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	<title>Latest update of farmers strike Archives | Soochana Sansar</title>
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	<title>Latest update of farmers strike Archives | Soochana Sansar</title>
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		<title>किसान को लात मारे जाने पर घिरी गहलोत सरकार, एसडीएम का तबादला &#124; Rajasthan Latest News</title>
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		<pubDate>Sat, 17 Jul 2021 14:43:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p> जालोर के सांचौर क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव में किसानों के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान एसडीएम के लात मारने का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। आनन-फानन में हालांकि सरकार में एसडीएम भूपेंद्र यादव का तबादला जोधपुर जेडीए में कर दिया है, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान एसडीएम कार्यालय सांचौर &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"> जालोर के सांचौर क्षेत्र के प्रतापपुरा गांव में किसानों के मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान एसडीएम के लात मारने का मामला अब राजनीतिक रंग लेने लगा है। आनन-फानन में हालांकि सरकार में एसडीएम भूपेंद्र यादव का तबादला जोधपुर जेडीए में कर दिया है, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान एसडीएम कार्यालय सांचौर के बाहर धरने पर बैठे हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इधर, प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी इस प्रकरण पर सरकार पर निशाना साधा है। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा कि मुआवजे की मांग कर रहे अन्नदाताओं को उपखंड स्तर पर एक बाबू लात मार रहा है। यह हक एसडीएम को किसने दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व सीएमओ को मामले में संज्ञान लेकर एसडीएम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। जालोर-सिरोही सांसद देवजी एम पटेल ने मामले पर सोशल मीडिया पोस्ट कर गहलोत सरकार पर निशाना साधा है।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://i.dawn.com/primary/2021/01/601100c3bbb4c.jpg" alt="India&#39;s farmers back at protest camp after deep challenge to PM Modi -  World - DAWN.COM"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"> उन्होंने घटना की निंदा की और पूछा कि एसडीएम को किसान को लात मारने का हक किसने दिया। हालांकि घटना के बाद सरकार ने एसडीएम को सांचोर से हटा दिया है, लेकिन शनिवार को किसानों का अपनी शेष मांगों को लेकर धरना जारी है। किसानों ने अवाप्त भूमि की उन्हें डीएलसी दर से 20 गुणा अधिक दर से रेट देने के साथ ही किसान परिवार पर दर्ज किया गया मामला वापस लेने की मांग है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वही, राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार अब विपक्ष के निशाने पर है। जहां केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और आरएलपी के सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्वीट कर सरकार पर तंज कसा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री शेखावत ने तंज कसते हुए ट्वीट किया कि राजस्थान में कांग्रेसी प्रशासन का किसान को लात मारना हो या उत्तर प्रदेश की कांग्रेसी रैली में बेरोजगार युवाओं की पिटाई, कांग्रेस कहीं भी हो, जनता से दुर्व्यवहार की आदत इनके डीएनए में है। केंद्रीय कृषि व किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने भी ट्वीट कर घटना की निंदा की। उन्होंने लिखा कि किसान हितैषी बनने की नौटंकी करने वाले कांग्रेस सरकार के बयानवीर इस घटनाक्रम पर क्या बयान देंगे?</p>
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		<title>गुणी प्रकाश के चैलेंज को स्वीकार करना चढ़ूनी ही नहीं, आंदोलन के हर नेता के लिए मुश्किल &#124; Farmers Protest Leader</title>
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		<pubDate>Tue, 29 Jun 2021 11:38:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>भारतीय किसान यूनियन (मान) के नेता गुणी प्रकाश ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) को सप्ताह भर पहले यह चैलेंज कर चुके हैं कि गुरनाम चढ़ूनी-भिंडरावाला मुर्दाबाद। खालिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाकर दिखाएं। लेकिन चढ़ूनी उसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। उनका मौन यह बताता है कि वह ये नारे नहीं लगा सकते। वह कहते &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">भारतीय किसान यूनियन (मान) के नेता गुणी प्रकाश ने भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी) को सप्ताह भर पहले यह चैलेंज कर चुके हैं कि गुरनाम चढ़ूनी-भिंडरावाला मुर्दाबाद। खालिस्तान मुर्दाबाद का नारा लगाकर दिखाएं। लेकिन चढ़ूनी उसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं। उनका मौन यह बताता है कि वह ये नारे नहीं लगा सकते। वह कहते हैं न, मौनं स्वीकार लक्षणं। वैसे चढ़ूनी तो क्या कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन में शामिल किसी भी नेता के लिए यह नारा लगाना नामुमिकन तो नहीं, लेकिन मुश्किल जरूर है, क्योंकि आंदोलन में शामिल हर नेता को यह भली भांति पता है कि खालिस्तान समर्थक आंदोलन में बड़ी संख्या में शामिल हैं। यही कारण है कि कई नेताओं ने आंदोलन से दूरी बना ली है। </p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://thedailyguardian.com/wp-content/uploads/2020/11/farmer-protests-in-India.png" alt="FARMERS' ISSUES SHOULD BE ADDRESSED BEFORE IT IS TOO LATE - The Daily  Guardian" width="765" height="430"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">कुछ ने घोषित रूप से तो कुछ ने अघोषित रूप से। जैसे भारतीय राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वीरेंद्र मोहन सिंह (वीएम सिंह)। अघोषित रूप से आंदोलन से दूर रह रहे नेताओं में सबसे बड़ा नाम शिवकुमार शर्मा उर्फ कक्का का। यद्यपि वह पारिवारिक कारणों का हवाला देते हैं, लेकिन वास्तविकता यही है कि अब आंदोलन में शामिल अराजक तत्त्वों की गतिविधियों से उनका मन खट्टा हो चुका है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">रही बात इस समय आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरे राकेश टिकैत की तो वह खुद ही राष्ट्रविरोधी तत्त्वों से नफरत करते हैं। यही कारण है कि वह अन्य नेताओं से अलग हटकर चल रहे हैं। वह किसान आंदोलन को तो चरम परिणिति पर तो पहुंचाना चाहते हैं, लेकिन देश विरोधी और अराजक तत्त्वों की आंदोलन में भागीदारी भी उन्हें स्वीकार नहीं है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">इसीलिए उन्होंने छब्बीस जून को संयुक्त किसान मोर्चे के राजभवनों के घेराव से खुद को दूर रखा। जब टिकैत नहीं गए तो उनके समर्थकों के जाने का प्रश्न ही नहीं था। इसीलिए चढ़ूनी और योगेंद्र यादव के नेतृत्व में पंचकूला में महज कुछ सौ लोग पहुंचे। यदि टिकैत उसमें शामिल होते तो संख्या इतनी होती कि भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता। चंडीगढ़ जहां हरियाणा का राजभवन है, वहां हरियाणा से लोग नहीं पहुंचे तो केवल इसीलिए कि हरियाणा के जो लोग आंदोलन में शामिल हैं, वे अपना नेता राकेश टिकैत को मानते हैं और राकेश टिकैत की तरह वे भी आंदोलन के तो पुरजोर समर्थन में हैं, लेकिन आंदोलन में शामिल राष्ट्रविरोधी तत्व उन्हें भी नागवार गुजरते हैं। अब ऐसे में गुरनाम चढ़ूनी और योगेंद्र यादव भले ही हरियाणा के हैं लेकिन हरियाणा के आंदोलनकारी उन्हें अपना नेता मानने से परहेज करते हैं और यदि गुणीप्रकाश का चैलेंज स्वीकार कर चढ़ूनी खालिस्तान मुर्दाबाद, भिंडरावाला मुर्दाबाद का नारा लगा दें तो उनकी बची खुची साख भी नहीं रहेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">विदेश में बैठे खालिस्तान समर्थकों से कुछ आंदोलनकारी नेताओं को अच्छी खासी रकम भी मिलती है। इसके बावजूद वे मौन रहते हैं। क्यों? इसके दो प्रमुख कारण हैं, एक तो खालिस्तान समर्थकों सहित राष्ट्रविरोधी तत्वों की आंदोलन में बड़ी संख्या में भागीदारी है। उनके संख्या बल पर ही आंदोलन के नेता स्वयं को नेता के रूप में पेश करते हैं। यदि आंदोलन में संख्या ही नहीं रहेगी तो वे नेता भी नहीं माने जाएंगे। फिर सरकार तो क्या कोई भी उन्हें नहीं पूछेगा। दूसरा कारण यह है कि वे आंदोलन में शामिल राष्ट्रविरोधी अराजक तत्वों से खुद भयाक्रांत हैं और इसीलिए उनका विरोध तो दूर वक्त-जरूरत उनके अपकृत्यों पर पर्दा डालने का प्रयास करते हैं।</p>
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		<title>राकेश टिकैत ने खुद को हरियाणा का बता छेड़ा नया शिगूफा, कहीं हरियाणा की राजनीति में एंट्री की तो नहीं तैयारी &#124; BKU Leader</title>
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		<pubDate>Sat, 26 Jun 2021 14:08:32 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>राकेश टिकैत ने झज्जर में यह दावा कर कि वह हरियाणा के हैं, एक नया शिगूफा छेड़ दिया है। उनका कहना है कि हरियाणा में जो लोग उन्हें (राकेश टिकैत को) बाहरी बता रहे हैं, वे जान लें-मैं सोनीपत के मझाना गांव का हूं। अब उन्होंने मझाना कहा था या मल्हाना, लेकिन सोनीपत मे मझाना &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/rakesh-tikait-introduced-himself-as-haryanas-new-shigufa-if-he-entered-the-politics-of-haryana-or-not-prepared/">राकेश टिकैत ने खुद को हरियाणा का बता छेड़ा नया शिगूफा, कहीं हरियाणा की राजनीति में एंट्री की तो नहीं तैयारी | BKU Leader</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">राकेश टिकैत ने झज्जर में यह दावा कर कि वह हरियाणा के हैं, एक नया शिगूफा छेड़ दिया है। उनका कहना है कि हरियाणा में जो लोग उन्हें (राकेश टिकैत को) बाहरी बता रहे हैं, वे जान लें-मैं सोनीपत के मझाना गांव का हूं। अब उन्होंने मझाना कहा था या मल्हाना, लेकिन सोनीपत मे मझाना नाम का कोई गांव शायद नहीं है। मल्हाना गांव जरूर है, जहां जाट समुदाय के बालियान गोत्र के लोग रहते हैं। संभव है कि राकेश टिकैत इसी गांव की बात कर रहे हों, क्योंकि वह भी बालियान गोत्र के हैं। लेकिन यह तो तय है कि वह इस गांव के निवासी नहीं हैं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimages/Rakesh_Tikait_pic(1).jpg" alt=""/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत के बाद चौधर उनके बड़े पुत्र नरेश टिकैत को मिली जो राकेश टिकैत के बड़े भाई हैं। आठ महीने पहले नवंबर में कृषि सुधार कानून विरोधी आंदोलन शुरू हुआ तो टिकैत बंधु शामिल तो हुए लेकिन आंदोलन का नेतृत्व उनके बहुत महत्व नहीं देता था। आंदोलन में शामिल चालीस के लगभग संगठनों ने जब मिलकर संयुक्त किसान मोर्चे की कोर कमेटी बनाई तो दोनों भाइयों में से एक को भी स्थान नहीं मिला। अब भी संयुक्त किसान मोर्चे की तरफ से जो प्रेसनोट जारी होते हैं, उनमें नरेश अथवा राकेश टिकैत का नाम नहीं होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह बात अलग है कि आज हरियाणा में आंदोलन का प्रमुख चेहरा राकेश टिकैत बन चुके हैं। दिल्ली में छब्बीस जनवरी प्रकरण के दो दिन बाद उप्र-दिल्ली के गाजीपुर बार्डर राकेश टिकैत ने उप्र के लोनी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर पर रोते हुए धमकाने का आरोप लगाया तो वह रोकर हीरो बन गए, क्योंकि उनके आंसुओं से हरियाणा में उनके स्वजातीय समुदाय में जबरदस्त आक्रोश पनप गया और राकेश टिकैत को प्रबल समर्थन मिल गया। आंदोलन के अन्य नेता नेपथ्य में चले गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संभव है कि उत्तर प्रदेश में दो चुनाव लड़कर जमानत जब्त करा चुके राकेश टिकैत हरियाणा से विधानसभा या लोकसभा में पहुंचने की सोच रहे हों। इसके लिए सोनीपत मुफीद हो सकता है। जाट बहुल मतदाता वाला क्षेत्र है। वहां उनके गोत्र के लोग भी हैं। लेकिन यदि वह चुनावी राजनीति में प्रवेश करते हैं तो एक बड़ा प्रश्न यह उभरेगा कि वह इसके लिए किस दल का सहारा लेंगे। प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी की सरकार का तो वह विरोध ही कर रहे हैं। कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) में से ही किसी एक को उन्हें चुनना होगा। ऐसी स्थिति में वह इनेलो को ही चुनेंगे। उनके पिता स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत और इनेलो सुप्रीम चौधरी ओमप्रकाश चौटाला के बीच आत्मीय रिश्ते रहे हैं। पारिवारिक संबंध हैं। कुछ दिन पहले टिकैत सिरसा जिले में स्थित चौटाला परिवार के फार्म हाउस पर जाकर चौधरी ओमप्रकाश चौटाला से आशीष भी ले चुके हैं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimages/Rakesh_Tikait_pics(1).jpg" alt=""/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">गुरनाम चढ़ूनी जो आंदोलन में हरियाणा के एकमात्र चेहरा थे, उन्होंने राकेश टिकैत पर आक्षेप भी लगाए तो उनका इतना प्रबल विरोध हुआ कि वह बैकफुट पर चले गए और राकेश टिकैत हरियाणा में आंदोलन का सर्वमान्य चेहरा हैं। उनकी सभाओं में जिसे वह महापंचायत कहते हैं जबरदस्त भीड़ उमड़ती है। यह बात अलग है कि भीड़ में शामिल लोग उनके स्वजातीय ही होते हैं। लेकिन इससे क्या? यह उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को बल तो मिलता ही है।बता दें कि कभी स्वर्गीय महेंद्र सिंह टिकैत चौधरी ओमप्रकाश के चौटाला के मुख्यमंत्री काल में जींद के कंडेला में हुए किसान आंदोलन में चौटाला के अनुरोध पर किसानों को समझाने पहुंचे थे। वहां किसानों ने उन्हें अपमानित भी किया था। यद्यपि उस घटना को बहुत दिन बीत चुके हैं और आंदोलन का चेहरा बनने के बाद राकेश टिकैत की पहली महापंचायत कंडेला में ही हुई थी। उसके बाद वह हरियाणा में दर्जनों महापंचायतें कर चुके हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">संभव है कि यहां से कभी उनके पूर्वज मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव गए हों, वैसे अभी यह भी पुष्ट नहीं है कि उनके पूर्वज सोनीपत के मल्हाना गांव से सिसौली लेकिन गए थे, लेकिन गए भी होंगे तो कई पीढ़ियों पहले। गौरतलब है कि राकेश टिकैत के प्रपितामह बालियान खाप के चौधरी थे। चौधरी का टीका होता था, इसलिए उन्हें टिकैत की उपाधि मिलती थी। उनके निधन के समय उनके पुत्र यानी राकेश टिकैत के पितामह की उम्र पंद्रह-सोलह वर्ष की रही होगी। बालियान खाप के गण्यमान्य लोगों ने पहले तो नया चौधरी चुनने के लिए विचार किया, लेकिन बाद में सर्वसम्मति से तय हुआ कि उनके बेटे को ही चौधरी बना दिया जाए। उनके बाद चौधर उनके बेटे महेंद्र सिंह टिकैत को मिली, जो दिल्ली के वोट क्लब मैदान में लाखों किसानों की भीड़ एकत्र कर देशभर में चर्चित किसान नेता के रूप में उभरे।</p>
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		<title>अखिलेश यादव का तंज, कहा- किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी &#124; Kisan Andolan Latest Update</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 06 Jun 2021 09:42:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने किसान आंदोलन के सहारे एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है. शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करते भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि,भाजपा सरकार ने आज से एक साल पहले काले क़ानूनों की &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/akhilesh-yadavs-taunt-said-farmer-unity-will-disfigure-bjps-arrogance/">अखिलेश यादव का तंज, कहा- किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी | Kisan Andolan Latest Update</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">समाजवादी पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने किसान आंदोलन के सहारे एक बार फिर भाजपा सरकार पर हमला बोला है. शनिवार को अखिलेश यादव ने ट्वीट करते भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तंज कसते हुए कहा कि,भाजपा सरकार ने आज से एक साल पहले काले क़ानूनों की ‘काली बुनियाद’ रखी थी, जिससे आज़ाद भारत का सबसे बड़ा आंदोलन जन्मा.&#8217; किसान आंदोलन देश के हर घर का आंदोलन है. भाजपाई उत्पीड़न के ख़िलाफ़ हम किसानों के साथ खड़े हैं. किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी। #KisanEktaMorcha #किसान</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.thehindu.com/news/national/other-states/r9yufn/article33073403.ece/ALTERNATES/LANDSCAPE_1200/AKHILESHYADAV" alt="Akhilesh Yadav alleges irregularities in Bihar polls - The Hindu"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बता दें कि यूपी, हरियाणा और पंजाब समेत कई राज्‍यों के किसान दिल्‍ली बॉर्डर पर केंद्र सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले एक साल से आंदोलन कर रहे हैं. हालांकि केंद्र और किसानों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है.</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले&nbsp;<a href="https://hindi.news18.com/news/uttar-pradesh/lucknow-yogi-government-prepared-for-corona-virus-third-wave-in-uttar-pradesh-upns-3611089.html"><strong>सपा नेता अखिलेश यादव</strong>&nbsp;</a>ने कहा कि बहाकर अपना खून-पसीना जो दाने पहुंचाता घर-घर, ‘काला दिवस’ मना रहा है, आज वो देश का ‘हलधर’.भाजपा सरकार के अहंकार के कारण आज देश में किसानों के साथ जो अपमानजनक व्यवहार हो रहा है उससे देश का हर नागरिक आक्रोशित है. हमारे हर निवाले पर किसानों का कर्ज़ है.</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/akhilesh-yadavs-taunt-said-farmer-unity-will-disfigure-bjps-arrogance/">अखिलेश यादव का तंज, कहा- किसान एकता भाजपा के दंभ को बदरंग कर देगी | Kisan Andolan Latest Update</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>गांव में कोरोना संक्रमण के विस्तार का कारण बन रहे हैं आंदोलनकारी किसान &#124; Kisan Andolan Latest News Update</title>
		<link>https://soochanasansar.in/agitating-farmers-are-causing-the-expansion-of-corona-infection-in-the-village/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 May 2021 08:16:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हरियाणा में करीब 60 लाख परिवार रहते हैं। इनमें से 40 लाख परिवार गांवों में रहते हैं। पिछले साल जब महामारी का असर सामने आया था, तब शहरों में बसने वाले काफी लोगों ने अपनी जान-पहचान के लोगों के यहां गांवों में जाकर शुद्ध आबोहवा का फायदा उठाया था। ऐसे तमाम लोग जो किसी रोजगार, &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">हरियाणा में करीब 60 लाख परिवार रहते हैं। इनमें से 40 लाख परिवार गांवों में रहते हैं। पिछले साल जब महामारी का असर सामने आया था, तब शहरों में बसने वाले काफी लोगों ने अपनी जान-पहचान के लोगों के यहां गांवों में जाकर शुद्ध आबोहवा का फायदा उठाया था। ऐसे तमाम लोग जो किसी रोजगार, नौकरी या कामधंधे की वजह से शहरों में आकर बस गए थे, वे भी अपने गांव लौट गए थे। सोच यही थी कि कोरोना का असर शहरों में ज्यादा है और गांव इससे बचे हुए हैं। लिहाजा वहां अच्छा खानपान मिलेगा, शुद्ध हवा-पानी का इंतजाम होगा और हर तरह के प्रदूषण तथा बीमारियों से भी बचे रहेंगे। </p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://static.toiimg.com/photo/imgsize-100899,msid-79492755/79492755.jpg" alt="Farmers protest in Delhi: Experts worry about Covid, farmers say new laws  bigger threat to their survival | India News - Times of India"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">ऐसे में एक सवाल जरूर खड़ा होता है कि आखिर गांवों में फैले इस कोरोना की बड़ी वजह क्या है। राजनीतिक लोग इसे सरकार की लापरवाही बता रहे हैं। प्रभावित ग्रामीण सामान्य बुखार और टायफाइड कहकर कोरोना की चपेट में आने की सच्चाई स्वीकार करने को राजी नहीं हैं। सरकार का सर्वे कहता है कि टीकरी व सिंघु बार्डर पर लंबे समय से चल रहे धरने हरियाणा-पंजाब-दिल्ली समेत आसपास के राज्यों में इस महामारी के फैलने का बड़ा कारण बने हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">टीकरी और सिंघु बार्डर वह इलाके हैं, जहां पंजाब के लोग हरियाणा के विभिन्न जिलों से होते हुए लगातार यहां धरना देने के लिए पहुंचते रहे हैं। हरियाणा के कम से एक एक दर्जन जिलों के लोगों की भी इन धरना स्थलों पर निरंतर आवाजाही रही है। इनमें रोहतक, भिवानी, करनाल, हिसार, झज्जर, पानीपत, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी जिले शामिल हैं।आश्चर्यजनक सत्य यह है कि इन जिलों के ग्रामीण इलाकों में सबसे अधिक कोरोना पीड़ित लोग मिल रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> हिसार के सिसाय गांव और मैयड टोल प्लाजा से सटे इलाकों के लोगों की आंदोलन में सक्रिय भागीदारी किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश सरकार ने इन आंदोलनकारियों से बार-बार आग्रह किया कि उनकी सेहत पहले है, आंदोलन तो बाद में भी किया जा सकता है, लेकिन सरकार की हर अपील को नजरअंदाज करते हुए न केवल ग्रामीण कोरोना का टेस्ट कराने से बचते रहे, बल्कि खुद को मौत के मुंह में धकेलने का कोई अवसर हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। प्रदेश सरकार यदि जिद पर नहीं अड़ती और गांवों में स्वास्थ्य विभाग की टीमें भेजकर पीड़ितों का इलाज शुरू न कराती तो राज्य में भयंकर हालात पैदा हो सकते थे। ग्रामीणों की जिद ने पूरे क्षेत्र को मौत के मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है। इसके लिए जितने जिम्मेदार किसान संगठनों के नेता हैं, उससे कहीं अधिक जवाबदेही हरियाणा व पंजाब के लोगों की भी बनती है।</p>
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