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	<title>Kisan andolan Archives | Soochana Sansar</title>
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	<title>Kisan andolan Archives | Soochana Sansar</title>
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		<title>अखिलेश यादव का तंज, कहा- किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी &#124; Kisan Andolan Latest Update</title>
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		<pubDate>Sun, 06 Jun 2021 09:42:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने किसान आंदोलन के सहारे एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है. शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करते भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि,भाजपा सरकार ने आज से एक साल पहले काले क़ानूनों की &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने किसान आंदोलन के सहारे एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है. शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करते भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि,भाजपा सरकार ने आज से एक साल पहले काले क़ानूनों की ‘काली बुनियाद’ रखी थी, जिससे आज़ाद भारत का सबसे बड़ा आंदोलन जन्मा.&#8217; किसान आंदोलन देश के हर घर का आंदोलन है. भाजपाई उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हम किसानों के साथ खड़े हैं. किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी। #KisanEktaMorcha #किसान</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.thehindu.com/news/national/other-states/r9yufn/article33073403.ece/ALTERNATES/LANDSCAPE_1200/AKHILESHYADAV" alt="Akhilesh Yadav alleges irregularities in Bihar polls - The Hindu"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि यूपी, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्‍यों के किसान दिल्‍ली बॉर्डर पर केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे हैं. हालांकि केंद्र और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले&nbsp;<a href="https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow-yogi-government-prepared-for-corona-virus-third-wave-in-uttar-pradesh-upns-3611089.html"><strong>सपा नेता अखिलेश यादव</strong>&nbsp;</a>ने कहा कि बहाकर अपना खून-पसीना जो दाने पहुंचाता घर-घर, ‘काला दिवस’ मना रहा है, आज वो देश का ‘हलधर’.भाजपा सरकार के अहंकार के कारण आज देश में किसानों के साथ जो अपमानजनक व्यवहार हो रहा है उससे देश का हर नागरिक आक्रोशित है. हमारे हर निवाले पर किसानों का कर्ज़ है.</p>
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		<title>राकेश टिकैत अपनी बात पर अड़े, जानिए सरकार के साथ बातचीत को लेकर क्या कहा &#124;  Kisan Andolan Latest Update</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 26 May 2021 11:01:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>केंद्र सरकार के तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने को बुधवार को छह माह का समय पूरा हो गया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन की तरफ से धरना स्थलों पर काला झंडा लगाकर विरोध दर्ज कराया गया। यूपी गेट पर किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद रहे। &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/rakesh-tikait-is-adamant-on-what-he-said-know-what-he-said-about-the-talks-with-the-government/">राकेश टिकैत अपनी बात पर अड़े, जानिए सरकार के साथ बातचीत को लेकर क्या कहा |  Kisan Andolan Latest Update</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">केंद्र सरकार के तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे धरने को बुधवार को छह माह का समय पूरा हो गया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन की तरफ से धरना स्थलों पर काला झंडा लगाकर विरोध दर्ज कराया गया। यूपी गेट पर किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत भी मौजूद रहे। इस मौके पर उन्होंने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। कहा कि जब तक सरकार कानून वापस नहीं लेगी किसान धरना खत्म करके वापस नहीं जाएंगे। इससे पहले सरकार के साथ जो भी बातचीत हुई थी, यदि सरकार फिर से बातचीत करना चाहती है तो बातचीत वहीं से शुरू होगी जहां पर पहले खत्म हुई थी। नए सिरे से नई रूपरेखा के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। किसान इसके लिए नहीं मानेंगे।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/indiatoday/images/story/202102/rakesh_tikait_PTI_1200x768.jpeg?iiUqaDIIB7zkN0ktz2rd5.YBc6.KHG8x&amp;size=1200:675" alt="Empty statements will not benefit farmers, says Rakesh Tikait on PM's 'MSP  will stay' promise - India News"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि जब आंदोलन शुरू हुआ तो सरकार ने कुछ दौर में बातचीत की थी, अब यदि वो फिर से बातचीत करना चाहती है तो बात वहीं से शुरू होगी जहां से खत्म हुई थी। इससे पहले कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने आंदोलन स्थल पर शामिल प्रदर्शनकारियों की कम संख्या को देखते हुए कहा कि यह आंदोलन 2024 तक भाजपा सरकार के रहने तक भी चल सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार किसी पार्टी की होती तो शायद मांगों को मान लिया जाता। हमें इस आंदोलन की तैयारी वैसे ही करनी होगी जैसे तीन साल के लिए फसल की करते हैं। गांव में बैठे हुए लोग आएंगे नहीं तो आंदोलन कैसे चल पाएगा। खेत में जाए बिना फसल कैसे तैयार होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उन्होंने कहा कि जैसे खेत की रखवाली करते हैं वैसे ही आंदोलन की करनी होगी। खुद ही झोपड़ी बनानी होगी। गांव से साधन लाने पड़ेंगे। आंधी-बारिश और गर्मी से निपटने के लिए पक्के टेंट की व्यवस्था करनी होगी। रस्सी, बांस, तख्त, चारपाई और ट्रालियां सब मजबूत चाहिए। उन्होंने कहा कि गांव से लेकर दिल्ली तक संघर्ष तेज करना होगा, आंदोलन की भाषा सीखनी होगी। तारीख वह भी 26 ही थी, जब किसानों ने दिल्ली तक चार लाख ट्रैक्टर पहुंचा दिए थे। यह तारीख हर महीने आती है और ट्रैक्टर भी हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अब 27 को फहराएंगे सफेद झंडा</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">कृषि कानून विरोधियों ने 26 मई को यूपी गेट पर काले झंड़े लहराए और यहां परिक्रमा की, सरकार के विरोध में नारेबाजी भी की। अब किसान संगठन 27 मई को धरना स्थल पर सफेद झंडा लहराएंगे। उन्होंने आह्वान किया है कि किसान सफेद झंड़ा लगाकर शांति का संदेश दें। बताएं कि हम शांतिपूर्ण आंदोलन के साथ ही वार्ता चाहते हैं। लेकिन नए कृषि कानूनों को वापस लेने तक आंदोलन जारी रहेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरकार उन्हें कोरोना का सुपर स्प्रेडर कह रही है जबकि वो कोरोना के नियमों का पालन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की हितैषी नहीं है इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा। उनके नेतृत्व में यूपी गेट पर कृषि कानून विरोधियों ने सरकार का पुतला फूंका और काले झंड़े लेकर धरना स्थल पर नारेबाजी करते हुए परिक्रमा भी की।</p>
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		<title>गांव में कोरोना संक्रमण के विस्तार का कारण बन रहे हैं आंदोलनकारी किसान &#124; Kisan Andolan Latest News Update</title>
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		<pubDate>Wed, 12 May 2021 08:16:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>हरियाणा में करीब 60 लाख परिवार रहते हैं। इनमें से 40 लाख परिवार गांवों में रहते हैं। पिछले साल जब महामारी का असर सामने आया था, तब शहरों में बसने वाले काफी लोगों ने अपनी जान-पहचान के लोगों के यहां गांवों में जाकर शुद्ध आबोहवा का फायदा उठाया था। ऐसे तमाम लोग जो किसी रोजगार, &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">हरियाणा में करीब 60 लाख परिवार रहते हैं। इनमें से 40 लाख परिवार गांवों में रहते हैं। पिछले साल जब महामारी का असर सामने आया था, तब शहरों में बसने वाले काफी लोगों ने अपनी जान-पहचान के लोगों के यहां गांवों में जाकर शुद्ध आबोहवा का फायदा उठाया था। ऐसे तमाम लोग जो किसी रोजगार, नौकरी या कामधंधे की वजह से शहरों में आकर बस गए थे, वे भी अपने गांव लौट गए थे। सोच यही थी कि कोरोना का असर शहरों में ज्यादा है और गांव इससे बचे हुए हैं। लिहाजा वहां अच्छा खानपान मिलेगा, शुद्ध हवा-पानी का इंतजाम होगा और हर तरह के प्रदूषण तथा बीमारियों से भी बचे रहेंगे। </p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://static.toiimg.com/photo/imgsize-100899,msid-79492755/79492755.jpg" alt="Farmers protest in Delhi: Experts worry about Covid, farmers say new laws  bigger threat to their survival | India News - Times of India"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि आखिर गांवों में फैले इस कोरोना की बड़ी वजह क्या है। राजनीतिक लोग इसे सरकार की लापरवाही बता रहे हैं। प्रभावित ग्रामीण सामान्य बुखार और टायफाइड कहकर कोरोना की चपेट में आने की सच्चाई स्वीकार करने को राजी नहीं हैं। सरकार का सर्वे कहता है कि टीकरी व सिंघु बार्डर पर लंबे समय से चल रहे धरने हरियाणा-पंजाब-दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में इस महामारी के फैलने का बड़ा कारण बने हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">टीकरी और सिंघु बार्डर वह इलाके हैं, जहां पंजाब के लोग हरियाणा के विभिन्न जिलों से होते हुए लगातार यहां धरना देने के लिए पहुंचते रहे हैं। हरियाणा के कम से एक एक दर्जन जिलों के लोगों की भी इन धरना स्थलों पर निरंतर आवाजाही रही है। इनमें रोहतक, भिवानी, करनाल, हिसार, झज्जर, पानीपत, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी जिले शामिल हैं।आश्चर्यजनक सत्य यह है कि इन जिलों के ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक कोरोना पीड़ित लोग मिल रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> हिसार के सिसाय गांव और मैयड टोल प्लाजा से सटे इलाकों के लोगों की आंदोलन में सक्रिय भागीदारी किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश सरकार ने इन आंदोलनकारियों से बार-बार आग्रह किया कि उनकी सेहत पहले है, आंदोलन तो बाद में भी किया जा सकता है, लेकिन सरकार की हर अपील को नजरअंदाज करते हुए न केवल ग्रामीण कोरोना का टेस्ट कराने से बचते रहे, बल्कि खुद को मौत के मुंह में धकेलने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। प्रदेश सरकार यदि जिद पर नहीं अड़ती और गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भेजकर पीड़ितों का इलाज शुरू न कराती तो राज्य में भयंकर हालात पैदा हो सकते थे। ग्रामीणों की जिद ने पूरे क्षेत्र को मौत के मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है। इसके लिए जितने जिम्मेदार किसान संगठनों के नेता हैं, उससे कहीं अधिक जवाबदेही हरियाणा व पंजाब के लोगों की भी बनती है।</p>
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		<title>कोरोना पाबंदियों का विरोध कर किसान संगठन की ट्रैक्टर परेड जैसी गलती &#124; Breaking news</title>
		<link>https://soochanasansar.in/farmers-organizations-mistake-like-tractor-parade-protesting-corona-restrictions-may-not-fall-somewhere-heavy/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 11 May 2021 13:04:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>देशभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच बीते शनिवार पंजाब में जहां मौतों का आंकड़ा 10 हजार की संख्या पार कर गया, वहीं इसी दिन हठर्धिमता का भौंडा प्रदर्शन करते हुए राज्य के 32 किसान संगठनों के नेताओं ने राज्य भर में कोविड प्रोटोकॉल की जम कर धज्जियां उड़ाईं। राज्य सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन, &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/farmers-organizations-mistake-like-tractor-parade-protesting-corona-restrictions-may-not-fall-somewhere-heavy/">कोरोना पाबंदियों का विरोध कर किसान संगठन की ट्रैक्टर परेड जैसी गलती | Breaking news</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">देशभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच बीते शनिवार पंजाब में जहां मौतों का आंकड़ा 10 हजार की संख्या पार कर गया, वहीं इसी दिन हठर्धिमता का भौंडा प्रदर्शन करते हुए राज्य के 32 किसान संगठनों के नेताओं ने राज्य भर में कोविड प्रोटोकॉल की जम कर धज्जियां उड़ाईं। राज्य सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन, कर्फ्यू व अन्य पाबंदियों के विरोध में उतरे इन किसान संगठन के नेताओं ने राज्य भर में न सिर्फ दुकानदारों पर दबाव बनाया कि वे सरकारी आदेशों को अनदेखा कर अपनी दुकानें खोलें, बल्कि कई जिलों में निकाले गए किसान मार्च के दौरान कोरोना वैक्सीन को ‘मोदी की वैक्सीन’ बताते हुए गांवों में टीकाकरण अभियान का बहिष्कार करने के लिए सरेआम उकसाया भी। </p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://static.toiimg.com/thumb/msid-79492748,width-1200,height-900,resizemode-4/.jpg" alt="Farmers protest in Delhi: Experts worry about Covid, farmers say new laws  bigger threat to their survival | India News - Times of India" width="709" height="532"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह यह कहते हुए कि मात्र 32 किसान यूनियनों का मोर्चा इस संकट काल में सरकार या राज्य की जनता पर मनमानी से अपनी राय नहीं थोप सकता, पुलिस और प्रशासन को इस तरह के उल्लंघन को सख्ती से निपटने के आदेश तो जारी करते हैं, लेकिन धरातल पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। जहां राजनीतिक दल भी इस मसले पर चुप्पी साधे हैं वहीं मीडिया या न्यायपालिका भी किसान नेताओं को यह समझाने की जहमत नहीं उठा रहा कि हक की लड़ाई अपनी जगह है और हठर्धिमता को आधार बना आमजन की सेहत से खिलवाड़ अपनी जगह। शायद इसकी यही वजह है कि जब कोई इनके खिलाफ टिप्पणी करता है तो आंदोलन के पक्ष में खड़ा तबका एक स्वर में मानो बशीर बद्र के यह बोल दोहरा देता है </p>



<p class="wp-block-paragraph"> अपने इस बेतुके आह्वान के पक्ष में इन किसान नेताओं का तर्क है कि सरकार कोरोना की आड़ में किसान संगठनों की आवाज दबाना चाहती है। ऐसे में कृषि कानूनों के विरोध में दोबारा एकजुट होने से पहले कोरोना पाबंदियों संबंधी सरकारी आदेशों का उल्लंघन बेहद जरूरी है। अब यह हठर्धिमता और अंधविरोध की पराकाष्ठा ही है कि इसी फरमान से बंधे भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के बरनाला यूनिट के पदाधिकारी गांव-गांव ‘दोबारा दिल्ली चलो’ का आह्वान करते हुए जहां यह कहते फिर रहे हैं कि ‘हमें चीनी वायरस से नहीं मोदी की वैक्सीन से डर लगता है’, वहीं गुरनाम सिंह चढूनी सरीखे नेता लुधियाना आकर सलाह देते हैं कि अगर कोरोना से किसी भी किसान की मौत हो जाती है तो उसकी मृत देह को श्मशान घाट ले जाने से पहले उस इलाके के भाजपा नेताओं के घर लेकर जाएं। खैर, सुकून की बात यह है कि पिछले तीन दिनों में जिस कदर राज्य में किसान परिवारों समेत सूबे के तमाम लोगों ने कृषि संगठनों के ऐसे आह्वानों को सिरे से नकार दिया है उससे स्पष्ट है कि आने वाले समय में संयुक्त किसान मोर्चा का यह ‘फरमान’ भी एक बड़ी गलती साबित होगा।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://thediplomat.com/wp-content/uploads/2021/01/sizes/td-story-s-2/thediplomat-2021-01-19-14.jpg" alt="India's Protesting Farmers Aren't Going Anywhere – The Diplomat"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">तो क्या ऐसे फरमानों से आंदोलन सफल होगा या विफल? हमेशा की तरह एक बार तो किसी भी किसान नेता को यह सीधा सवाल पेचीदा लगेगा, लेकिन सच्चाई यही है कि पिछले 160 दिनों में ऐसे अनेक अर्तािकक फैसलों पर बोलने वाले संयुक्त किसान मोर्चा के तमाम नेता या तो स्वयं ही सवालों के घेरे में आ गए या उनका हर जवाब दस नए सवाल खड़े करता चला गया। अब यह सवाल चाहे केंद्र सरकार से चल रही वार्ता को केवल ‘हां या ना’ तक सीमित करने के निर्णय से जुड़े हों या फिर टीकरी बॉर्डर पर धरने पर बैठी बंगाल की एक महिला के कथित दुष्कर्म और कोरोना संक्रमण से हुई मौत के घटनाक्रम को लेकर। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण ही है कि महामारी के दिन प्रतिदिन बढ़ते प्रकोप से जानबूझ कर अनभिज्ञता जताते ये किसान संगठन जहां एक तरह कह रहे हैं कि वे सरकार से दोबारा बातचीत के लिए तैयार हैं और आशावादी हैं वहीं पंजाब के गांवों से लेकर टीकरी और सिंघु बॉर्डर तक प्रशासन का सहयोग करने से साफ गुरेज कर रहे हैं। बिना मास्क और शारीरिक दूरी के नियमों को ताक पर रखते हुए भारी भीड़ का जमावड़ा कर रोज रोष सभाएं आयोजित की जा रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">किसान संगठनों की यह चिंता कितनी वाजिब है इस बात पर तो विवाद हो सकता है, लेकिन इस चिंता के निवारण के लिए अपनाए जा रहे इस तरह के हथकंडों के पक्ष में शायद देशभर में एक व्यक्ति भी न हो। शायद वह दुकानदार भी नहीं जिनकी भलाई का हवाला देकर किसान नेता जबरदस्ती दुकानें खोलने का लगातार दबाव बना रहे हैं। पंजाब के तो अधिकतर दुकानदारों और व्यापार मंडलों ने उसी दिन किसान नेताओं को दो टूक शब्दों में कह दिया कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में वह पूरी तरह से प्रशासन के साथ हैं। गत बुधवार कुंडली बॉर्डर पर हुई किसान संगठनों की बैठक में हुए इस अर्तािकक फैसले के पीछे के कारण कुछ भी रहे हों, लेकिन इतना स्पष्ट है कि लगभग छह महीने से किसान आंदोलन की अगुआई कर रहे किसान नेताओं ने पिछले घटनाक्रम से कोई सबक नहीं लिया है।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/farmers-organizations-mistake-like-tractor-parade-protesting-corona-restrictions-may-not-fall-somewhere-heavy/">कोरोना पाबंदियों का विरोध कर किसान संगठन की ट्रैक्टर परेड जैसी गलती | Breaking news</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>अन्ना हजारे ने किसानों की मांग पूरी ना होने पर ‘अंतिम प्रदर्शन’ की चेतावनी दी</title>
		<link>https://soochanasansar.in/anna-hazare-kisan-andolan-latest-news-anna-hazare-warns-of-final-demonstration-if-farmers-demand-is-not-met/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 28 Dec 2020 09:40:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>पुणे (महाराष्ट्र). सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) ने उनकी किसानों के संबंध में की गई मांगों (Farmer Protest) के केन्द्र द्वारा जनवरी अंत तक स्वीकार ना किए जाने पर भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है. महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में अन्ना हजारे ने कहा कि वह किसानों के लिए पिछले &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/anna-hazare-kisan-andolan-latest-news-anna-hazare-warns-of-final-demonstration-if-farmers-demand-is-not-met/">अन्ना हजारे ने किसानों की मांग पूरी ना होने पर ‘अंतिम प्रदर्शन’ की चेतावनी दी</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/2020/12/anna-hazare-2-1.jpg" alt="" class="wp-image-5729" width="557" height="371" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/2020/12/anna-hazare-2-1.jpg 459w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/2020/12/anna-hazare-2-1-300x200.jpg 300w" sizes="auto, (max-width: 557px) 100vw, 557px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पुणे (महाराष्ट्र).</strong> सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे (Anna Hazare) ने उनकी किसानों के संबंध में की गई </p>



<p class="wp-block-paragraph">मांगों (Farmer Protest) के केन्द्र द्वारा जनवरी अंत तक स्वीकार ना किए जाने पर भूख हड़ताल करने की चेतावनी दी है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"> महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के रालेगण सिद्धि गांव में अन्ना हजारे ने कहा कि वह किसानों के लिए पिछले तीन साल से प्रदर्शन कर रहे हैं </p>



<p class="wp-block-paragraph">लेकिन सरकार ने इन मुद्दों के समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया.</p>



<p class="wp-block-paragraph">हजारे (83) ने कहा, &#8216;सरकार केवल खोखले वादे करती है, इसलिए मुझे उस पर अब कोई विश्वास नहीं है. देखते हैं सरकार मेरी मांगों पर क्या कदम उठाती है.</p>



<p class="wp-block-paragraph"> उन्होंने एक महीने का समय मांगा है और मैंने उन्हें जनवरी अंत तक का समय दिया है. अगर मेरी मांगे पूरी नहीं हुई,</p>



<p class="wp-block-paragraph"> मैं फिर भूख हड़ताल करूंगा. यह मेरा आखिरी प्रदर्शन होगा.&#8217;</p>



<p class="wp-block-paragraph">अन्ना हजारे ने 14 दिसम्बर को केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी</p>



<p class="wp-block-paragraph"> कि एम. एस. स्वामीनाथन समिति की अनुशंसाओं को लागू करने और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) को स्वायत्तता प्रदान करने संबंधी</p>



<p class="wp-block-paragraph"> उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह भूख हड़ताल करेंगे.</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं महाराष्ट्र विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष हरिभाऊ बागाडे ने हाल ही में हजारे से मुलाकात भी की थी </p>



<p class="wp-block-paragraph">और उन्हें केन्द्र द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के बारे में अवगत कराया था. हजारे ने केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए</p>



<p class="wp-block-paragraph"> तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर आठ दिसम्बर को किसान संगठनों के भारत बंद के समर्थन में उपवास रखा था.</p>
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