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	<title>nepal flood Archives | Soochana Sansar</title>
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	<title>nepal flood Archives | Soochana Sansar</title>
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		<title>देश पर मंडरा रहा खतरा!: भारत में कभी भी तबाही मचा सकती हैं 2500 ग्लेशियर झीलें, 27 राज्यों पर बाढ़ का साया</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:49:25 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>देश के 36 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में से 27 प्रदेश, आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। हिमनदी झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम का आकलन करने की तकनीक तो विकसित कर ली गई है, लेकिन इससे बचाव अभी तक एक चुनौती &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/">देश पर मंडरा रहा खतरा!: भारत में कभी भी तबाही मचा सकती हैं 2500 ग्लेशियर झीलें, 27 राज्यों पर बाढ़ का साया</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">देश के 36 राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों में से 27 प्रदेश, आपदा के लिहाज से अत्यधिक संवेदनशील या जोखिम वाली स्थिति में हैं। हिमनदी झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम का आकलन करने की तकनीक तो विकसित कर ली गई है, लेकिन इससे बचाव अभी तक एक चुनौती बना हुआ है। देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। ऐसे में अगर जीएलओएफ जैसा कुछ होता है तो उस दौरान जानमाल के बचाव का अचूक और सुरक्षित समाधान नजर नहीं आ रहा। देश में 25 सौ से अधिक ग्लेशियल झीलें संवेदनशील स्थिति में हैं तो वहीं हिमालय की 400 से अधिक ग्लेशियर झीलें तेजी से पिंघल रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक आई तेज बाढ़ से जानमाल की भारी क्षति हुई है। नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली भोटेकोशी नदी को हिमालयी नदी कहा जाता है। नेपाल की इस भयानक त्रासदी के पीछे हिमनदी झील का फटना बताया जा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="667" height="458" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753.png" alt="" class="wp-image-19993" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753.png 667w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753-300x206.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-1753-220x150.png 220w" sizes="(max-width: 667px) 100vw, 667px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">देश के अनेक भागों में बार-बार आने वाली बाढ़ की समस्या इसलिए गंभीर हो जाती है, क्योंकि बाढ़ मैदानी क्षेत्रों पर अतिक्रमण हो चुका है। नदी तल में अनियमित गतिविधियां जारी हैं। नदी बेसिन-स्तरीय योजना का अभाव है। इसके चलते जब बाढ़ आती है तो भारी नुकसान होता है। अगर उक्त उपायों पर गंभीरता से काम हो तो जन-धन एवं संपत्ति की हानि को टाला जा सकता है। आपदा प्रबंधन पर डॉ. राधा मोहनदास अग्रवाल की अध्यक्षता वाली गृह मंत्रालय की संसदीय समिति की 261 वीं रिपोर्ट में यह बात कही गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर काम हो</strong><br>समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा कि नदी तल एवं बाढ़-मैदानी क्षेत्रों में अतिक्रमण की निगरानी एवं उन्हें हटाने के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय ढांचा विकसित किया जाए। ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अतिक्रमण किया गया है, उन्हें मानचित्र पर अंकित किया जाए। इससे संबंधित एजेंसी या विभाग की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सकेगी और भविष्य में होने वाली अतिक्रमण एवं अन्य उल्लंघनों को रोकने में भी मदद मिलेगी। उन क्षेत्रों में सख्ताई के साथ अतिक्रमण को हटाया जाए, ताकि जल का प्राकृतिक प्रवाह दोबारा से स्थापित हो सके। इससे बाढ़ का जोखिम कम होगा। शहरों में जल निकासी मास्टर प्लान तथा आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल पर गंभीरता से काम हो। नगर स्तरीय बाढ़ प्रबंधन योजना तैयार की जाएं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>गूगल अर्थ इंजन आधारित तकनीक से निगरानी&nbsp;</strong><br>केंद्रीय जल आयोग ने सुदूर संवेदन तकनीक के माध्यम से हिमनदीय झीलों की निगरानी के क्षेत्र में अपनी आंतरिक क्षमता विकसित की है। गूगल अर्थ इंजन आधारित एक ऐसा मंच विकसित किया गया है, जो उपग्रह चित्रों का स्वचालित विश्लेषण कर हिमनदीय झीलों एवं अन्य जल निकायों के क्षेत्रफल का मापन करता है। जल आयोग, गूगल अर्थ प्लेटफार्म का उपयोग कर हिमनदीय झीलों के जल प्रवाह मार्गों को भी मैप पर दिखाता है। यह हिमनदीय झील के फटने से आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) की स्थिति में जोखिम के आकलन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। ऐसे मानचित्रों को राज्यों, संघ क्षेत्रों, संस्थानों तथा सार्वजनिक उपक्रमों आदि के साथ साझा किया जाता है।&nbsp;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%96%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/">देश पर मंडरा रहा खतरा!: भारत में कभी भी तबाही मचा सकती हैं 2500 ग्लेशियर झीलें, 27 राज्यों पर बाढ़ का साया</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</title>
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		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:43:41 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया। इसके बाद रसुवा और नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों से शव बरामद किए गए हैं। &#8216;द काठमांडू पोस्ट&#8217; के अनुसार, वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a4%bc/">हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">बुधवार को नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई भयानक बाढ़ ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली और हजारों को बेघर कर दिया। इसके बाद रसुवा और नुवाकोट, धाडिंग, चितवन, तनहुं, गोरखा और नवलपरासी ईस्ट जैसे जिलों से शव बरामद किए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">&#8216;द काठमांडू पोस्ट&#8217; के अनुसार, वैज्ञानिक और जलवायु विशेषज्ञ इस बात की जांच कर रहे हैं कि पानी का यह अचानक बहाव किस वजह से हुआ? नेपाल-चीन सीमा और उसके निचले इलाकों में आई इस आपदा के बारे में अब तक जो जानकारी मिली है वह इस प्रकार ।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/Trumps-Israeli-parliament---2026-08-27T164655.871-1787836198299.webp" alt="Trumps Israeli parliament - 2026-08-27T164655.871" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">नेपाल-चीन सीमा पर क्या हुआ?</h2>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>बुधवार सुबह रसुवागढ़ी बॉर्डर क्रॉसिंग पर भोटेकोशी नदी का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ा, जिससे लोग अपनी जान बचाने के लिए भागने लगे। शुरू में यह अनुमान लगाया गया कि शायद ग्लेशियर झील के फटने या हिमस्खलन (avalanche) के कारण ऐसा हुआ होगा। लेकिन दिन भर इस अचानक आए बहाव का कोई पक्का कारण पता नहीं चल सका।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ रसुवागढ़ी के पास शुरू हुई और रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में नदी के निचले इलाकों में बसी बस्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। जब तक यह रिपोर्ट तैयार की गई, सरकार ने 289 लोगों की मौत की पुष्टि कर दी थी, जबकि सैकड़ों लोग लापता थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रसुवा और धाडिंग के बीच बने पुल और अन्य बह गए। नुवाकोट के असिस्टेंट चीफ डिस्ट्रिक्ट ऑफिसर कृष्ण प्रसाद हुमागाईं ने कांतिपुर को बताया कि इस इलाके में लोगों की याददाश्त में यह अब तक की सबसे भयानक बाढ़ थी।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/WhatsApp-Image-2026-08-26-at-11.29.37-PM-1787836224987.webp" alt="WhatsApp Image 2026-08-26 at 11.29.37 PM" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या एवलांच या भूकंप की वजह से आई&nbsp;बाढ़?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर गिरने से एक नदी का रास्ता रुक गया था, जिससे एक अस्थायी प्राकृतिक बांध बन गया; बाद में यह बांध टूट गया और बाढ़ आ गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">US जियोलॉजिकल सर्वे ने बुधवार सुबह 8:37 बजे तिब्बत में गोसाईंकुंडा से लगभग 47 किलोमीटर उत्तर में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया। वैज्ञानिक अभी यह पक्का नहीं कर पाए हैं कि भूकंप की वजह से भूस्खलन हुआ या उसमें भूकंप की कोई भूमिका थी।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/20260827234L-1787836278189.webp" alt="20260827234L" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या खतरे की कोई चेतावनी दी गई थी?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">यह इलाका पहले से ही अचानक आने वाली बाढ़ के लिए संवेदनशील माना जाता है। पिछले साल भी 8 जुलाई को भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया था। नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने निष्कर्ष निकाला कि पिछली बाढ़ नेपाल-चीन सीमा के पास लेंडे नदी में ग्लेशियर झील के फटने के कारण आई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सेंटिनल इमेजरी का उपयोग करके किए गए सैटेलाइट विश्लेषण से पता चला कि एक ग्लेशियर झील फटी थी, जिससे पानी नीचे की ओर बहने लगा था। वैज्ञानिकों ने यह भी चेतावनी दी थी कि हिमालय के क्षेत्र में कई संभावित खतरनाक ग्लेशियर झीलें मौजूद हैं।लेकिन बुधवार की आपदा वाली जगह पर बर्फ और चट्टान का हिमस्खलन (avalanche) होने की कोई विशिष्ट भविष्यवाणी नहीं की गई थी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के एक अध्ययन में नेपाल, भारत और तिब्बत में 3,624 ग्लेशियर झीलों की पहचान की गई। इनमें से 47 को संभावित रूप से खतरनाक और फटने के जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया, जिनमें से 21 नेपाल में थीं।</p>



<figure class="wp-block-image"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/20260827232L-1787836291877.webp" alt="20260827232L"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">वैज्ञानिकों का क्या कहना है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन सीमा के पास रासुवागढ़ी से करीब 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में बर्फ और चट्टान का बड़ा हिमस्खलन हुआ। प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट इमेजरी और नेपाल के राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण के अनुसार यही मुख्य कारण है। मलबा लेंडे नदी (भोटेकोशी की सहायक) में गिरा, जिससे मलबे से भरी असामान्य रूप से तेज बाढ़ आई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ICIMOD के वैज्ञानिक जांच कर रहे हैं कि क्या संकरे हिस्से में मलबा जमा होकर अस्थायी लैंडस्लाइड डैम बना। गल्छी में त्रिशूली का जलस्तर 30 मिनट में नौ मीटर और मालेखु में सात मीटर बढ़ गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रिमोट सेंसिंग विशेषज्ञ सार्थक श्रेष्ठ के मुताबिक, सबूत नेपाल की ओर (स्याफ्रुबेसी के ऊपर) हुए हिमस्खलन को दर्शाते हैं, जिसने नदी रोक दी। चीनी मॉनिटरिंग सिस्टम में तिब्बत पक्ष पर कोई ऐसी घटना नहीं मिली। चीनी संस्थानों के साथ सहयोग जारी है; पूरी तस्वीर समझने में एक-दो हफ्ते लग सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://www.jagranimages.com/images/2026/08/27/template/image/WhatsApp-Image-2026-08-26-at-9.43.06-PM-1787836308149.webp" alt="WhatsApp Image 2026-08-26 at 9.43.06 PM" style="aspect-ratio:2;width:640px;height:auto"/></figure>



<h2 class="wp-block-heading">क्या एक और बाढ़ आ सकती है?</h2>



<p class="wp-block-paragraph">वैज्ञानिकों ने आगे खतरे की संभावना से इनकार नहीं किया। गृह मंत्री सूडान गुरुंग ने कहा कि ल्हेंडे नदी अभी पूरी साफ नहीं हुई। कायास्था के अनुसार शुरुआती चिंता थी कि ऊपरी हिस्से में बड़ा पानी जमा हो सकता है, पर झील की पुष्टि के पर्याप्त सबूत नहीं। ICIMOD ने बादलों के कारण सैटेलाइट निगरानी में दिक्कत बताई। कायास्था ने कहा, &#8216;खतरा बना हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बढ़ते तापमान से हिमालय में ग्लेशियर पिघलने, बर्फ-चट्टान टूटने और हिमस्खलन की संभावना बढ़ती है, पर अगली घटना कहाँ होगी, कहना मुश्किल।&#8217; वैज्ञानिक ग्लेशियर झीलों और जोखिम वाले इलाकों पर नजर रखे हुए हैं।चीन ने निचले हिस्से में संभावित खतरनाक घटना की जानकारी दी। जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल में चोटचेन और पुरुपे त्सांगपो नदियों के संगम के पास बड़ी झील बनी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">गुरुवार सुबह तक करीब 20 लाख घनमीटर पानी जमा हो चुका था और बहना शुरू हो गया। अगले तीन दिनों में 30 लाख घनमीटर और आ सकता है, जिससे प्राकृतिक बांध टूटने का खतरा है। चीनी अधिकारी निगरानी, बाढ़ सिमुलेशन और आपातकालीन तैयारी कर रहे हैं। ये नदियाँ तिब्बत से निकलकर नेपाल में भोटेकोशी के रूप में त्रिशूली की सहायक नदी बनती हैं।</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%af-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ad%e0%a5%8b%e0%a4%9f%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a5%8b%e0%a4%b6%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a2%e0%a4%bc/">हिमालय में भोटेकोशी बाढ़ की असली वजह का खुलासा, नेपाल में तीन दिन बाद क्या होगा?</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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		<title>नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू में जुटीं SDRF और PAC की टीमें, सीएम ने दिए निर्देश</title>
		<link>https://soochanasansar.in/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%bf/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Admin]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 27 Aug 2026 13:51:35 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
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		<category><![CDATA[nepal flood]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच फंसे यूपी के लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें नेपाल भेजी गई हैं। राहत-बचाव के लिए एसडीआरएफ के 32 जवान और पीएसी की 26वीं बटालियन के 22 जवान नेपाल पहुंचकर रेस्क्यू में जुट गए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव के लिए चार &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://soochanasansar.in/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%ab%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-%e0%a4%a8%e0%a4%bf/">नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू में जुटीं SDRF और PAC की टीमें, सीएम ने दिए निर्देश</a> appeared first on <a href="https://soochanasansar.in">Soochana Sansar</a>.</p>
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<p class="wp-block-paragraph">नेपाल में बाढ़ और प्राकृतिक आपदा के बीच फंसे यूपी के लोगों को निकालने के लिए एसडीआरएफ और पीएसी की टीमें नेपाल भेजी गई हैं। राहत-बचाव के लिए एसडीआरएफ के 32 जवान और पीएसी की 26वीं बटालियन के 22 जवान नेपाल पहुंचकर रेस्क्यू में जुट गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव के लिए चार रबर बोट मौजूद हैं। अब एक एल्युमिनियम बोट भी नेपाल भेजी जा रही है। सिंधुरिया क्षेत्र में बचाव अभियान की तैयारी की जा रही है। जरूरत पड़ने पर और जवान और संसाधन भेजे जाएंगे। ये जानकारी प्रदेश सरकार ने दी है। अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर टीमें भेजी गई हैं।&nbsp;</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिससे प्रदेश के लोगों को निकाला जा सके। वहीं नेपाल में फंसे यूपी के लोगों की जानकारी लेने और मदद के लिए उनके परिजन 1070 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। नेपाल सीमा से लगे यूपी के जिलों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। सरकार का कहना है कि नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना प्राथमिकता है। इसके लिए वहां की स्थिति के अनुसार बचाव अभियान चलाया जाएगा।</p>



<h3 class="wp-block-heading">सीएम ने सीमावर्ती जिलों में सतर्कता के दिए निर्देश</h3>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/08/27/napal-bugdhha_832d0d1859c260309550a6393aac8da6.jpeg?w=414&amp;dpr=1.0&amp;q=70" alt="UP: SDRF and PAC teams engaged in rescue operations to evacuate people stranded in Nepal, CM issued instructio" style="aspect-ratio:1.7768240343347639;width:414px;height:auto" title="यूपी: नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू में जुटीं SDRF और PAC की टीमें, सीएम ने दिए निर्देश"/></figure>



<p class="wp-block-paragraph">नेपाल में भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीमावर्ती जिलों में सतर्कता के निर्देश दिए हैं। उन्होंने आपदा से हुए जान-माल की क्षति पर दुख जताते हुए महाराजगंज और कुशीनगर के स्थानीय प्रशासन को जरूरी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। देवरिया में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है। वहीं, सीएम ने प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और अतिवृष्टि को देखते हुए अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने और जरूरतमंद परिवारों को हरसंभव मदद का निर्देश दिया है। उन्होंने नुकसान का आकलन कर पीड़ितों को 24 घंटे में मुआवजा देने को कहा है। प्रदेशवासियों से उन्होंने सावधानी बरतने की भी अपील की है।&nbsp;<br><br><strong>हेल्पलाइन नंबर जारी</strong><br>प्रदेश के राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में फंसे यूपी के नागरिकों की सहायता के लिए परिजनों को हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क करने का अनुरोध किया है।</p>



<h3 class="wp-block-heading">नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 332 हुई, लापता लोगों की तलाश जारी</h3>



<figure class="wp-block-image is-resized"><img decoding="async" src="https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2026/08/27/napal-bugdhha_e3279b5801dbaf2a348e7bac5b3072df.jpeg?w=414&amp;dpr=1.0&amp;q=70" alt="UP: SDRF and PAC teams engaged in rescue operations to evacuate people stranded in Nepal, CM issued instructio" style="aspect-ratio:1.7768240343347639;width:414px;height:auto" title="यूपी: नेपाल में फंसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू में जुटीं SDRF और PAC की टीमें, सीएम ने दिए निर्देश"/></figure>



<h3 class="wp-block-heading">बुधवार को आई भीषण बाढ़ में मरने वालों की संख्या गुरुवार को बढ़कर 332 हो गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने लापता लोगों की तलाश और बचाव अभियान जारी रखा है। सबसे ज्यादा शव चितवन और नवलपरासी ईस्ट में बरामद किए गए हैं। अधिकारियों की ओर से प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है।</h3>
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