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	<title>Soochana Sansar</title>
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	<description>Hindi Dainik</description>
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	<title>Soochana Sansar</title>
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		<title>देश पर मंडरा रहा खतरा!: भारत में कभी भी तबाही मचा सकती हैं 2500 ग्लेशियर झीलें, 27 राज्यों पर बाढ़ का साया</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:49:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>देश के 36 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में से 27 प्रदेश, आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। हिमनदी झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम का आकलन करने की तकनीक तो विकसित कर ली गई है, लेकिन इससे बचाव अभी तक एक चुनौती &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">देश के 36 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में से 27 प्रदेश, आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। हिमनदी झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम का आकलन करने की तकनीक तो विकसित कर ली गई है, लेकिन इससे बचाव अभी तक एक चुनौती बना हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। ऐसे में अगर जीएलओएफ जैसा कुछ होता है तो उस दौरान जानमाल के बचाव का अचूक और सुरक्षित समाधान नजर नहीं आ रहा। देश में 25 सौ से अधिक ग्लेशियल झीलें संवेदनशील स्थिति में हैं तो वहीं हिमालय की 400 से अधिक ग्लेशियर झीलें तेजी से पिंघल रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आई तेज बाढ़ से जानमाल की भारी क्षति हुई है। नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली भोटेकोशी नदी को हिमालयी नदी कहा जाता है। नेपाल की इस भयानक त्रासदी के पीछे हिमनदी झील का फटना बताया जा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="667" height="458" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753.png" alt="" class="wp-image-19993" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753.png 667w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753-300x206.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753-220x150.png 220w" sizes="(max-width: 667px) 100vw, 667px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">देश के अनेक भागों में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या इसलिए गंभीर हो जाती है, क्योंकि बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। इसके चलते जब बाढ़ आती है तो भारी नुकसान होता है। अगर उक्त उपायों पर गंभीरता से काम हो तो जन-धन एवं संपत्ति की हानि को टाला जा सकता है। आपदा प्रबंधन पर डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 261 वीं रिपोर्ट में यह बात कही गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर काम हो</strong><br>समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि नदी तल एवं बाढ़-मैदानी क्षेत्रों में अतिक्रमण की निगरानी एवं उन्हें हटाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा विकसित किया जाए। ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अतिक्रमण किया गया है, उन्हें मानचित्र पर अंकित किया जाए। इससे संबंधित एजेंसी या विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सकेगी और भविष्य में होने वाली अतिक्रमण एवं अन्य उल्लंघनों को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन क्षेत्रों में सख्ताई के साथ अतिक्रमण को हटाया जाए, ताकि जल का प्राकृतिक प्रवाह दोबारा से स्थापित हो सके। इससे बाढ़ का जोखिम कम होगा। शहरों में जल निकासी मास्टर प्लान तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर गंभीरता से काम हो। नगर स्तरीय बाढ़ प्रबंधन योजना तैयार की जाएं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गूगल अर्थ इंजन आधारित तकनीक से निगरानी&nbsp;</strong><br>केंद्रीय जल आयोग ने सुदूर संवेदन तकनीक के माध्यम से हिमनदीय झीलों की निगरानी के क्षेत्र में अपनी आंतरिक क्षमता विकसित की है। गूगल अर्थ इंजन आधारित एक ऐसा मंच विकसित किया गया है, जो उपग्रह चित्रों का स्वचालित विश्लेषण कर हिमनदीय झीलों एवं अन्य जल निकायों के क्षेत्रफल का मापन करता है। जल आयोग, गूगल अर्थ प्लेटफार्म का उपयोग कर हिमनदीय झीलों के जल प्रवाह मार्गों को भी मैप पर दिखाता है। यह हिमनदीय झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम के आकलन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। ऐसे मानचित्रों को राज्यों, संघ क्षेत्रों, संस्थानों तथा सार्वजनिक उपक्रमों आदि के साथ साझा किया जाता है।&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/">देश पर मंडरा रहा खतरा!: भारत में कभी भी तबाही मचा सकती हैं 2500 ग्लेशियर झीलें, 27 राज्यों पर बाढ़ का साया</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:43:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया। इसके बाद रसुवा और नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों से शव बरामद किए गए हैं। &#8216;द काठमांडू पोस्ट&#8217; के अनुसार, वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a4%bc/">हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया। इसके बाद रसुवा और नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों से शव बरामद किए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;द काठमांडू पोस्ट&#8217; के अनुसार, वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि पानी का यह अचानक बहाव किस वजह से हुआ? नेपाल-चीन सीमा और उसके निचले इलाकों में आई इस आपदा के बारे में अब तक जो जानकारी मिली है वह इस प्रकार ।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/Trumps-Israeli-parliament---2026-08-27T164655.871-1787836198299.webp" alt="Trumps Israeli parliament - 2026-08-27T164655.871" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">नेपाल-चीन सीमा पर क्या हुआ?</h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बुधवार सुबह रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग पर भोटेकोशी नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ा, जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। शुरू में यह अनुमान लगाया गया कि शायद ग्लेशियर झील के फटने या हिमस्खलन (avalanche) के कारण ऐसा हुआ होगा। लेकिन दिन भर इस अचानक आए बहाव का कोई पक्का कारण पता नहीं चल सका।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ रसुवागढ़ी के पास शुरू हुई और रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में नदी के निचले इलाकों में बसी बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक यह रिपोर्ट तैयार की गई, सरकार ने 289 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रसुवा और धाडिंग के बीच बने पुल और अन्य बह गए। नुवाकोट के असिस्टेंट चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने कांतिपुर को बताया कि इस इलाके में लोगों की याददाश्त में यह अब तक की सबसे भयानक बाढ़ थी।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/WhatsApp-Image-2026-08-26-at-11.29.37-PM-1787836224987.webp" alt="WhatsApp Image 2026-08-26 at 11.29.37 PM" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या एवलांच या भूकंप की वजह से आई&nbsp;बाढ़?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर गिरने से एक नदी का रास्ता रुक गया था, जिससे एक अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया; बाद में यह बांध टूट गया और बाढ़ आ गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">US जियोलॉजिकल सर्वे ने बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में गोसाईंकुंडा से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। वैज्ञानिक अभी यह पक्का नहीं कर पाए हैं कि भूकंप की वजह से भूस्खलन हुआ या उसमें भूकंप की कोई भूमिका थी।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/20260827234L-1787836278189.webp" alt="20260827234L" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या खतरे की कोई चेतावनी दी गई थी?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">यह इलाका पहले से ही अचानक आने वाली बाढ़ के लिए संवेदनशील माना जाता है। पिछले साल भी 8 जुलाई को भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया था। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि पिछली बाढ़ नेपाल-चीन सीमा के पास लेंडे नदी में ग्लेशियर झील के फटने के कारण आई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सेंटिनल इमेजरी का उपयोग करके किए गए सैटेलाइट विश्लेषण से पता चला कि एक ग्लेशियर झील फटी थी, जिससे पानी नीचे की ओर बहने लगा था। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी थी कि हिमालय के क्षेत्र में कई संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं।लेकिन बुधवार की आपदा वाली जगह पर बर्फ और चट्टान का हिमस्खलन (avalanche) होने की कोई विशिष्ट भविष्यवाणी नहीं की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एक अध्ययन में नेपाल, भारत और तिब्बत में 3,624 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई। इनमें से 47 को संभावित रूप से खतरनाक और फटने के जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया, जिनमें से 21 नेपाल में थीं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/20260827232L-1787836291877.webp" alt="20260827232L"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">वैज्ञानिकों का क्या कहना है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बर्फ और चट्टान का बड़ा हिमस्खलन हुआ। प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट इमेजरी और नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार यही मुख्य कारण है। मलबा लेंडे नदी (भोटेकोशी की सहायक) में गिरा, जिससे मलबे से भरी असामान्य रूप से तेज बाढ़ आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ICIMOD के वैज्ञानिक जांच कर रहे हैं कि क्या संकरे हिस्से में मलबा जमा होकर अस्थायी लैंडस्लाइड डैम बना। गल्छी में त्रिशूली का जलस्तर 30 मिनट में नौ मीटर और मालेखु में सात मीटर बढ़ गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ सार्थक श्रेष्ठ के मुताबिक, सबूत नेपाल की ओर (स्याफ्रुबेसी के ऊपर) हुए हिमस्खलन को दर्शाते हैं, जिसने नदी रोक दी। चीनी मॉनिटरिंग सिस्टम में तिब्बत पक्ष पर कोई ऐसी घटना नहीं मिली। चीनी संस्थानों के साथ सहयोग जारी है; पूरी तस्वीर समझने में एक-दो हफ्ते लग सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/WhatsApp-Image-2026-08-26-at-9.43.06-PM-1787836308149.webp" alt="WhatsApp Image 2026-08-26 at 9.43.06 PM" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या एक और बाढ़ आ सकती है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों ने आगे खतरे की संभावना से इनकार नहीं किया। गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेंडे नदी अभी पूरी साफ नहीं हुई। कायास्था के अनुसार शुरुआती चिंता थी कि ऊपरी हिस्से में बड़ा पानी जमा हो सकता है, पर झील की पुष्टि के पर्याप्त सबूत नहीं। ICIMOD ने बादलों के कारण सैटेलाइट निगरानी में दिक्कत बताई। कायास्था ने कहा, &#8216;खतरा बना हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बढ़ते तापमान से हिमालय में ग्लेशियर पिघलने, बर्फ-चट्टान टूटने और हिमस्खलन की संभावना बढ़ती है, पर अगली घटना कहाँ होगी, कहना मुश्किल।&#8217; वैज्ञानिक ग्लेशियर झीलों और जोखिम वाले इलाकों पर नजर रखे हुए हैं।चीन ने निचले हिस्से में संभावित खतरनाक घटना की जानकारी दी। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल में चोटचेन और पुरुपे त्सांगपो नदियों के संगम के पास बड़ी झील बनी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गुरुवार सुबह तक करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और बहना शुरू हो गया। अगले तीन दिनों में 30 लाख घनमीटर और आ सकता है, जिससे प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा है। चीनी अधिकारी निगरानी, बाढ़ सिमुलेशन और आपातकालीन तैयारी कर रहे हैं। ये नदियाँ तिब्बत से निकलकर नेपाल में भोटेकोशी के रूप में त्रिशूली की सहायक नदी बनती हैं।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a4%bc/">हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>यूपी में मनेगा ईको-फ्रेंडली रक्षाबंधन: भाई-बहन साथ लगाएंगे पेड़, पौधों को राखी बांधकर लेंगे सुरक्षा का संकल्प</title>
		<link>https://soochanasansar.in/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%88%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:30:13 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने की पहल रंग ला रही है। वन विभाग की पहल पर रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते को और प्रगाढ़ता देते हुए पौधरोपण कराया जाएगा। रक्षाबंधन पर पौधरोपण कर भाई-बहन पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लेंगे। &#8216;पौधरोपण महायज्ञ-2026&#8217; के तहत (28 अगस्त, शुक्रवार) को सभी वन प्रभागों &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%af%e0%a5%82%e0%a4%aa%e0%a5%80-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%88%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%ab%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82%e0%a4%a1/">यूपी में मनेगा ईको-फ्रेंडली रक्षाबंधन: भाई-बहन साथ लगाएंगे पेड़, पौधों को राखी बांधकर लेंगे सुरक्षा का संकल्प</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उत्तर प्रदेश में वनाच्छादन बढ़ाने की पहल रंग ला रही है। वन विभाग की पहल पर रक्षाबंधन पर भाई-बहन के रिश्ते को और प्रगाढ़ता देते हुए पौधरोपण कराया जाएगा। रक्षाबंधन पर पौधरोपण कर भाई-बहन पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;पौधरोपण महायज्ञ-2026&#8217; के तहत (28 अगस्त, शुक्रवार) को सभी वन प्रभागों में भाई-बहन &#8216;एक पेड़ मां के नाम&#8217; अभियान के तहत पौधरोपण करेंगे। वन विभाग ने इस पुनीत अवसर के लिए कई भाई-बहनों से संपर्क भी साधा है। पौधों को रक्षासूत्र बांधकर पेड़ बनाने तक का संकल्प लिया जाएगा। यहां आम लोग भी पौधरोपण कर सकेंगे। सीएम योगी के हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य को लेकर लखनऊ के साथ ही समस्त वन प्रभागों में भी इस पहल को मूर्त रूप दिया जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="650" height="433" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1752.png" alt="" class="wp-image-19986" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1752.png 650w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1752-300x200.png 300w" sizes="(max-width: 650px) 100vw, 650px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading">रक्षासूत्र बांधकर पौधों की सुरक्षा का भी लेंगे संकल्प</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए पौधरोपण अनिवार्य है। पौधरोपण के उपरांत यहां पौधों को रक्षासूत्र भी बांधा जाएगा। फिर पौधरोपण करने वाले संकल्प लेंगे कि पौधे के पेड़ बनने तक इसकी रक्षा करेंगे। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा। वन विभाग के मुताबिक हरे पौधों को रक्षासूत्र बांधकर इनकी सुरक्षा व संरक्षा का संकल्प लिया जाएगा। पेड़ छाया और ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। जिस तरह बहनें भाई को राखी बांधती हैं तो भाई सुरक्षा का विश्वास दिलाता है, उसी प्रकार पेड़ लगाकर उसे सुरक्षा का विश्वास दिलाते हुए प्रकृति के रूप में सार्थक उपहार दिया जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">विशिष्ट वनों को स्थापित कर रही योगी सरकार</h3>



<p class="wp-block-paragraph">योगी सरकार सामाजिक समरसता, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु संतुलन के लिए प्रयासरत है। इसके लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर विशिष्ट वन भी स्थापित किए जा रहे हैं। नवीन विशिष्ट वनों की स्थापना थीम के अंतर्गत सरकार अलग-अलग उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए कई प्रकार के वनों का निर्माण कर रही है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">यूपी में एक दिन में लगाए गए थे 35.27 करोड़ पौधे</h3>



<p class="wp-block-paragraph">पौधरोपण महायज्ञ-2026 के तहत एक दिन (12 जुलाई) में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में दो स्थानों पर पौधरोपण कर इसका शुभारंभ किया था। यह अभियान पर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस तक चलेगा। इसके तहत रक्षाबंधन पर भी पौधे लगाए जाएंगे।</p>
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		<title>5 साल, 53 कोर्स और 2 राष्ट्रपतियों का दौरा: &#8216;नॉलेज सिटी&#8217; की ओर गोरखपुर, शिक्षा-चिकित्सा का नया हब बना MGUG</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:24:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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		<category><![CDATA[बड़ी खबर]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>स्थापना के महज पांच वर्षों के भीतर ही महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (MGUG) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। कुलाधिपति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के &#8216;नॉलेज सिटी 2032&#8217; विजन को धरातल पर उतारते हुए, यह विश्वविद्यालय आज उच्च, विशिष्ट और रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">स्थापना के महज पांच वर्षों के भीतर ही महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर (MGUG) ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति ला दी है। कुलाधिपति और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के &#8216;नॉलेज सिटी 2032&#8217; विजन को धरातल पर उतारते हुए, यह विश्वविद्यालय आज उच्च, विशिष्ट और रोजगारपरक शिक्षा का प्रमुख केंद्र बन चुका है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप तैयार किए गए इसके पाठ्यक्रम न केवल भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेज रहे हैं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खोल रहे हैं। शुक्रवार, 28 अगस्त को विश्वविद्यालय अपना 5वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है, जिसमें सीएम योगी आदित्यनाथ भी शिरकत करेंगे।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>12 से 53 पाठ्यक्रमों तक का शानदार सफर</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">28 अगस्त 2021 को तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों लोकार्पित इस विश्वविद्यालय ने अपनी शैक्षिक यात्रा मात्र 12 पाठ्यक्रमों के साथ शुरू की थी। आज यहां 53 विशिष्ट और रोजगारपरक पाठ्यक्रम सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। श्री गोरक्षनाथ मेडिकल कॉलेज और गुरु गोरक्षनाथ इंस्टिट्यूट में जहां MBBS और BAMS की पढ़ाई हो रही है, वहीं नर्सिंग, पैरामेडिकल, एग्रीकल्चर, फार्मेसी और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में डिप्लोमा से लेकर पीएचडी तक के कोर्स उपलब्ध हैं। कुलसचिव डॉ. प्रदीप कुमार राव के अनुसार, इन सभी पाठ्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रहित और छात्रों का स्वावलंबन है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" width="638" height="480" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1750.png" alt="" class="wp-image-19981" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1750.png 638w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1750-300x226.png 300w" sizes="(max-width: 638px) 100vw, 638px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>विद्यार्थियों की राष्ट्रीय स्तर पर चमक और हाई-टेक कैंपस</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एमजीयूजी अकादमिक ही नहीं, बल्कि तकनीकी नवाचार में भी आगे है। यह देश का पहला ऐसा विश्वविद्यालय है जहां छात्र संसद के चुनाव स्वनिर्मित सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन कराए जाते हैं। यहां के BAMS और MBBS के छात्रों ने राष्ट्रीय स्तर पर शोध में विशेष उपलब्धि हासिल कर प्रदेश का मान बढ़ाया है। प्रतिवर्ष BAMS के औसतन पांच और MBBS के दो छात्रों का चयन राष्ट्रीय स्तर के शोध अनुसंधान के लिए हो रहा है, जो किसी भी निजी विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>शोध और स्टार्टअप्स को पंख दे रहे एमओयू (MOU)</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">चिकित्सा और शिक्षा में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय ने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ करार (MOU) किए हैं। इनमें अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (IRRI), लुम्बिनी बौद्ध विश्वविद्यालय (नेपाल), एम्स गोरखपुर, केजीएमयू लखनऊ, आरएमआरसी और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन साझेदारियों से छात्रों को नवाचार और स्टार्टअप्स के लिए ग्लोबल एक्सपोजर मिल रहा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद का बेहतरीन संगम</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">एमजीयूजी केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि सस्ती और उत्कृष्ट चिकित्सा का भी पर्याय बन गया है। परिसर में संचालित मेडिकल कॉलेज से संबद्ध अस्पताल में जटिल कैंसर सर्जरी जैसी सुविधाएं किफायती दरों पर उपलब्ध हैं। वहीं, आयुर्वेद अस्पताल के 11 कॉटेज वाले विश्व स्तरीय पंचकर्म केंद्र ने बहुत कम समय में कई दुर्लभ बीमारियों के सफल इलाज से मरीजों का विश्वास जीता है। यहां अब पूर्वी उत्तर प्रदेश के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग इलाज के लिए आ रहे हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="738" height="414" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1751.png" alt="" class="wp-image-19982" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1751.png 738w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1751-300x168.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1751-390x220.png 390w" sizes="auto, (max-width: 738px) 100vw, 738px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>5 साल में दो राष्ट्रपतियों का आगमन और आगामी समारोह</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">यह प्रदेश का संभवतः पहला निजी विश्वविद्यालय है जिसने अपनी स्थापना के शुरुआती पांच वर्षों में ही दो राष्ट्रपतियों की मेजबानी की है। 2021 में इसके लोकार्पण के बाद, 1 जुलाई 2025 को वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने यहां अकादमिक भवन, ऑडिटोरियम और पंचकर्म चिकित्सा केंद्र का लोकार्पण किया था।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/5-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b2-53-%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b8-%e0%a4%94%e0%a4%b0-2-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%af/">5 साल, 53 कोर्स और 2 राष्ट्रपतियों का दौरा: &#8216;नॉलेज सिटी&#8217; की ओर गोरखपुर, शिक्षा-चिकित्सा का नया हब बना MGUG</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>5 लाख का कर्ज और मेहनत का जज्बा: अमेठी में &#8216;परमजीत ऑटो गैरेज&#8217; बना मिसाल, सीएम योगी की नीति से संवर रहा भविष्य</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:21:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर &#8216;आत्मनिर्भर यूपी&#8217; के संकल्प को लगातार मजबूती दे रही है। इस दिशा में &#8216;मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान&#8217; (सीएम-युवा) एक गेम-चेंजर योजना बनकर उभरी है। अमेठी जिले के जगापुर क्षेत्र की रहने वाली रूपाली देवी की सफलता की &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं और छोटे उद्यमियों को स्वरोजगार से जोड़कर &#8216;आत्मनिर्भर यूपी&#8217; के संकल्प को लगातार मजबूती दे रही है। इस दिशा में &#8216;मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान&#8217; (सीएम-युवा) एक गेम-चेंजर योजना बनकर उभरी है। अमेठी जिले के जगापुर क्षेत्र की रहने वाली रूपाली देवी की सफलता की कहानी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि सही समय पर मिली सरकारी वित्तीय सहायता कैसे किसी साधारण परिवार की किस्मत बदल सकती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="738" height="402" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1749.png" alt="" class="wp-image-19977" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1749.png 738w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1749-300x163.png 300w" sizes="auto, (max-width: 738px) 100vw, 738px" /></figure>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>ग्राम पंचायत से मिली जानकारी और 5 लाख का मिला सहयोग</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">रूपाली देवी का छह सदस्यीय परिवार लंबे समय से ऑटोमोबाइल क्षेत्र में आगे बढ़ने की इच्छा रखता था, लेकिन पूंजी की कमी के कारण कारोबार का विस्तार रुका हुआ था। इसी बीच उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से &#8216;सीएम-युवा&#8217; योजना की जानकारी मिली। आवेदन प्रक्रिया पूरी करने के बाद जनवरी 2026 में बैंक के जरिए उन्हें 5 लाख का ऋण प्राप्त हुआ। इस आर्थिक मदद ने उनके सीमित संसाधनों वाले पारिवारिक व्यवसाय को एक नया जीवन और दिशा देने का काम किया।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>&#8216;परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं गैरेज&#8217; का हुआ कायाकल्प</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">ऋण की राशि मिलते ही परिवार ने व्यवस्थित ढंग से काम शुरू किया। आधुनिक उपकरण, मशीनें और ऑटो पार्ट्स खरीदकर ‘परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज’ की नींव को मजबूत किया गया। वर्तमान में रूपाली देवी और उनके पति परमजीत मिलकर इसका सफल संचालन कर रहे हैं। यहां दोपहिया वाहनों की सर्विसिंग, मरम्मत और गुणवत्तापूर्ण ऑटो पार्ट्स की बिक्री की जा रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर ग्राहकों का भरोसा लगातार बढ़ा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>हर महीने 2 लाख का टर्नओवर, कारोबार ने पकड़ी रफ्तार</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">वित्तीय सहायता मिलने के महज कुछ ही महीनों भीतर इस कारोबार ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ ली है। सीमित दायरे में सिमटा व्यवसाय अब बड़ा रूप ले चुका है और ग्राहकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। वर्तमान में &#8216;परमजीत ऑटो पार्ट्स एवं ऑटो गैरेज&#8217; का मासिक टर्नओवर लगभग&nbsp;<strong>2 लाख</strong>&nbsp;तक पहुंच गया है। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है, बल्कि उनका सामाजिक मान-सम्मान और आत्मविश्वास भी काफी बढ़ा है।</p>



<h3 class="wp-block-heading"><strong>सीएम योगी के &#8216;जॉब क्रिएटर&#8217; विजन को मिल रही मजबूती</strong></h3>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि प्रदेश के युवाओं को सिर्फ नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला (जॉब क्रिएटर) बनाया जाए। बिना गारंटी लोन, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान करने वाली &#8216;सीएम-युवा&#8217; योजना इसी सोच को धरातल पर उतार रही है। रूपाली देवी का परिवार इस बात की मिसाल है कि सही नीतियां और युवाओं का संकल्प मिलकर उत्तर प्रदेश में स्वरोजगार का एक नया युग रच रहे हैं।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/5-%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%96-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%9c-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%b9%e0%a4%a8%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a4%9c%e0%a5%8d/">5 लाख का कर्ज और मेहनत का जज्बा: अमेठी में &#8216;परमजीत ऑटो गैरेज&#8217; बना मिसाल, सीएम योगी की नीति से संवर रहा भविष्य</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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