/2025 मे बीएनएस की धारा 409 / भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर हुई है। यह अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जिसमें अभियुक्त तत्कालीन उप निदेशक मंडी निर्माण क्रमशः अलीगढ़ के रामधार रामघाट रोड निवासी गोपाल शंकर (तत्कालीन अधीक्षण अभियंता जोन 4, पीडब्ल्यूडी) ने 79 लाख 17 हजार 569 रुपया, चंदौली के तिलक नगर निवासी एस. एन.पी. यादव (तत्कालीन उप निदेशक मंडी निर्माण) ने 52 लाख 90 हजार 132 रुपया, लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी निवासी केके गुप्ता ने 26 लाख 39 हजार 189 रुपया, गाजियाबाद के सुरेशचंद्र गोयल ने 17 लाख 55 हजार 897 रुपया, लखनऊ के एन गोयल 75 लाख 15 हजार 424 रुपया गबन किया है। </p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="448" height="252" class="wp-image-16390" style="width: 448px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01.jpg 1920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01-300x169.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01-1024x576.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01-768x432.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250902145613_01-1536x864.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 448px) 100vw, 448px" /></p>



<p>जांच आख्या अनुसार इन्होंने बिना किसी कारण परियोजना मे प्रयुक्त की जाने वाली विभिन्न प्रकार की स्टील / लोहा आपूर्ति की मदों को लोकनिर्माण विभाग के एसओआर ( दरों की अनुसूची) मे हेरफेर करके बंदरबांट किया है। गौरतलब है कि वादी मुकदमा इंजीनियर महेश खरे, उप निदेशक मंडी समिति बाँदा मुताबिक 3 करोड़ 16 लाख 70 हजार 277 रुपया के हेराफेरी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। उल्लेखनीय है चित्रकूट मंडल के चार जिलों मे 71 अनाज मंडियों का निर्माण हुआ था। यह आज भी अनुउपयोगी साबित है। वहीं ग्रामीण अवस्थापना केंद्र की स्थिति और अधिक बदहाल है। बावजूद इसके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आज तक दोषियों पर कार्यवाही सम्भव नही हो सकी है। विडंबना है कि घोटालेबाजी के पारंगत अधिकारियों से रिकवरी मुश्किल है। क्योंकि शासनादेश आड़े आएगा। वहीं विवेचक समयबद्ध जांच तक नही करेंगे। जैसे एनआरएलएम के लगभग 3 करोड़ घोटाले पर महज 88 लाख एफआईआर पर बाँदा मे एक साल बाद भी सन्नाटा पसरा है। इसी योजना मे उन्नाव मे 5 करोड़ गबन की एफआईआर कुछ माह पहले वर्ष 2025 मे ही हुई है। भ्रष्टाचार की परतों का इतिहास बनाता बुंदेलखंड पैकेज ठीक वैसा ही है जैसे कामचोरों/चोरों को स्वर्ण तिजोरी की चौकीदारी सौंप दी जाती है।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-special-grain-markets-built-under-the-bundelkhand-package-are-tainted-by-the-corruption-of-officials-in-district-bandaup/">बुंदेलखंड पैकेज से निर्मित विशिष्ट अनाज मंडियों पर अधिकारियों के भ्रष्टाचार की कालिख…</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>महज एक भारी बरसात से आधुनिक विकास के आदर्श धराशायी हो जाते है&#8230;.</title>
		<link>https://soochanasansar.in/the-ideals-of-modern-development-are-destroyed-by-just-one-heavy-rainfall/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Aug 2025 05:36:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[Main Stories]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बाँदा]]></category>
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[महाराष्ट्र]]></category>
		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[breakingnews]]></category>
		<category><![CDATA[CM yogi]]></category>
		<category><![CDATA[latestnews]]></category>
		<category><![CDATA[pm modi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://soochanasansar.in/?p=16086</guid>

					<description><![CDATA[<p>@आशीष सागर दीक्षित,बाँदा। बाँदा #बुंदेलखंड ✒️ किन्तु क्यों यह मनन करें चारों तरफ बाढ़ की विभीषिका ने हासिये पर जूझते आम नागरिकों व किसानों को घरों से बरसाती पन्नियों की छत्रछाया मे धकेल दिया है। यह बरसात की दैवीय आपदा कंक्रीट के विकास को बेनकाब करती है। वर्षाकाल मे नदियों का कुदरती कनेक्टिविटी का चैनल &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-ideals-of-modern-development-are-destroyed-by-just-one-heavy-rainfall/">महज एक भारी बरसात से आधुनिक विकास के आदर्श धराशायी हो जाते है&#8230;.</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="267" class="wp-image-16088" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974.jpg 2048w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974-300x200.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974-1024x683.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974-768x512.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364956974-1536x1024.jpg 1536w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p>@<strong>आशीष सागर दीक्षित,बाँदा। </strong></p>



<h2 class="wp-block-heading">बाँदा #बुंदेलखंड ✒️</h2>



<ul class="wp-block-list">
<li><em><strong>किन्तु क्यों यह मनन करें</strong></em></li>
</ul>



<p><strong>चारों तरफ बाढ़ की विभीषिका</strong> ने हासिये पर जूझते आम नागरिकों व किसानों को घरों से बरसाती पन्नियों की छत्रछाया मे धकेल दिया है। यह बरसात की दैवीय आपदा कंक्रीट के विकास को बेनकाब करती है। वर्षाकाल मे नदियों का कुदरती कनेक्टिविटी का चैनल सबको हलकान करता है तो कभी सूखे से परेशान भी।<br>यह बाढ़ आपदा पूरे देश मे खाशकर प्राकृतिक जलस्रोतों से सम्रद्ध रहे राज्यों, प्रान्तों और जनपदों मे वहां की प्राचीन वर्षा जल संरक्षण पद्धति के खात्मे का संकेतक है। यह बाढ़ की बीमारी हमारे यहां के चंदेल कालीन तालाबों, गांव के छोटे-बड़े जोहड़, पोखर,तालाबों, खेतों की मेडो और मेड पर पेड़ों के नाम पर लगातार होती शोशेबाजी व सरकारी माध्यम से वर्षा जल संरक्षण, तालाबों, नदियों के पुनुरुद्धार अर्थात नवजीवन देने के करोड़ो रुपयों वाले बजट से तरबतर करतबों एवं सरकार की कठपुतली बनकर व्यक्ति विशेष /गैर सरकारी दिखावटी पब्लिक स्टंट को भी बेपर्दा करती है।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="890" class="wp-image-16090" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566.jpg 920w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566-135x300.jpg 135w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566-460x1024.jpg 460w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566-768x1710.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364963566-690x1536.jpg 690w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p><br>सनद रहे कि बुंदेलखंड से बिहार तक और प्रयागराज की माता गंगा (कुछ माह पूर्व जिन पर महाकुंभ के नाम पर हजारों करोड़ रुपया सिर्फ व्यवस्था बजट / मीडिया प्रबंधन मे खर्च हुआ था।) से हमीरपुर-बाँदा की केन,यमुना चंद्रावल नदियों को रिवाइवल (गहरीकरण, सुंदरीकरण, नदियों के किनारे आडंबर युक्त पौधरोपण, उनके कैचमेंट क्षेत्र मे खनन रोकने अर्थात बाढ़ का डूब क्षेत्र कम करने की कागजी योजनाओं) पर भी यक्ष प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है। क्या यह सारे नीति-नियंता इनका मुकम्मल चिंतन करतें है ? या जो सरकार कहती है उसमें ही सुरताल रहता है ? इन सतही माध्यमों से केंद्रीय अथवा राज्य सरकार किसी का <strong>सम्मान</strong> तो कर सकती है मसलन अपने <strong>आईएएस</strong> अधिकारियों का भी !!! लेकिन अफसरों के साथ मौजूद होकर मिट्टी भरे मनरेगा के तसलों पर फोटोशूट कराने के हास्यास्पद उदाहरण को झूठा नही बतला सकती है। गौरतलब है कि दिल्ली मे वर्तमान या पूर्व रही केंद्र सरकार की बनिस्बत लक्जरी दफ्तरों मे बैठें ब्यूरोक्रेटस के बस का नही है कि वे वार्षिक दैवीय बाढ़ या सूखा आपदा को रोक सकें। क्योंकि उनकी नजर मे नदियां बड़े-छोटे बांधों के निर्माण करने का साधन है। उनके आसपास उपलब्ध प्राकृतिक जंगलों को रिवर फ्रंट बनाने या वन्यजीवों के अभ्यारण को नष्ट करते हुए केन-बेतवा जैसे बड़े बांधों का क्रियान्वयन करना है। वहीं भूमि संरक्षण, सिंचाई विभाग के जरिये बनते सैकड़ो खेत तालाबों और मेड़बंदी, बन्धियों का बजट गर्क करना है।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="482" class="wp-image-16091" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364899831.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364899831.jpg 944w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364899831-249x300.jpg 249w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364899831-849x1024.jpg 849w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364899831-768x926.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p> क्या हमारे देश की दिल्ली सरकारें या राज्य सरकार बिना लाग-लपेट पारदर्शिता अपनी ही सरकार मे बनें <strong>&#8220;अमृत सरोवर&#8221; </strong>औऱ <strong>चंद्रावल</strong> जैसी छोटी बरसाती नदियों का ज़मीनी अनुश्रवण या बजट खर्च मूल्यांकन करा सकती है ? क्या अब तक वर्षों मे भौतिक विकास के माडल से भोलेनाथ की काशी/बनारस अथवा उत्तराखंड के केदारनाथ की आपदा रुकी है ? क्या विकास और अंधाधुंध पर्यटन की दौड़ मे प्रतिभागी हिमाचल प्रदेश जिसके अनियमित विकास पर माननीय उच्चतम न्यायालय तक को टिप्पणी करनी पड़ी उसका नेचुरल डिजास्टर रोक पाती है ?</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="519" class="wp-image-16092" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364894192.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364894192.jpg 862w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364894192-231x300.jpg 231w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364894192-789x1024.jpg 789w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364894192-768x997.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p>क्या देश की सारी नदियों की अस्मिता बचाने को उनके गर्भगृह से कैचमेंट क्षेत्रफल तक और दिल्ली मे भूमिगत सैकड़ो तालाबों से नवाबी नगर <strong>लखनऊ</strong> के बड़े तालाब (<strong>वहां का गोमती नगर हाईकोर्ट भवन भी तालाब का हिस्सा है),</strong>गोमती नदी के अतिक्रमण से बुंदेलखंड की केन, यमुना,बेतवा, उर्मिल,धसान, मंदाकनी,पहुंज और चंबल तक का कछार,कैचमेंट एरिया मानव हस्तक्षेप से सदा के लिए मुक्त कर सकती है ? लिखने का उद्देश्य इतना ही है कि बाढ़ या सूखा आपदा को सालाना बजट खर्च करने का जरिया बनवाने की अपेक्षा हमारी निर्वाचित राज्य / केंद्र सरकार चाहे वर्तमान हो या तत्कालीन सबसे पहले प्राथमिकता से समूचे देश की सारी नैसर्गिक / प्राकृतिक वाटर बॉडीज, जलराशियों,जलस्रोतों को आधुनिक विकास माडल और मानवीय कब्जों से सर्वोच्च न्यायालय व उच्चन्यायालय इलाहाबाद के न्यायिक आदेशानुसार मुक्त कराने का कानून सम्मत समाधान करने का कष्ट करें। यदि ऐसा यथास्थिति यथासंभव मुनासिब हुआ तो यकीनन मानव जनित बाढ़ आपदा,मालवा से विदर्भ, बुंदेलखंड तक का सुखाड़, अतिवर्षा और भारी बाढ़ आपदा का माकूल निदान करने मे सक्षम होकर जनता के सर्वांगीण/ सर्वहारा/समग्र इकाईयों के उत्थान का अभीष्ठ लक्ष्य अवश्य ही प्राप्त कर सकती है। जिससे किसानों,खेतों, जंगलों, तालाबों और नदियों का सुंदर भारत निर्माण हो सकेगा। उल्लेखनीय है मैंने यहां देशभर के दफन होते दरिया,खत्म होती जल राशियों, ग्रामीण-शहरी तालाबों और सालभर सिसकती मृत्युशैया से ग्रसित मौजूदा बाढ़ से त्रस्त जल स्रोतों का उदाहरण इसलिए नही दिया है ताकि आप सब स्वयं अपने गांवो,कस्बों, शहरों, प्रान्तों और राज्यों मे इनका भविष्यगामी ज़मीनी परीक्षण/निरीक्षण/अध्ययन कर सकतें है। उन तालाबों को खोजिए जो गांव के किसी बुजुर्ग की याद मे जल संरक्षण के बरक्स बने थे। उन बरसाती नदियों को ढूंढिए जहां अपने बचपन को आपने अठखेलियाँ करते जिया होगा। क्या आज उन्हें जीवटता से वास्तविक रूप मे बचाने वाले और मिटाने वाले लोकतांत्रिक व्यवस्था आदर्शों के प्रतिमान लिए दिखतें है ? वे आज कितने अलग-थलग खड़े है सोचियेगा।</p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="532" class="wp-image-16093" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364927778.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364927778.jpg 1080w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364927778-226x300.jpg 226w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364927778-770x1024.jpg 770w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/FB_IMG_1754364927778-768x1021.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p>(<strong>पोस्ट की सारी तस्वीर प्रयागराज की गंगा नदी व बाँदा से प्रकाशित खबर की है।)</strong></p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/the-ideals-of-modern-development-are-destroyed-by-just-one-heavy-rainfall/">महज एक भारी बरसात से आधुनिक विकास के आदर्श धराशायी हो जाते है&#8230;.</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>जब नदियां अपनी हत्या का बदला लेंगी, तो कोई नहीं बचेगा&#8230;</title>
		<link>https://soochanasansar.in/when-the-rivers-take-revenge-for-their-murders-no-one-will-be-spared/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 05 Jun 2025 08:55:41 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Articles]]></category>
		<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[Main Stories]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[बुंदेलखंड]]></category>
		<category><![CDATA[मध्यप्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राज्य]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[breakingnews]]></category>
		<category><![CDATA[CM yogi]]></category>
		<category><![CDATA[latestnews]]></category>
		<category><![CDATA[pm modi]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://soochanasansar.in/?p=15638</guid>

					<description><![CDATA[<p>@पीयूष बबेले, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के मीडिया सलाहकार। WorldEnvironmentDay आज 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है। शब्दों के सागर प्रवाह मे दर्जनों लेख,खबरें, गतिविधियों के दरम्यान यह लेख पढ़ा जाना चाहिए। क्योंकि आज इसकी प्रासंगिकता अति आवश्यक है। सभ्यताएं मातृहंता होती हैं मशहूर पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र अक्सर यह बात सभ्यता और &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/when-the-rivers-take-revenge-for-their-murders-no-one-will-be-spared/">जब नदियां अपनी हत्या का बदला लेंगी, तो कोई नहीं बचेगा&#8230;</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>@<strong>पीयूष बबेले, वरिष्ठ पत्रकार, लेखक, पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के मीडिया सलाहकार। </strong></p>



<h1 class="wp-block-heading">WorldEnvironmentDay</h1>



<p>आज 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस है। शब्दों के सागर प्रवाह मे दर्जनों लेख,खबरें, गतिविधियों के दरम्यान यह लेख पढ़ा जाना चाहिए। क्योंकि आज इसकी प्रासंगिकता अति आवश्यक है। </p>



<p>सभ्यताएं मातृहंता होती हैं मशहूर पर्यावरणविद् <strong>अनुपम मिश्र </strong>अक्सर यह बात सभ्यता और नदी के रिश्ते के बारे में कहा करते थे। उनका कहना था कि सभ्यताएं जिन नदियों के किनारे पैदा होती हैं, विकसित होने के बाद उन्हीं नदियों को खा जाती है। यह बात दिल्ली वाले यमुना के बारे में, कानपुर वाले गंगा के बारे में और हजारों-हजार लोग अपने-अपने गांव-कस्बे में सूख चुकी नदियों को देखकर बखूबी समझ सकते है।</p>



<p>हममें से हर आदमी अपने-अपने हिस्से की सूखती नदी को देखकर वास्तव में दुखी होता है। सूखी नदी से गुजरते हुए अपने बचपन की यादों में जाता है। नदी मे छपाकों के बीच होने वाली शरारतें उसके मन में हूक उठाती है। फिर अचानक हम वापस वर्तमान में आते है और व्यवस्था को कोसते हुए कंधे झटककर आगे बढ़ जाते है। इस पूरी प्रक्रिया में या तो नादानी बस या फिर जानबूझकर हम इस बात को बिलकुल दरकिनार कर देते हैं कि नदी सुखाने में बहुत नहीं, तो थोड़ी भूमिका हमारी भी है।</p>



<p>व्यवस्थाओं की गलतियां तो हम अक्सर समझ ही लेते हैं, आज इस पर्यावरण दिवस पर हम अपने हिस्से की गलतियों को समझने की भी कोशिश करते है। सबसे पहले हम यह समझते हैं कि नदी किसे कहते है। आपको लगेगा कि यह बड़ी बचकानी बात है कि नदी किसे कहते हैं, लेकिन अगर एक बार हम नदी को ढंग से समझ लें तो हमें अपनी और अपनी व्यवस्था की गलितयां समझने में आसानी होगी।</p>



<p><strong>नदी किसे कहते है</strong>&#8211; </p>



<p>चलिए पहले गंगा की ही बात करते है। जो लोग उत्तराखंड के चार धाम की यात्रा करके लौटते हैं, उनके मुंह से आपने अक्सर सुना होगा कि गंगोत्री से तो पतली सी धार निकलती है, लेकिन नीचे आकर गंगा बड़ी हो जाती है। और न जाने कैसे मैदान में आकर इतनी बड़ी नदी बन जाती है। उनका विस्मय सही है, क्योंकि नदी कोई पानी की धार भर नहीं है जो अपने उद्गम से निकलकर समुद्र में मिलने तक सीधी बहती चली जाती है।</p>



<p>गंगा को बनाने में गंगोत्री जैसे हजारों ग्लेशियर लगे होते हैं जो पूरे हिमालय से हजारों जल धाराएं और नदियां पैदा करते हैं, जो गंगा में मिलती रहती हैं और नदी बनती जाती है।</p>



<p>इन ग्लेशियरर्स के अलावा दूसरी चीज जो नदी को बनाती है वह है बारिश का पानी। गंगा नदी के बेसिन में जहां जितना पानी बरसता है, अंतत: उसे सहायक नदियों के जरिए गंगा की मुख्यधारा में मिलना है और नदी को बड़ा करना है।</p>



<p>इन दो चीजों के अलावा तीसरी चीज है भूजल। यानी जमीन के नीचे भरा पानी। आपने देखा होगा कि आपके शहर या गांव के पास बहने वाली नदी का तल गांव-शहर के सबसे निचले तल से भी नीचा होता है। अगर नदी का तल ऊंचा और गांव का तल नीचा हो, तो फिर तो गांव पानी में डूब ही जाएगा। यह व्यवस्था इसलिए है कि जब बारिश नहीं होती और ग्लेशियर भी कम पिघलते हैं, उस समय भी भूजल जमीन के भीतर बह रही एक्वाफिर्स या जलधाराओं के माध्यम से रिस-रिसकर नदी में जाता रहता है और नदी के प्रवाह को बनाए रखता है। यही वह प्रमुख वजह है जिनसे उन नदियों में भी सालभर पानी बना रहता है, जिनका जलस्रोत कोई ग्लेशियर नहीं है।</p>



<p>यानी नदी को बनाने के तीन प्रमुख कारक हैं- ग्लेशियर, वर्षा जल और भूजल। यह तीन चीजें आपको बताती हैं कि नदी बनती कैसे है. अब इन तीनों को जानने के बाद यह भी जान लिया जाए कि नदी मिटती कैसे है। और उसे मिटाने में हमारी भूमिका क्या है।</p>



<p><strong> नदी कैसे मरती है- </strong></p>



<p>गंगा के बारे में पहला एक्शन प्लान आए तीन दशक से ज्यादा का समय हो गया है। लेकिन नदी की दशा में अब तक कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ है। इसकी पहली वजह है कि आजादी के बाद अपनी बड़ी आबादी की भूख और प्यास मिटाने के लिए हमने बड़े पैमाने पर बांध बनाए और नहरें निकालीं। यही बांध शहरों को पानी सप्लाई के जरिए हमारी प्यास बुझाते हैं और खेतों को पानी देकर अन्न उपजाकर हमारी भूख मिटाते है। बुंदेलखंड जैसे जल संकट क्षेत्र मे नदियों पर बेतहासा खनन किया गया, जा रहा है। </p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="213" class="wp-image-15489" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250502_085349.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250502_085349.jpg 1067w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250502_085349-300x160.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250502_085349-1024x546.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG_20250502_085349-768x410.jpg 768w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p><strong>घर पर पानी बर्बाद होता है तो नदी मरती है-</strong></p>



<p>इतनी बड़ी आबादी को जिंदा रखने के लिए ऐसा करना जरूरी भी था। लेकिन ऐसा करने के दौरान पानी की बरबादी करना बिलकुल जरूरी नहीं था। पहले आदमी जब नदी में नहाने जाता था, तो कितना भी नहा ले, वह नदी का एक बूंद पानी बरबाद नहीं कर पाता था, क्योंकि नदी का पानी नदी में रहता था। इसी तरह जब आदमी कुंए से पानी भरकर लाता था, तो घर में पानी का इस्तेमाल सिर्फ पीने के लिए और भोजन बनाने के लिए होता था। थोड़ा बहुत पानी निस्तार के लिए होता था। यह पानी इतना कम होता था कि घर से बाहर निकलने के बाद कच्ची जमीन में जाकर जमीन में सोख जाता था।</p>



<p>लेकिन जब बिना मेहनत के पानी घर आने लगा तो हम पानी का इस्तेमाल करने के बजाय उससे खेलने लगे। तकनीक के विकास, आधुनिक सुख सुविधाओं और औद्योगिक जरूरतें बढ़ने के बाद हमारा पानी का यह खेल खिलवाड़ में बदलता चला गया। नतीजा यह हुआ कि पहले बड़े शहर, फिर कस्बे और अब गांव तक नदी से पानी खींचे जा रहे हैं, बिना इसकी परवाह किए हुए कि यह पानी नदी को वापस मिल रहा है या नहीं।</p>



<p><strong>खेती के पैटर्न बदलते है तो नदी मरती है-</strong></p>



<p>यह तो हुई घरों और उद्योगों की बात, अब बात करते है खेती की। खेती को पानी चाहिए इसमें किसी को कोई संदेह नहीं है। लेकिन जब खेती के नाम पर हमें बांधों और नहरों से पानी मिलने लगा तो हमें पानी की हवस हो गई। फिर हमने खेती के पैटर्न बदल दिए। पंजाब जैसा इलाका जिसे कुदरत ने चना और दलहन जैसी खेती के लिए बनाया था, उसे हमने खूब पानी पीने वाली धान और गेहूं जैसी फसलों का गढ़ बना दिया। गन्ना पहले बाढ़ वाले इलाकों में होता था, लेकिन जब गंगा की नहरें निकलीं तो पश्चिमी यूपी गन्ना बेल्ट बन गया। चूंकि ये दोनों इलाके हिमालय से निकलने वाली नदियों के रास्ते में पड़ने वाले पहले मैदानी इलाके थे, इसीलिए हमने यहीं पानी का खूब उपयोग कर डाला और उस उपयोग को जल बंटवारे के रूप में कानूनी जामा भी पहना दिया। जो पानी नीचे जाना चाहिए था, वह ऊपर ही जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होने लगा। इस बात की तस्दीक करनी है तो दिल्ली के ऊपर हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज चले जाइये। इस बैराज के डाउन स्ट्रीम को आप पैदल चलकर पार कर सकते हैं और आपके पंजे तक नहीं भीगेंगे। क्यों, क्योंकि उसके ऊपर का सारा पानी कानूनी रूप से अलग-अलग राज्यों को बांट दिया गया है।</p>



<p><strong>जब गांव-शहर में बोरिंग होती है तो नदी मरती है-</strong></p>



<p>यहां तक हमने देखा कि अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए हमने नदियों को बांधा और उनका पानी घरों, खेतों और फैक्ट्रियों तक ले आए। पानी मुठ्ठी में आने के बाद हमने अपनी जरूरतें बढ़ा ली और पानी से खिलवाड़ करने लगे लेकिन हमारी बढ़ती जरूरतों या फिर महात्मा गांधी के शब्दों में कहें तो बढ़ती हवस को पूरा करने के लिए यह पानी भी कम पड़ने लगा। तब हमने बहते पानी के साथ ही जमीन के भीतर बसे भूजल पर डाका डालना शुरू किया। घरों, खेतों और फैक्ट्रियों में पानी की तलब पूरी करने के लिए पूरे देश में अंधाधुंध बोरिंग की गईं। यह बोरिंग पुराने जमाने के कुओं और रहंट से भूजल निकालने के तरीकों से अलग थीं। कुएं से पानी निकालने में मेहनत लगती थी, इसलिए सीमित पानी निकाला जाता था। रहंट का पानी भी सीमित था। लेकिन बोरिंग के पाइप से निकलती मोटी धार जमीन को सुखाने के लिए बहुत काफी थी। पिछले साल नासा ने अपनी एक रिपोर्ट में दिखाया था कि पंजाब और हरियाणा के बड़े इलाके में भूजल बहुत ज्यादा गिर गया है, जबकि इस इलाके में औसत बारिश में कोई खास कमी नहीं आई है. यानी भूजल का बेतहाशा दोहन हो रहा है।</p>



<p>भूजल के इस दोहन के कारण जो पानी एक्वाफिर्स के जरिए वापस नदी में जाना चाहिए था, नदी में नहीं पहुंच सका. इस तरह नदियों को बांधने के बाद उन तक भूजल से होने वाली पानी की सप्लाई को भी हमने रोक दिया।</p>



<p><strong>जब सीवेज गिरता है तो नदी मरती है-</strong></p>



<p><img loading="lazy" decoding="async" width="400" height="300" class="wp-image-15639" style="width: 400px;" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-scaled.jpg" alt="" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-scaled.jpg 2560w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-300x225.jpg 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-1024x768.jpg 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-768x576.jpg 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-1536x1152.jpg 1536w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/IMG20250114155640-2048x1536.jpg 2048w" sizes="auto, (max-width: 400px) 100vw, 400px" /></p>



<p>नदी को मिलने वाले पानी के दो रास्ते बंद करके ही हमें संतोष नहीं हुआ। उसका साफ पानी छीनकर, हमने उसे जी भरकर गंदा किया। फिर प्रदूषित पानी सीवेज के रास्ते नदी में डाल दिया। दिल्ली में यमुना के किसी भी पुल से गुजरते समय दुर्गंध को जो भभका आपकी नाक को सड़ा देता है, असल में वह यमुना की लाश की बदबू है। यमुना की लाश इसलिए, क्योंकि हथनी कुंड में बंधने के बाद दिल्ली में यमुना में एक बूंद साफ पानी नहीं आता, जो पानी यमुना में दिखता है वह उसमें गिरने वाले 17 नालों का विशुद्ध प्रदूषित पानी है। वह सिर्फ गंदा नाला है, उसमें नदी के साफ पानी की एक बूंद नहीं है। इस तरह पहले हमने नदी को सुखाया और फिर उसमें प्रदूषित पानी डाल दिया. जब हमने नदी के साथ ऐसा क्रूर व्यवहार किया, तो नदी भी तो हमारे साथ कुछ करेगी।</p>



<p><strong>जब नदी मरती है, तो हम भी मरते है-</strong></p>



<p>नदी आखिर कब तक बर्दाश्त करती ? अब उसने बदला लेना शुरू कर दिया है। इस बदले को जरा वैज्ञानिक नजरिये से समझिये। हम यह जान चुके हैं कि प्राकृतिक रूप से भूजल रिसकर नदी में जाता है लेकिन जब हमने अंधाधुंध बोरिंग शुरू कर दी, तो भूजल का स्तर बहुत नीचे चला गया। इतना नीचे की नदी के तल से भी नीचे चला गया। ऐसे में हुआ यह कि पानी जमीन से रिसकर नदी में जाने के बजाय, नदी से रिसकर भूजल में मिलने लगा। चूंकि नदी में हमने पूरी तरह से प्रदूषित पानी डाला हुआ था, लिहाजा यही प्रदूषित पानी नदी में से रिसकर शहरों के पूरे भूजल को प्रदूषित करने लगा। इसका नतीजा हुआ कि अब हम जब गहरी बोरिंग करके पानी निकालते हैं तो हमें साफ पानी के बजाय प्रदूषित पानी मिलने लगा है। यह पानी बड़े पैमाने पर बीमारियों की जड़ बन रहा है।</p>



<p>दूसरी चीज यह कि जब भूजल को बेतहाशा निकाला जाता है तो जमीन के अंदर पानी और बाकी तत्वों का संतुलन गड़बड़ा जाता है। पश्चिम बंगाल की जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर दीपांकर चक्रवर्ती ने इस असंतुलन पर पूरा अध्ययन किया है। अपने 20 साल से चल रहे शोध में वे अब तक बंगाल से लेकर पश्चिमी यूपी के गढ़मुक्तेश्वर तक गंगा के पास के भूजल में आर्सेनिक की ज्यादा मात्रा साबित कर चुके हैं। बढे़ हुए आर्सेनिक ने गंगा किनारे के सारे भूजल को पीने के लिए निषिद्ध कर दिया है। आपको यकीन नहीं होता तो यूपी के बलिया और आसपास के इलाकों में जाकर देखिए जहां आर्सेनिक ने कहर ढा रखा है। यहां आपको ऐसे हैंडपंप मिल जाएंगे, जिन पर लिखा रहता है कि इनका पानी न पिएं, इनमें आर्सेनिक ज्यादा है।</p>



<p>यही हाल यमुना का है। आगरा में यमुना का प्रदूषित जल शहर के भूजल में मिलने से पूरे शहर का भूजल प्रदूषित हो चुका है। गंगा-यमुना प्रमुख नदियां हैं, इसलिए इनकी जांच पड़ताल होती रहती है, लेकिन छोटी नदियों और उनके पास बसे कस्बों की विस्तृत जांच की जाएगी तो कहानी इससे उलट नहीं आएगी। इस भयावह सचाई के बाद मन में सवाल आएगा कि नदी का बदला रोकने के लिए कोई तो रास्ता होगा।</p>



<p><strong>हम भी बच सकते हैं और नदी भी, बशर्त&#8230;</strong></p>



<p>नदी का बदला रुक सकता है, लेकिन शांति का सफेद झंडा पहले हमें ही दिखाना होगा। अगर हम अपना मातृहंता स्वभाव छोड़ देंगे, तो माता भी कुमाता बनने को मजबूर नहीं होगी। इसके लिए पहली बात तो हमें अपने राष्ट्रपिता की ही माननी पड़ेगी जो उन्होंने एक शताब्दी पहले लिखी अपनी किताब हिंद स्वराज में कही थी। सवाल-जवाब शैली में लिखी इस पतली सी किताब में सवाल पूछा जाता है- क्या आप आजादी के बाद भारत का विकास इंग्लैंड के मॉडल पर करना चाहते है। जवाब आता है- नहीं, इंग्लैंड के मॉडल पर भारत का विकास नहीं हो सकता। इंग्लैंड छोटा सा देश है। और उसके इस तरह के विकास के लिए पूरी दुनिया का शोषण करना पड़ रहा है। अगर भारत जैसा देश इस मॉडल पर आगे बढ़ा तो उसे धरती जैसे कई ग्रहों का शोषण करना पड़ेगा।</p>



<p>महात्मा गांधी जो बात इतनी आसानी से कह गए, उस तक लौटने में हमें अपनी आदतें बदलनी होंगी। पहली जरूरत तो यह होगी कि खेती की जरूरत के हिसाब से पानी के इस्तेमाल की बजाय पानी की उपलब्धता के हिसाब से खेती करनी होगी। यह काम हम हजारों साल से करते आए थे और इसे कुछ दशक पहले ही छोड़ा है। इस पर लौटा जा सकता है।</p>



<p>दूसरी चीज यह कि अब शहरों में रहना तो नहीं छोड़ा जा सकता और न उनकी पानी की जरूरत घटाई जा सकती है। ऐसे मे ग्राउंड वाटर रिचार्ज को आंदोलन के तौर पर छेड़ा जा सकता है। केरल जैसे राज्य इस बारे में रोल मॉडल हो सकते हैं। जहां ग्राउंड वाटर रिचार्ज शहरी जीवन का अभिन्न हिस्सा हो गया है। हम इस बात की ताकीद करें कि जहां से भी हम जमीन का पानी निकाल रहे हैं, हर हाल में उसका बड़ा हिस्सा जमीन को लौटा दे। ये रिचार्ज पिट बारिश के पानी को जमीन में पहुंचाने के भी काम आ जाएंगे। पहले यह काम तालाबों से होता था, लेकिन अब तालाबों की जमीन पर आबादी का अवैध और वैध दोनों तरह का कब्जा हो चुका है।</p>



<p>बाकी का काम सरकारों का है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और दूसरी बड़ी परियोजनाओं को सरकारें ही अपने मॉडल के हिसाब से चला पाएंगीं। लेकिन वे योजनाएं तभी बनेंगी, जब सरकारों को लगेगा कि जनता इनके लिए तैयार है। अगर जनता इसी तरह पानी खर्च करना चाहेगी तो सरकारें और ज्यादा पानी निकालने की योजनाएं बनाएंगी। और पानी की इस चाह में हम सूखा पैदा करते जाएंगे।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/when-the-rivers-take-revenge-for-their-murders-no-one-will-be-spared/">जब नदियां अपनी हत्या का बदला लेंगी, तो कोई नहीं बचेगा&#8230;</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
