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	<title>mamta banje Archives | Soochana Sansar</title>
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	<title>mamta banje Archives | Soochana Sansar</title>
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		<title>हकीकत से अंजान किसान आंदोलन, किसान उन गलतियों से सीखने को तैयार नहीं &#124; Latest News Update</title>
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		<pubDate>Fri, 11 Jun 2021 14:37:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
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<p class="wp-block-paragraph">एक ओर जब कुछ किसान संगठन कृषि कानूनों की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज करा रहे हैं तो दूसरी ओर देश में गेहूं की रिकार्ड सरकारी खरीद हो रही है। अब तक 44.4 लाख किसानों से 76,000 करोड़ रुपये का गेहूं खरीदा जा चुका है। गेहूं खरीद की यह रकम बिना किसी बिचौलियों के सीधे किसानों के खातों में पहुंची है। जहां गेहूं की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर हो रही है, वहीं खुले बाजार में सरसों की कीमतें रिकार्ड बना रही हैं। कई मंडियों में सरसों 8,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिकी है, जबकि सरसों का एमएसपी 4650 रुपये प्रति क्विंटल है। गेहूं और सरसों की खरीद-बिक्री के बनते रिकार्ड को देखें तो कुछेक किसान संगठनों द्वारा तीनों कृषि कानूनों का विरोध बेमानी ही लगता है।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://editorial01.shutterstock.com/wm-preview-1500/10790473e/1cae9c9e/nationwide-protest-against-farm-bills-begins-today-patiala-punjab-india-shutterstock-editorial-10790473e.jpg" alt="Members various farmer organizations protest against Electricity Editorial  Stock Photo - Stock Image | Shutterstock"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>खरीद-बिक्री से जुड़े बिचौलियों की ताकतवर लॉबी:</strong> बदहाली के दुष्चक्र के फंसी खेती-किसानी को उबारने के लिए कृषि विशेषज्ञ लंबे समय से सुझाव दे रहे हैं कि विविधीकृत फसल प्रणाली अपनाई जाए, लेकिन गेहूं-धान केंद्रित फसल चक्र को तोड़ना आसान नहीं था। खेती-किसानी की इन्हीं खामियों को दूर करने और कृषि के आधुनिकीकरण के लिए मोदी सरकार ने तीन नए कृषि कानून बनाया। दुर्भाग्यवश गेहूं-धान की एकफसली खेती करने वाले किसानों और इनकी खरीद-बिक्री से जुड़े बिचौलियों की ताकतवर लॉबी को ये सुधार रास नहीं आ रहे हैं। इन कानूनों के जरिये सरकार सूचना प्रौद्योगिकी आधारित ऐसी व्यवस्था बना रही है, जहां किसान अपनी मर्जी से अपनी फसल कहीं भी बेच सकेंगे। किसानों को उपज की वाजिब कीमत मिलने से न सिर्फ खेती-किसानी फायदे का सौदा बनेगी, बल्कि पढ़े-लिखे लोग भी खेती करेंगे, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर निकलेंगे। इससे शहरों की ओर होने वाले पलायन में भी कमी आएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सरकार की एथनॉल नीति को अभूतपूर्व कामयाबी मिली:</strong> किसान नेता कुछ भी कहें, सरकार का पूरा जोर कृषि के विविधीकरण पर है। इससे न सिर्फ फसल चक्र का पालन होगा, बल्कि गेहूं-धान की एकफसली खेती से भी मुक्ति मिलेगी। सरकार इससे परिचित है कि केवल खेती से किसानों की आमदनी को दोगुना करने का लक्ष्य हासिल नहीं होगा। इसीलिए वह कृषि एवं ग्रामीण जीवन में आयपरक गतिविधियों को शामिल कर रही है। किसानों को उनकी उपज की लाभकारी कीमत दिलाने के लिए सरकार ने गन्ने के साथ-साथ गेहूं, चावल, मक्का और दूसरे खाद्यान्नों से भी एथनॉल उत्पादन को मंजूरी दे दी है। इससे न सिर्फ अतिरिक्त अनाज की खपत हो जाएगी, बल्कि पेट्रोलियम के आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी। सरकार की एथनॉल नीति को अभूतपूर्व कामयाबी मिली है। 2014 में जहां 38 करोड़ लीटर एथनॉल की खरीद हो रही थी, वहीं अब हर साल 320 करोड़ लीटर एथनॉल खरीदा जा रहा है।पिछले साल पेट्रोलियम कंपनियों में 21,000 करोड़ रुपये का एथनॉल खरीदा और इसका अधिकांश हिस्सा किसानों की जेब तक पहुंचा। इसी को देखते हुए मोदी सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लक्ष्य को पांच साल पहले अर्थात 2030 के बजाय 2025 कर दिया है। दालों के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद अब सरकार तिलहनों के घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर फोकस कर रही है। सरकार बांस की खेती को भी बढ़ावा दे रही है। इसी तरह औषधीय पौधों अश्वगंधा, सहजन, शतावरी, मशरूम, स्ट्राबेरी, आंवला की खेती को प्रोत्साहन दे रही है। इन औषधीय पौधों के कम उत्पादन के कारण किसानों को अच्छी कीमत मिलती है। इनकी खेती से न सिर्फ किसानों को लगातार आमदनी होती रहेगी, बल्कि गांवों में इनके प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन का नेटवर्क बन जाएगा, जिससे रोजगार के भरपूर अवसर निकलेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>खेती-किसानी घाटे के सौदे में तब्दील:</strong> भारतीय खेती की सबसे बड़ी समस्या यह रही कि सरकारों का पूरा जोर दूरगामी महत्व वाले निवेश पर न होकर सब्सिडी देने पर रहा। यह सब्सिडी भी चुनिंदा क्षेत्रों-फसलों पर केंद्रित रही। इसका नतीजा यह निकला कि विविध फसलों की खेती करने वाला भारतीय किसान चुनिंदा फसलों की खेती में उलझकर रह गया। हरित क्रांति रूपी एकांगी कृषि विकास से शुरू में तो खेती में खुशहाली आई, लेकिन जल्दी ही उसकी सीमाएं प्रकट होने लगीं। विडंबना यह रही कि सरकारों ने हरित क्रांति की इन खामियों को दूर न करके सब्सिडी, मुफ्त बिजली-पानी, कर्जमाफी जैसे चुनावी पासें फेंकना शुरू कर दिया जिससे समस्या और गंभीर हुई। इस प्रकार धीरे-धीरे खेती-किसानी घाटे के सौदे में तब्दील हो गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>मधु क्रांति पोर्टल और हनी कार्नर की शुरुआत:</strong> नकदी फसलों की बिक्री के लिए सरकार उत्पाद विशेष के लिए पोर्टल बना रही है। जैसे मधुमक्खी पालकों को शहद का सही दाम दिलाने के लिए मधु क्रांति पोर्टल और हनी कार्नर की शुरुआत की गई है। यह पोर्टल डिजिटल प्लेटफॉर्म का काम करेगा। सरकार ने वन डिस्टिक्ट वन फोकस प्रोडक्ट के लिए देश भर के 728 जिलों में कृषि, बागवानी, पशु, मुर्गीपालन, दुग्ध उत्पादन, मछली पालन और जलीय कृषि हेतु उत्पादों की पहचान की है। इसके तहत देश 226 जिलों में फल, 40 जिलों में धान, 107 जिलों में सब्जियां और 105 जिलों में मसालों की खेती को बढ़ावा देकर दुनिया भर में ब्रांडिंग की जाएगी। इससे किसानों की आमदनी बढ़ने के साथ कृषि निर्यात में भी बढ़ोतरी होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>किसान आंदोलन राजनीतिक विरोध में तब्दील:&nbsp;</strong>किसान संगठन अब कृषि कानूनों के विरोध से आगे बढ़कर भाजपा को हराने की मुहिम में जुट गए हैं। इसी सिलसिले में राकेश टिकैत ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात कर उनसे समर्थन मांगा। वह खुलेआम कह रहे हैं कि बंगाल को अब पंजाब और उत्तर प्रदेश में दोहराना है। साफ है किसान आंदोलन राजनीतिक विरोध में तब्दील हो चुका है। यही कारण है कि आम किसानों ने इस आंदोलन से दूरी बना ली है। आंदोलन करने वाले किसान संगठन उन गलतियों से सबक सीखने को तैयार नहीं हैं, जिनके चलते खेती-किसानी बदहाली का शिकार बनी।</p>
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		<title>पीएम मोदी की मीटिंग के बाद बुरी तरह भड़कीं ममता, कहा- हमें बोलने ही नहीं दिया गया &#124; Latest News Update</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 May 2021 09:50:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[राजनीति]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>ममता ने कहा कि मीटिंग में सिर्फ बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बाकी के सभी मुख्यमंत्री चुपचाप बैठे थे और किसी ने कुछ नहीं कहा। ममता ने कहा कि उन्हें वैक्सीन की डिमांड रखनी थी, लेकिन कुछ कहने ही नहीं दिया गया। ममता ने कहा कि इसके &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">ममता ने कहा कि मीटिंग में सिर्फ बीजेपी के कुछ मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री <a href="https://www.indiatv.in/topic/narendra-modi" target="_blank" rel="noreferrer noopener">नरेंद्र मोदी</a> ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बाकी के सभी मुख्यमंत्री चुपचाप बैठे थे और किसी ने कुछ नहीं कहा। ममता ने कहा कि उन्हें वैक्सीन की डिमांड रखनी थी, लेकिन कुछ कहने ही नहीं दिया गया। ममता ने कहा कि इसके अलावा हम 3 करोड़ वैक्सीन की मांग करने वाले थे। उन्होंने कहा, &#8216;इस महीने हमें 24 लाख वैक्सीन मिलनी थीं, लेकिन सिर्फ 13 लाख ही मिलीं। रेमडेसिविर इंजेक्शन भी नहीं दिया गया।&#8217; ममता ने कहा कि देश इस समय बुरे दौर से गुजर रहा है लेकिन पीएम मोदी कैजुअल अप्रोच अपना रहे हैं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://cdn.dnaindia.com/sites/default/files/styles/full/public/2019/05/07/821045-mamata-1-1.jpg" alt="Mamata has refused to meet PM Modi for Fani review"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>कई मुद्दों को लेकर पीएम पर बरसीं ममता</strong><br>पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनावों के बाद पहली बार पीएम की बुलाई किसी मीटिंग में शामिल हुईं&nbsp;<a href="https://www.indiatv.in/topic/mamata-banerjee" target="_blank" rel="noreferrer noopener">ममता</a>&nbsp;ने कहा कि ऑक्सीजन, वैक्सीन, दवाई कुछ भी उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि बंगाल में टीकाकरण की रफ्तार वैक्सीन की कमी के चलते धीमी है। वहीं, अधिकारियों से बात करने के बाद पीएम मोदी ने कहा, ‘महामारी से लड़ाई के हमारे तौर-तरीकों में निरंतर बदलाव, निरंतर नवोन्मेष बहुत ज़रूरी है। ये वायरस अपना स्वरूप बदलने में माहिर है, या कहें कि यह बहुरूपिया तो है ही, धूर्त भी है। इसलिए इससे निपटने के हमारे तरीके और हमारी रणनीति भी विशेष होनी चाहिए।’</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कोरोना वायरस के चलते उपजे संकट को देखते हुए देश के कई राज्यों के जिलाधिकारियों के साथ मीटिंग की। इस मीटिंग में देश के 10 राज्यों के डीएम ने हिस्सा लिया, लेकिन बैठक में पश्चिम बंगाल का कोई डीएम शामिल नहीं हुआ। मीटिंग के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और केंद्र सरकार पर एक के बाद एक कई आरोप लगाए। ममता बनर्जी ने कहा कि इस मीटिंग में उन्हें कई मांगें रखने थीं, लेकिन उन्हें बोलने ही नहीं दिया गया।</p>
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		<title>ममता ने नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों को लिखा पत्र, कहा- लोगों के विश्वास को देना होगा सम्मान &#124; Mamata Banerjee Cabinet</title>
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		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 12 May 2021 08:31:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ कांटे की टक्कर के बाद जीत की हैट्रिक बना कर तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को पत्र लिख कर उनको ‘कर्तव्य’ की याद दिलाई हैं। ममता ने पत्र में विधायकों से कहा है कि बंगाल के लोगों ने तृणमूल कांग्रेस &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/mamta-wrote-a-letter-to-the-newly-elected-party-mlas-said-peoples-trust-will-have-to-be-respected/">ममता ने नवनिर्वाचित पार्टी विधायकों को लिखा पत्र, कहा- लोगों के विश्वास को देना होगा सम्मान | Mamata Banerjee Cabinet</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के साथ कांटे की टक्कर के बाद जीत की हैट्रिक बना कर तीसरी बार बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं ममता बनर्जी ने अपने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को पत्र लिख कर उनको ‘कर्तव्य’ की याद दिलाई हैं। ममता ने पत्र में विधायकों से कहा है कि बंगाल के लोगों ने तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधियों पर विश्वास किया है। उनके विश्वास को सम्मान देना होगा। लोगों के सुख-दुःख में साथ रहना होगा‌। तृणमूल सुप्रीमों ने लिखा कि राज्य सरकार की सभी विकास परियोजनाएं आम आदमी तक पहुंचनी चाहिए।  </p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://mcmscache.epapr.in/post_images/website_350/post_21447511/full.jpg" alt="How Equations Have Changed in 3 Places That Had Brought Mamata Banerjee to  Power" width="645" height="323"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">ममता ने लोगों के साथ संचार और समन्वय बनाए रखने की भी सलाह दी। तृणमूल सूत्रों के मुताबिक, सभी 213 तृणमूल विधायकों के पास पत्र पहुंचने शुरू हो गए हैं। बता दें कि विधानसभा चुनाव में राज्य की 292 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस ने 213 सीटों पर जीत हासिल की है। वहीं, 200 सीटों पर जीत का दावा करने वाली भाजपा 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> विधानसभा में कांग्रेस और लेफ्ट  का खाता भी नहीं खुला है। अगले पांच साल में विधायक कैसे काम करेंगे? उन्हें क्या करना चाहिए? ममता ने अपने पत्र में इसका उल्लेख किया है। विधायकों को तृणमूल की ऐतिहासिक जीत के लिए बधाई देते हुए उन्होंने लिखा, &#8216;लोगों को सम्मानजनक सम्मान दिए जाने की आवश्यकता है। सुख और दुख उनके साथ रहना होगा। </p>



<p class="wp-block-paragraph">हमें नम्रता और विनम्रता के साथ लोगों की सेवा करनी है।&#8217; विधायकों को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, &#8216;इलाके के लोगों के साथ निकट संपर्क रखें। सुनिश्चित करें कि सरकार की विकास परियोजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचे। तभी हम सफलता के शिखर पर पहुंच सकते हैं।&#8217; आखिर में उन्होंने लिखा, &#8216;तृणमूल कांग्रेस आम लोगों की पार्टी है। लोगों के लिए काम करेंगे। यही हमारा वादा है। अच्छे रहें और स्वस्थ रहें।&#8217;</p>
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		<title>पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम, रुझानों में जानें- कहां बन रही है किसकी सरकार &#124; Assembly Election Results 2021</title>
		<link>https://soochanasansar.in/assembly-election-results-2021-assembly-elections-results-of-five-states-know-the-trends-whose-government-is-being-formed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 02 May 2021 08:32:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[चुनाव]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आने लगे हैं। अभी तक के रुझान साफ है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, असम में सर्बानंद सोनोवाल और केरल में पिनान राई विजयन फिर से सरकार बनाने जा रहे हैं। वहीं पुडुचेरी में पहली बार एनडीए की सरकार बनने जा रही है। तमिलनाडु में इस &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/assembly-election-results-2021-assembly-elections-results-of-five-states-know-the-trends-whose-government-is-being-formed/">पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम, रुझानों में जानें- कहां बन रही है किसकी सरकार | Assembly Election Results 2021</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के परिणाम आने लगे हैं। अभी तक के रुझान साफ है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, असम में सर्बानंद सोनोवाल और केरल में पिनान राई विजयन फिर से सरकार बनाने जा रहे हैं। वहीं पुडुचेरी में पहली बार एनडीए की सरकार बनने जा रही है। तमिलनाडु में इस बार डीएमके की सरकार बनना लगभग तय है। आइए&nbsp; जानें किस राज्य में क्या स्थिति है? किसकी सरकार बन सकती? कौन आगे चल रहा हैय़</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>1. पश्चिम बंगाल में तीसरी बार ममता बन सकती है मुख्यमंत्री</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">पश्चिम बंगाल में आज विधानसभा चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। अभी तक के रुझानों में तृणमूल कांग्रेस ने बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया है। टीएमसी फिर से बंगाल में जीत की हैट्रिक लगाती दिख रही है, जबकि भाजपा की 100 के नीचे ही रुकती दिख रही है। पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार काफी रोचक रहा। पहली बार टीएमसी की सीधे भाजपा से टक्कर हुई। शुरूआती रुझानों में ममता की टीएमसी की जीत लगभग तय है। अगर ये रुझान नतीजों में तब्दील हो जाते हैं तो 66 साल की ममता बनर्जी लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बन सकती है। हालांकि, ममता अभी नंदीग्राम सीट से अपने प्रतिद्वंदी शुभेंदु अधिकारी से पीछे चल रहीं हैं। ममता ने 20 मई 2011 को पहली और 27 मई 2016 को दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://cdn.dnaindia.com/sites/default/files/styles/full/public/2021/04/06/968191-927244-bb18hq1n.jpg" alt="Kerala Assembly Election 2021: Voting begins, fate of 957 candidates to be  decided today"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>पश्चिम बंगाल में कौन कितने सीट पर आगे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा- 77 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">टीएमसी- 202 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस+ 4 सीट पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>2. तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस की सरकार बनना तय</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद पहली बार हुए विधानसभा चुनाव में यहां बड़ा उलटफेर होता दिख रहा है। जयललिता की विरासत संभाल रहे ई पलानीसामी की कुर्सी खतरे में दिख रही है। पलानीसामी की पार्टी एआईएडीएमके अभी तक के रुझानों में बहुमत के आंकड़ों से काफी पीछे दिख रही है। अगर चुनाव में एआईएडीएमके की हार होती है तो इसका असर पार्टी के भविष्य पर भी पड़ सकता है। इस बार AIADMK और भाजपा मिलकर चुनावी मैदान में थे।  दूसरी ओर डीएमके और कांग्रेस गठबंधन की सरकार बननी लगभग तय है। डीएमके की तरफ से एमके स्टालिन पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बन सकते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>तमिलनाडु में कौन कितने सीट पर आगे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">AIADMK + 88 सीट पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">DMK+ 145 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>3. असम में भाजपा की सरकार, सोनोवाल दूसरी बार बनेंगे मुख्यमंत्री</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">59 साल के सर्बानंद सोनोवाल पर असम की जनता ने फिर विश्वास जताया है। अभी तक के रुझानों में सोनोवाल लगातार दूसरी बार यहां मुख्यमंत्री बनते दिख रहे हैं। अगर ऐसा होता है तो असम में पहली बार होगा जब एक ही चेहरा दूसरी बार मुख्यमंत्री पद पर काबिज होगा। 1946 से शुरू हुई असम की सियासत में अब तक कोई भी ऐसा नहीं रहा है जो दो बार मुख्यमंत्री बना हो। सोनोवाल पहली बार यहां 24 मई 2016 को मुख्यमंत्री बने थे। भाजपा ने यहां असम गण परिषद और यूनाइटेड पीपल्स पार्टी लिब्रल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। </p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/sites/btmt/images/stories/voter_660x450_012519023507.jpg" alt="National Voters Day 2019: Why you need to participate in country's election  process"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>केरल में कौन कितने सीट पर आगे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लेफ्ट- 83 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस+ 45सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा+ 4 सीट पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>5. पुडुचेरी में पहली बार भाजपा गठबंधन की सरकार</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">केंद्र शासित इस छोटे से प्रदेश में पहली बार ऐसे आसार बन रहे हैं जब भाजपा गठबंधन की सरकार में शामिल हो सकती है। यहां ऑल इंडिया NR कांग्रेस यानी AINRC की अगुवाई में BJP और एआईडीएमके शुरुआती रुझानों में आगे दिख रहीं हैं। हालांकि, बहुमत के आंकड़ों से अभी 5 सीटें पीछे हैं। अगर एआईएनआरसी गठबंधन यहां सरकार बनाने में सफल होती है तो मुख्यमंत्री AINRC के अध्यक्ष एन रंगास्वामी ही होंगे। रंगास्वामी दूसरी बार पुडुचेरी के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सरकार में भाजपा और एआईडीएमके के मंत्री भी होंगे। यहां इसी साल फरवरी में कांग्रेस की सरकार अल्पमत में आने से गिर गई थी।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>असम में कौन कितने सीट पर आगे</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">भाजपा- 76 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">कांग्रेस+ 47 सीटों पर आगे</p>



<p class="wp-block-paragraph">अन्य- 3 सीटों पर आगे</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://akm-img-a-in.tosshub.com/sites/btmt/images/stories/bengal_election_2_660_020521124721.jpg" alt="West Bengal Assembly Election Results 2021: List of winners and losers"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>4. केरल में विजयन दूसरी बार हो सकते&nbsp; है मुख्यमंत्री</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">लेफ्ट पार्टियों का जनाधार अब केवल केरल में ही बचा है। इसलिए लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के लिए सरकार बचाने की सबसे बड़ी चुनौती थी। यहां कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के साथ 12 अन्य दलों ने मिलकर चुनाव लड़ा था। अभी तक के रुझानों के मुताबिक, एलडीएफ जीत हासिल कर रही है। अगर ऐसा होता है तो 77 साल के पिनाराई विजयन लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।&nbsp; दूसरी ओर कांग्रेस की अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट का सरकार बनाने का सपना इस बार भी यहां पूरा नहीं हो पाएगा। ये लगातार दूसरी बार है जब कांग्रेस अपनी सरकार यहां नहीं बना पाएगी। इस बार भाजपा ने भी 5 छोटी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी थी। हालांकि, भाजपा गठबंधन को कुछ खास सफलता नहीं मिली।</p>
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		<title>पांचवें चरण के मतदान से पहले बंगाल पहुंच रहे 11 और पुलिस पर्यवेक्षक &#124; West Bengal Assembly Election Fifth Phase</title>
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		<pubDate>Fri, 16 Apr 2021 09:56:31 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>चुनाव आयोग ने बंगाल विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के मतदान से पहले सूबे में पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 11 और पुलिस पर्यवेक्षक बंगाल पहुंच रहे हैं।गौरतलब है कि जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, उनमें से बंगाल में ही &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">चुनाव आयोग ने बंगाल विधानसभा चुनाव के पांचवें चरण के मतदान से पहले सूबे में पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 11 और पुलिस पर्यवेक्षक बंगाल पहुंच रहे हैं।गौरतलब है कि जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, उनमें से बंगाल में ही पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या सबसे अधिक है, बावजूद इसके चुनावी हिंसा की घटनाओं पर अंकुश लगाया नहीं जा सका है। बंगाल में पहले चरण के मतदान से ही हिंसा का दौर जारी है। उल्लेखनीय है कि चुनावी हिंसा के लिए कुख्यात रहे पश्चिम बंगाल में इस बार भी चुनाव को शांतिपूर्वक तरीके से संपन्न कराने में चुनाव आयोग सफल नहीं रहा है। मतदान से पहले शांतिपूर्वक और निष्पक्ष माहौल में कराने के दावे आयोग की ओर से किये गये थे। लेकिन फिलहाल चार चरणों के चुनाव के दौरान ये दावे धरे के धरे रह गये हैं और हिंसा लगातार जारी है। चौथे चरण में कूचबिहार जिले के शीतलकूची की घटना के बाद आयोग बेहद सतर्क हो गया है। शेष चरणों में निर्बाध, निष्पक्ष व शांतिपूर्ण तरीके से मतदान कराने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://images.hindustantimes.com/rf/image_size_960x540/HT/p2/2019/04/18/Pictures/daltonganj-inspector-daltonganj-hindustan-lathkar-meeting-central_0850ca1e-6159-11e9-b92f-deef78e36bd1.jpg" alt="Lok Sabha elections 2019: More central forces in second phase in West  Bengal: Election Commission | Hindustan Times"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">गौरतलब है कि गत सोमवार को चुनाव पर्यवेक्षक अजय नायक व विवेक दुबे ने केंद्रीय बल के प्रमुखों के साथ बैठक की थी। पहले 20 पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति पर विचार किया गया था लेकिन बाद में 11 की नियुक्ति पर सहमति बनी। बंगाल में इस समय 66 चुनाव पर्यवेक्षक हैं, जो 20 जगहों से काम कर रहे हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">शीतलकुची जैसी घटना पांचवें चरण के मतदान के दौरान न हो, और किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से तत्काल निबटा जा सके, इसको ध्यान में रखकर ही यह निर्णय लिया गया है।&nbsp;साधारणतया एक पुलिस पर्यवेक्षक पर तीन से पांच विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी रहती है।&nbsp;कभी-कभी यह संख्या बढ़कर छह हो जाती है।&nbsp;अब और अधिक पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़ जाने के बाद मतदान प्रक्रिया पर निगरानी एवं समन्वय में मदद मिलेगी।</p>
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