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	<title>latestnew Archives | Soochana Sansar</title>
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		<title>पंजाब में हुआ बड़ा राजनीति गठजोड़, शिअद और बसपा ने 25 साल बाद मिलाया हाथ &#124; Punjab latest News</title>
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		<pubDate>Sat, 12 Jun 2021 08:06:53 +0000</pubDate>
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<p class="wp-block-paragraph"> पंजाब में 2022 में होनेवाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नए सियासी समीकरण और गठजोड़ बनने शुरू हो गए हैं। अब उत्‍तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती और पंजाब के पूर्व मुख्‍यमंत्री प्रकाश सिंह बादलव पूर्व उपमुख्‍यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की पार्टियां करीब आ गई हैं। शिअद और भाजपा में आज गठबंधन हो गया। शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल और बसपा नेता सतीश मिश्रा ने यहां यह एलान किया। दोनों दल मिल कर पंजाब विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। तीन कृषि कानूनों को लेकर भारतीय जनता पार्टी से गठबंधन टूटने के बाद शिरोमणि अकाली दल (शिअद) का बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से 25 साल बाद साथ आए हैं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/newimg/articleimages/SADAndBSPb.jpg" alt=""/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong><em>चंडीगढ़ में पत्रकार सम्‍मेलन में बसपा नेता का स्‍वागत करते शिअद प्रधान सुखबीर सिंह बादल। (एएनआइ)</em></strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर बसपा नेता और सांसद सतीश मिश्रा ने कहा कि यह पंजाब की सियासत में यह ऐतिहासिक दिन है, जब बसपा और शिअद का गठबंधन हुआ है। अब पंजाब की यह सबसे बड़ी सियासी ताकत हो गई है।  1986 में दोनों प‍ार्टियों ने साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ा था तो राज्‍य की 13 सीटों में से 11 पर जीत दर्ज की थी।बसपा के वरिष्ठ नेता सतीश मिश्रा इस समझौते के लिए शुक्रवार को चंडीगढ़ पहुंचे थे। अकाली दल के प्रधान सुखबीर बादल और उनके बीच लंबी बैठक भी हुई जिसमें सीटों को लेकर बातचीत की गई। बताया जाता है कि सीटों को लेकर सिरे नहीं चढ़ पा रही थी। शिरोमणि अकाली दल राज्‍य में बसपा को 18 सीटें देने को तैयार थी और बसपा की मांग 23 सीटों की थी। इनमें दोआबा क्षेत्र के साथ ही फिरोजपुर की सीटों पर पार्टी की नजर है। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा को दोआबा की कुछ सीटों पर अच्छे वोट मिले थे जिसे लेकर पार्टी उत्साहित है। गौरतलब है कि पहले भाजपा के हिस्से में भी 23 ही सीटें गठबंधन में थीं।बाद में दोनों दलों में सीटों के बारे में समझौता हो गया और बसपा के हिस्‍से में 20 व शिअद के हिस्‍से में 97 सीटें आई हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले 1996 के लोकसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल ने बहुजन समाज पार्टी के साथ गठजोड़ किया था जिसमें बसपा को तीन सीटों होशियारपुर, फिल्लौर और फिरोजपुर में सफलता मिली थी, लेकिन 1997 के विधानसभा चुनाव तक आते आते यह गठबंधन टूट गया है और अकाली दल ने भारतीय जनता पार्टी के साथ नया गठजोड़ बना लिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दिलचस्प बात यह है कि वयोवृद्ध अकाली नेता और एसजीपीसी के तत्कालीन प्रधान गुरचरण सिंह टोहरा अकाली दल और भाजपा के गठजोड़ के खिलाफ थे लेकिन प्रकाश सिंह बादल ने केंद्र में मजबूत साथी की तलाश में टोहरा की सलाह नहीं मानी। टोहरा का यह मानना था कि बसपा के साथ ही हमें समझौता करना चाहिए क्योंकि दलितों के साथ सिखों की धार्मिक और सामाजिक तौर पर पुरानी साझ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>विधानसभा चुनाव में बसपा के हिस्‍से में 20 सीटें और शिअद 97 सीटों पर उतरेगी</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">यहां पत्रकारों से बातचीत में सुखबीर सिंह बादल और सतीश मिश्रा ने गठबंधन के बारे में घोषणा की। सुखबीर ने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव में कुल 117 सीटों में ये 20 पर बसपा चुनाव लड़ेगी और शिअद 97 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">अब जबकि पंजाब में विधानसभा चुनाव को मात्र आठ महीने बचे हैं। ऐसे में नए बन रहे समीकरणों के चलते इस बार चुनाव काफी दिलचस्प होगा और दलित राजनीति के इर्द गिर्द ही घूमेगा। इससे पहले भारतीय जनता पार्टी ने भी पंजाब में दलित चेहरे को मुख्यमंत्री के तौर पर लाने का एलान किया हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इससे पहले कि पार्टी किसी को दलित चेहरे के रूप में आगे करती, उसके अपने पुराने गठजोड़ के साथी शिअद ने 2022 के चुनाव में दलित को उपमुख्यमंत्री बनाने की घोषणा कर दी। उधर, आम आदमी पार्टी ने भी 2018 में दलित वोट को कैश करने के लिए सुखपाल ¨सह खैहरा को हटाकर हरपाल चीमा के रूप में एक दलित नेता को आगे किया और उन्हें विपक्ष का नेता बनाया। कांग्रेस भी पिछले कई दिनों से दलित वोट बैंक को भुनाने का प्रयास कर रही है।</p>
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