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	<title>संपादकीय Archives | Soochana Sansar</title>
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	<description>Hindi Dainik</description>
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	<title>संपादकीय Archives | Soochana Sansar</title>
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	<item>
		<title>चीन पुतिन का समर्थन कुछ शर्तों पर ही करेगा</title>
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		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:35:35 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>श्रुति व्यास &#124; क्या दृश्य था.! अस्त होने के ठीक पहले का नर्म सूरज पेड़ों के पीछे से झांक रहा था। उसकी रोशनी दो प्रसन्नचित्त पक्के दोस्तों पर पड़ रही थी जो पांच साल के बाद मिले थे। इस मुलाकात से वे दोनों कितने रोमांचित थे, यह उनके गर्मजोशी से गले मिलने से जाहिर था। &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph"><br>श्रुति व्यास | <strong>क्या दृश्य था.! अस्त होने के ठीक पहले का नर्म सूरज पेड़ों के पीछे से झांक रहा था। उसकी रोशनी दो प्रसन्नचित्त पक्के दोस्तों पर पड़ रही थी जो पांच साल के बाद मिले थे। इस मुलाकात से वे दोनों कितने रोमांचित थे, यह उनके गर्मजोशी से गले मिलने से जाहिर था।</strong></p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794-1024x683.png" alt="" class="wp-image-13354" style="width:503px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794-1024x683.png 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794-300x200.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794-768x512.png 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794-1536x1025.png 1536w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-794.png 2000w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><em><strong>सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की यात्रा पर मास्को पहुंचे। वे कूटनीतिक उलझनों को कम करने और संबंधों और मजबूत बनाने के लिए बातचीत करने आए थे।</strong></em><br>राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने निवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया और रूस आने के लिए अपने &#8216;प्रिय मित्रÓ मोदी का शुक्रिया अदा किया। जवाब में मोदी ने कहा, &#8220;एक दोस्त के घर आना हमेशा बहुत अच्छा अनुभव होता है&#8221;।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-large is-resized"><img decoding="async" width="1024" height="768" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796-1024x768.png" alt="" class="wp-image-13356" style="width:618px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796-1024x768.png 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796-300x225.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796-768x576.png 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796-1536x1152.png 1536w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-796.png 1920w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">एक-दूसरे के प्रति दोनों का रवैया बहुत सौहार्दपूर्ण था। यह करीब-करीब उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति किम जोंग-उन की रूस यात्रा जैसा ही था या फिर कुछ हफ्ते पहले पुतिन की उत्तर कोरिया की यात्रा जैसा। तब किम और पुतिन प्योंगयांग की एक सड़क पर एक महंगी कार में घूमते नजर आए थे, जिसे किम चला रहे थे। लगभग वैसा ही नजारा हमने मॉस्को में देखा जहां मोदी एक नीले रंग की चमचमाती गोल्फ कार्ट में बैठे थे जिसे, पुतिन चला रहे थे। दोनों नेता पुतिन के घोड़ों को देखने जा रहे थे।<br>जिस समय मॉस्को में प्रेम और सौहार्द का यह प्रदर्शन चल रहा था, उस समय जो बाइडेन वाशिंगटन में नाटो देशों के नेताओं की अगवानी कर रहे थे, जिनकी यात्रा का उद्देश्य था यूक्रेन युद्ध में रूस द्वार ढाए जा रहे जुल्मों के चलते उस पर और सख्त प्रतिबंध लगाने, उसके खिलाफ और कठोर कदम उठाने पर विचार करना। रूस ने उसी दिन अन्य नागरिक ठिकानों के साथ-साथ यूक्रेन के बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल पर मिसाइलों से हमला किया, जिसमें बच्चों सहित दर्जनों लोग मारे गए।<br>मोदी के रूस में हुए गर्मजोशी भरे स्वागत पर कीव से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलदोमिर जेलेंस्की ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, &#8220;दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता को खून-खराबे के सबसे बड़े अपराधी के गले लगते देखना अत्यंत निराशाजनक है और शांति के प्रयासों के लिए बहुत बड़ा झटका है&#8221;।<br><strong>प्रधानमंत्री यूक्रेन युद्ध प्रारंभ होने के बाद पहली बार रूस पहुंचे थे। यह तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा भी थी। उन्होंने स्वयं उनके द्वारा कायम की गई इस परंपरा को तोड़ दिया कि पद संभालने के बाद वे सबसे पहले पड़ोसी देश की यात्रा करेंगे। उन्होंने रूस को चुना।</strong><br>उनका इरादा पुतिन द्वारा यूक्रेन पर हमला करने के खिलाफ कोई सख्त रवैया अपनाने या पुतिन की बर्बरता की कड़े शब्दों में की निंदा करने का नहीं था, बल्कि, दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों पर एक बार फिर मुहर लगानी थी। पहली विदेश यात्रा के लिए रूस को चुनने का एक उद्धेश्य क्रेमलिन की भारत के प्रतिद्वंदी चीन पर निर्भरता कम करने का प्रयास करना भी था।<br>यह करने के लिए उन्हें पूरब और पश्चिम के बीच एक नाजुक संतुलन कायम करना पड़ेगा। लेकिन इसकी बजाए वे अब तक रूस को काफी नरम अंदाज़ में समझाइश देते आ रहे हैं। उन्होंने 2022 में उज्बेकिस्तान में आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में पुतिन से कहा था कि &#8220;आज का समय युद्ध का नहीं है&#8221;। पुतिन ने पिछले साल दिल्ली में आयोजित हुए जी-20 सम्मेलन में भाग नहीं लिया, जिसमें दुनिया भर के नेताओं ने यूक्रेन पर रूसी हमले की आलोचना की। वहीं मोदी पिछले सप्ताह कजाखस्तान में हुए शंघाई सहयोग संगठन, एससीओ सम्मेलन में नहीं पहुंचे, जिसमें रूसी राष्ट्रपति ने दावा किया कि मॉस्को एवं बीजिंग के संबंध इससे पहले कभी इतने अच्छे नहीं रहे।<br><strong>इससे भारत के कान खड़े हो गए। उसे लगा कि मॉस्को-बीजिंग की बढ़ती निकटता से वह अलग-थलग पड़ जाएगा। लद्दाख इलाके में जून 2020 में हुई खूनी झड़पों में 20 भारतीय और कम से कम चार चीनी सैनिक मारे गए थे और इसके कारण दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।</strong><br>यह स्थिति दिल्ली को चुभी और चिंतित सरकार ने आनन-फानन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा का कार्यक्रम बनाया। आखिरकार रूस को भारत की जितनी जरूरत है, उससे कहीं ज्यादा जरूरत भारत को रूस की है। प्रतिरक्षा और तेल के लिए अभी भी भारत काफी हद तक रूस पर निर्भर है। रूस के लिए भारत वित्तीय दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है और दोनों देशों का आपसी व्यापार पिछले वर्ष करीब 65 अरब डॉलर था मगर इसमें ज्यादातर राशि रूस से निर्यात के भुगतान की है, जिसके नतीजे में भारत का व्यापार घाटा बहुत तेजी से बढ़ा है। इस बात पर मोदी ने भी &#8216;गपशपÓ के दौरान चिंता जाहिर की।<br>लेकिन &#8216;गपशपÓ के दौरान सिर्फ मीठी-मीठी बातें ही नहीं हुईं, बल्कि इसमें तकरार के क्षण भी आए। आखिरकार युद्ध का दुष्प्रभाव भारत को भी झेलना पड़ा है। मोदी ने जल्दी से जल्दी उन भारतीयों को मुक्त कराने की मांग की, जिन्हें पिछले कुछ वर्षों में यूक्रेन से लड़ने के लिए रूसी सेना में शामिल होने के लिए बहलाया-फुसलाया गया था। अब तक इनमें से कम से कम चार की मौत युद्धक्षेत्र में हो चुकी है। पुतिन ने वायदा किया कि सभी भारतीयों को रूसी सेना की सेवाओं से मुक्त करके वापिस स्वदेश भेज दिया जाएगा।<br><strong>मोदी की रूस की यह पहली दोपक्षीय विदेश यात्रा अमेरिका को पसंद नहीं आई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने मोदी से मॉस्को में यूक्रेन की अखंडता के मुद्दे पर जोर देकर बात करने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने रूस से संबंधों को लेकर भारत से चिंता जाहिर की है।</strong><br>भारत इस समय किसी नट की तरह, दो खंभों के बीच बंधी रस्सी पर संतुलन बनाए रखकर चलने की कोशिश कर रहा है। वो दोनों पक्षों से पूरा-पूरा लाभ हासिल करना चाहता है। वह अमेरिका और पश्चिम का सहयोगी बनना चाहता है। वह चाहता है कि पूरी दुनिया उसे विश्वगुरु माने। लेकिन जो गुरु अपने चेलों की गलतियों पर चुप्पी साध ले वह कैसा गुरु।<br>इसमें कोई संदेह नहीं कि मोदी की रूस यात्रा शीत युद्ध के समय से जारी रणनीतिक संबंधों की ही एक कड़ी है। रूस और चीन की निकटता से नई दिल्ली में बेचैनी और चिंता उत्पन्न होना स्वाभाविक है। आने वाले समय में रूस और चीन की निकटता, भारत के लिए एक मुसीबत बन सकती है। पुतिन जरा सी भी झिझक के बिना बर्बरतापूर्ण रवैया अपनाए हुए हैं और आशंका कि वे रसायनिक और छोटे परमाणु हथियारों के जरिए और भी निर्दयतापूर्ण जुल्म ढा सकते हैं।<br><strong>क्या भारत इसका मूक दर्शक बना रहेगा? और यदि युद्ध रूस को थका देता है, उसकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर देता है, तो क्या चीन पर उसकी निर्भरता और नहीं बढ़ेगी? क्या यह भारत के लिए नुकसानदायक नहीं होगा? हम यह जानते हैं कि चीन पुतिन का समर्थन कुछ शर्तों पर ही करेगा। और इसमें कोई शंका नहीं होनी चाहिए कि भारत-चीन विवाद की स्थिति में रूस वैसा ही आचरण करेगा जैसा आज भारत कर रहा है– न काहू से दोस्ती, न काहू से बैर।</strong></p>
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			</item>
		<item>
		<title>सरकार के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय हो</title>
		<link>https://soochanasansar.in/accountability-should-be-fixed-at-the-top-level-of-the-government/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:32:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Articles]]></category>
		<category><![CDATA[Editor's Pick]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अजीत द्विवेदी &#124; मानसून की पहली बारिश में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल एक की पार्किंग एरिया में कैनोपी यानी छत गिर गई। इस हादसे में आठ गाड़ियां दब गईं। इनमें से एक गाड़ी टैक्सी थी, जिसमें ड्राइवर बैठा हुआ था और छत गिरने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">अजीत द्विवेदी | मानसून की पहली बारिश में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के टर्मिनल एक की पार्किंग एरिया में कैनोपी यानी छत गिर गई। इस हादसे में आठ गाड़ियां दब गईं। इनमें से एक गाड़ी टैक्सी थी, जिसमें ड्राइवर बैठा हुआ था और छत गिरने से मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दिल्ली हवाईअड्डे के साथ ही मध्य प्रदेश के जबलपुर और गुजरात के राजकोट हवाईअड्डे पर भी बिल्कुल इसी तरह की घटनाएं हुईं। जिस समय एक के बाद एक ये तीन घटनाएं हुईं उसी समय बिहार में पुल गिरने की खबरें आ रही थीं। एक पखवाड़े में कोई एक दर्जन पुल गिर गए। ज्यादातर पुल पुराने थे लेकिन कम से कम दो पुल ऐसे थे, जो अभी बन ही रहे थे। यानी निर्माणाधीन पुल गिर गए।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-large is-resized"><img decoding="async" width="1024" height="653" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-790-1024x653.png" alt="" class="wp-image-13348" style="width:518px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-790-1024x653.png 1024w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-790-300x191.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-790-768x490.png 768w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-790.png 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>
</div>


<p class="has-white-color has-luminous-vivid-amber-background-color has-text-color has-background has-link-color wp-elements-2 wp-block-paragraph"><strong>उसी समय या उससे थोड़ा पहले यह खबर आई थी कि मुंबई के जिस अटल सेतु का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव की घोषणा से पहले उद्घाटन किया था उसमें दरारें आ गई हैं। हालांकि बाद में कहा गया कि दरार पुल पर नहीं, बल्कि एप्रोच रोड पर आई है। यह ऐसी सफाई थी, जिसमें पूरी व्यवस्था को बचाने का प्रयास साफ दिख रहा था। इससे कुछ ही दिन पहले पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग में कंचनजंघा एक्सप्रेस की मालगाड़ी से टक्कर हो गई, जिसमें पांच लोग मारे गए। यह बिल्कुल उसी तरह का हादसा था, जैसा पिछले साल बालासोर में हुआ था, जिसमें करीब तीन सौ लोगों की जान गई थी। दोनों दुर्घटनाओं के समय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ही थे।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><br><strong>ऐसी दुर्घटनाओं के समय मीडिया में यह बताने का प्रचलन रहा है कि कैसे एक ट्रेन दुर्घटना हुई थी तो तत्कालीन रेल मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने इस्तीफा दे दिया था। यह भी बताया जाता है कि नीतीश कुमार ने भी एक हादसे के बाद रेल मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। लेकिन अब तो नीतीश कुमार इस्तीफा नहीं देते! उनके राज्य में पिछले एक पखवाड़े में एक दर्जन पुल गिरे हैं। दो निर्माणाधीन पुल गिरे हैं। कुछ समय पहले 17 सौ करोड़ रुपए की लागत से गंगा नदी पर बन रहा पुल गिर गया था। उससे थोड़े दिन पहले गंडक नदी पर बना 264 करोड़ रुपए का पुल गिर गया था। उनके राज्य में शराबबंदी है और सैकड़ों लोग नकली शराब पीकर मर गए।</strong><br>लेकिन ऐसी किसी घटना के बाद नीतीश कुमार का इस्तीफा नहीं हुआ और न उन्होंने आगे आकर जवाबदेही स्वीकार की। यही हाल हवाईअड्डों की छत गिरने में है, यही हाल रेल दुर्घटनाओं में है और यही हाल बारिश में सड़कों के धंसने, पहाड़ टूटने, जंगलों में आग लगने जैसी घटनाओं में भी है। किसी भी हादसे में शासकीय या प्रशासकीय जवाबदेही नहीं तय की जा रही है। ऐसा लग रहा है, जैसे देश की शासन व्यवस्था जवाबदेही के सिद्धांत से ऊपर उठ गई है। हम सामूहिक उत्तरदायित्व के दौर से आगे किसी और दौर में रह रहे हैं!</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="aligncenter size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="842" height="486" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-791.png" alt="" class="wp-image-13349" style="width:512px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-791.png 842w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-791-300x173.png 300w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-791-768x443.png 768w" sizes="auto, (max-width: 842px) 100vw, 842px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph"><em>ऐसा लग रहा है, जैसे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के साथ साथ केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी हर तरह की जवाबदेही से मुक्त हो गए हैं। वे अपने किए गए किसी भी काम के प्रति उतरदायी नहीं हैं। यह भी लग रहा है कि देश की आम जनता की जान की कीमत कुछ भी नहीं रह गई है। वह हवाईअड्डे की पार्किंग में छत गिर जाने से मर जाता है या सत्संग की भीड़ में कुचल कर मर जाता है और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है। आम इंसान सिर्फ एक भीड़ का हिस्सा बन कर गया है, जिसका इस्तेमाल चुनाव के समय वोट लेने और उसके बाद पांच साल तक दर्जनों किस्म के टैक्स वसूलने के लिए किया जाता है। इसके बाद न तो कोई उसकी जिंदगी की लिए जवाबदेह है और न उसकी मौत के लिए उत्तरदायी है! यह दुखद स्थिति है और किसी भी सभ्य और जीवंत लोकतंत्र के माथे पर गहरा काला धब्बा है।</em><br>आखिर हवाईअड्डे की छत गिरने का हादसा हो या पुल गिरने की घटना हो या ट्रेन दुर्घटना हो, ये सारी घटनाएं तो प्रशासकीय विफलता की वजह से ही हुईं! फिर इसके लिए किसी को जिम्मेदार क्यों नहीं ठहराया जाना चाहिए? क्या इसके लिए बिल्कुल शीर्ष स्तर से लोगों का इस्तीफा नहीं होना चाहिए? इन घटनाओं का यह कह कर बचाव किया जा रहा है कि दिल्ली हवाईअड्डे की जो छत गिरी वह 2009 में बनी थी, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार थी या बिहार में जो पुल गिरे हैं वो 40 साल पुराने थे या ट्रेन दुर्घटना स्टेशन मास्टर या किसी अन्य रेलवे कर्मचारी की गलती से हुई। यह भी कहा जा रहा है कि इतना बड़ा देश है और इतना विशाल बुनियादी ढांचा है तो कहीं न कहीं दुर्घटना होती रहेगी। अगर इसके लिए मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे होने लगें तो फिर कोई नहीं बचेगा।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="600" height="401" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-792.png" alt="" class="wp-image-13350" style="width:529px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-792.png 600w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-792-300x201.png 300w" sizes="auto, (max-width: 600px) 100vw, 600px" /></figure>
</div>


<p class="wp-block-paragraph">यह सब बहुत सतही और असंवेदनशील दलीलें हैं, जिनके दम पर शासन और व्यवस्था का बचाव किया जा रहा है। असल में ये सारे तर्क इस ओर इशारा कर रहे हैं कि ऐसी घटनाएं तो होती रहती हैं। इस तर्क का विस्तार यह भी हो सकता है कि अगर घटनाएं नहीं होंगी, पुल नहीं गिरेंगे, सड़कें नहीं टूटेंगी, टर्मिनल की छत नहीं गिरेगी तो नया निर्माण कैसे होगा और अगर नया निर्माण नहीं हुआ तो ठेके में कमीशन का खेल कैसे होगा और अगर कमीशन का खेल नहीं हुआ तो राजनीति कैसे होगी? असल में यह एक दुष्चक्र बन गया है, जिसमें सबकी मिलीभगत है। यह कहने में कोई हिचक नहीं है कि बुनियादी ढांचे का निर्माण आम जनता के हित के लिए कम और राजनीतिक व आर्थिक फायदे के लिए ज्यादा किया जाता है। सरकारी ठेकों में जम कर कमीशन का खेल होता है और ऊपर से ठेकेदार के ऊपर काम जल्दी पूरा करने का दबाव होता है, ताकि राजनीतिक लाभ लिया जा सके। काम की गुणवत्ता पर किसी का ध्यान नहीं रहता है और न काम पूरा होने के बाद उसके रखरखाव का कोई सांस्थायिक ढांचा बना है।<br>अगर सड़कों, पुलों और दूसरे बुनियादी ढांचों के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए, उनकी नियमित जांच की सांस्थायिक व्यवस्था बने और किसी भी गड़बड़ी के लिए सरकार के शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय हो तो इस तरह की घटनाओं को रोकना मुश्किल नहीं होगा। आखिर अंग्रेजों के जमाने में बने सैकड़ों रेल और सड़क पुल आज भी सुरक्षित हैं, जबकि आजाद भारत में बना बुनियादी ढांचा पहले दिन से खतरे में होता है। तभी यह सोचना तो चाहिए कि आखिर ऐसा क्यों होता है और इसे रोकने का क्या उपाय हो?</p>
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		<title>मोदी की रूस यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई</title>
		<link>https://soochanasansar.in/modis-visit-to-russia-proved-to-be-of-strategic-importance/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jul 2024 13:28:22 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Articles]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[latestnews]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>रूस के लिए मोदी की यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। इस लिहाज से इस यात्रा का महत्त्व स्पष्ट है। भारत-रूस दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा को सफल बताया है। &#8230;</p>
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<p class="wp-block-paragraph">रूस के लिए मोदी की यात्रा रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। इस लिहाज से इस यात्रा का महत्त्व स्पष्ट है।</p>


<div class="wp-block-image">
<figure class="alignleft size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="640" height="480" src="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-789.png" alt="" class="wp-image-13345" style="width:500px;height:auto" srcset="https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-789.png 640w, https://soochanasansar.in/wp-content/uploads/image-789-300x225.png 300w" sizes="auto, (max-width: 640px) 100vw, 640px" /></figure>
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<p class="has-black-color has-cyan-bluish-gray-background-color has-text-color has-background has-link-color wp-elements-4 wp-block-paragraph"><strong>भारत-रूस दोनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मास्को यात्रा को सफल बताया है। लेकिन सफलता को मापने के दोनों के संभवत: अलग-अलग पैमाने हैं। भारत की नजर में रक्षा, व्यापार, ऊर्जा आदि क्षेत्रों में हुए समझौतों से देश को फायदा होगा। दोनों देशों ने 2030 तक सालाना आपसी व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का इरादा जताया है, जो फिलहाल 65 बिलियन डॉलर के करीब है। खबरों के मुताबिक रूस भारत को रियायती दर पर कच्चा तेल देते रहने पर राजी हुआ है। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग आगे बढ़ाने और रक्षा क्षेत्र में तकनीक ट्रांसफर जारी रखने पर भी रजामंदी हुई। मोदी ने रूसी राष्ट्रपति व्लादीमीर पुतिन के सामने भारतीय नौजवानों को जबरन रूसी सेना में शामिल करने का मुद्दा उठाया, जिस पर पुतिन उन्हें जल्द वहां से मुक्ति देने पर सहमत हुए।</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>इसके अलावा भारत के नजरिए एक सफलता यह भी है कि रूस ने अपने प्रतिष्ठित सम्मान- ऑर्डर ऑफ सेंट एंर्ड्यू द अपोस्टल से मोदी को सम्मानित किया। विदेश में मोदी के ऊंच कद की छवि बनाना गुजरे दस साल में भारतीय विदेश नीति का एक खास प्रयास रहा है। इस सम्मान से इस कथा में एक नया पहलू जुड़ा है। उधर रूस के लिए यह यात्रा दूरगामी रणनीतिक महत्त्व का साबित हुई। पिछले सवा दो साल में रूस का खास प्रयास पश्चिम के इस प्रचार को झुठलाने का है कि उसे अंतरराष्ट्रीय जगत में अलग-थलग कर दिया गया है। जिस भारत में अमेरिका ने गुजरे वर्षों में खास रणनीतिक निवेश किया है, <strong>उसके प्रधानमंत्री मास्को जाकर पुतिन के गले लगें, तो उसका प्रतीकात्मक महत्त्व स्पष्ट है। रूस और चीन की फिलहाल कोशिश यह है कि भारत को जितना संभव है तटस्थ रखने का प्रयास किया जाए, ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में पश्चिमी रणनीति ऊहापोह की शिकार बनी रहे। इसीलिए चीन में मोदी की मास्को यात्रा का दिल खोल कर स्वागत किया गया है। बेशक, इस यात्रा से अमेरिका की तल्खी बढ़ी है, जो उसके विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया से जाहिर हुआ है। तो कुल मिला कर दोनों पक्षों ने अपने हित साधे। </strong>फिलहाल इसमें वे सफल रहे हैं।</p>
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		<title>मतदाता सूची में सुधार की मांग युवा कांग्रेस ने सौपा ज्ञापन</title>
		<link>https://soochanasansar.in/youth-congress-submits-memorandum-demanding-improvement-in-panchayat-voter-list/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 05 Jan 2021 13:03:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ताजा खबरे]]></category>
		<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
		<category><![CDATA[स्वास्थ्य]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>बस्ती – भारतीय युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय के नेतृत्व में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देकर ग्राम पंचायत चुनाव के लिये बनायी जा रही मतदाता सूचियों की खामियों को दूर कराये जाने की मांग किया। ज्ञापन में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय ने कहा है कि ग्राम पंचायत, &#8230;</p>
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]]></description>
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<h6 class="wp-block-heading">बस्ती – भारतीय युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय के नेतृत्व में पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को </h6>



<h6 class="wp-block-heading">जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देकर ग्राम पंचायत चुनाव के लिये बनायी जा रही मतदाता सूचियों की खामियों को दूर कराये जाने की मांग किया।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"><br>ज्ञापन में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपेश पाण्डेय ने कहा है कि ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत के चुनावों को लेकर जहां प्रत्याशी सक्रिय होने लगे है</h6>



<h6 class="wp-block-heading"> वहीं मतदाता सूचियों में खामियों खुलकर सामने आ रही है। बीएलओ पर प्रत्याशी अकारण दबाव बना रहे हैं और कुछ स्थानों पर तो बीएलओ खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"> इस कारण से यदि मतदाता सूचियों में सुधार न कराया गया तो चुनाव के समय हिंसा, तनाव की स्थितियां सामने आ सकती है।</h6>



<h6 class="wp-block-heading"><br>ज्ञापन सौपने वालों में मुख्य रूप से दुर्गेश त्रिपाठी, रामकृष्ण दूबे</h6>



<h6 class="wp-block-heading">, पवन अग्रहरि, सत्येन्द्र मिश्र, अंकित शुक्ल, आनन्द यादव, सर्वेश शुक्ल, विकास वर्मा, अनुराग पाण्डेय आदि शामिल रहे।</h6>



<p class="wp-block-paragraph"></p>
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		<title>सबके लिए प्रार्थना करते हुए हम 2021 में प्रवेश कर चुके</title>
		<link>https://soochanasansar.in/praying-for-all-we-have-entered-2021/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 04 Jan 2021 10:08:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[संपादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>र्वे भवन्तु सुखिन:किरण चोपड़ाहैं। 2020 कभी न भूलने वाला मनहूस साल होगा, जिसमें बहुत लोगों ने अपनों को खोया। यह नुक्सान विश्व स्तर पर था। बहुत से लोगों के व्यापार बंद हुए, नौकरियां गईं, सेहत गई, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा। कुल मिलाकर सब कुछ ठहर गया। डर और सहम का वातावरण?था। सबके अन्दर &#8230;</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p class="wp-block-paragraph">र्वे भवन्तु सुखिन:किरण चोपड़ाहैं। 2020 कभी न भूलने वाला मनहूस साल होगा, जिसमें बहुत लोगों ने अपनों को खोया। यह नुक्सान विश्व स्तर पर था।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> बहुत से लोगों के व्यापार बंद हुए, नौकरियां गईं, सेहत गई, बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ा। कुल मिलाकर सब कुछ ठहर गया। डर और सहम का वातावरण?था। सबके अन्दर यही डर था कि न जाने किस समय क्या हो जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>हम सभी भारतवासी सर्वे भवन्तु सुखिन: पर विश्वास रखकर चलते हैं। यही नहीं सरकार यानी हमारे पीएम नरेन्द्र मोदी जी समय-समय पर जनता के साथ जुड़े रहे, उन्हें डर से मुक्त करने के लिए कहीं दीपक जलवाए</p>



<p class="wp-block-paragraph">, कहीं थालियां बजवाईं, कहीं राम मंदिर का शिलान्यास करते हुए सबकी धर्म में आस्था पैदा की। यही नहीं सरकार ने हर बिजनेसमैन को मुश्किलों से निकालने के लिए?</p>



<p class="wp-block-paragraph">कई जगह सिर पर हाथ रखा। कहीं पर साथ दिया, कभी सभी स्ट्रेच्युरी पेमैंट पर जीएसटी, इन्कम?टैक्स, प्रॉविडेंट फंड, कहीं डेट बढ़ाकर, कहीं रियायतें देकर हर सम्भव मदद की, परन्तु एक तो संकट?इतना बड़ा था </p>



<p class="wp-block-paragraph">और विश्व स्तर पर लोगों को कोरोना के कारण नुक्सान भी बहुत बड़ा था, जानमाल की हानि थी। कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से तो?खुश हो ही नहीं सकता।</p>



<p class="wp-block-paragraph">  अगर एक मां के कई?बच्चे हों तो वह भी सारे बच्चों को खुश नहीं रख सकती। यह तो एक पीएम हैं, जिनसे अनेक भाषाओं, धर्म, जाति और राज्यों के लोग जुड़े हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> कहीं न कहीं लोगों की सरकार, ईश्वर, पीएम, सीएम से नाराजगी रहती है। 2021 की शुरूआत कोरोना वैक्सीन के टीकाकरण के ड्राई रन से हुई।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> नए साल में देश में टीकाकरण भी शुरू हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"><br>कोरोना की मार से विश्वभर की अर्थव्यवस्था कराह रही है लेकिन भारत के पीएम की सूझबूझ से इस समस्या से भी निपटा जा रहा है क्योंकि वह जमीन से जुड़े हैं और लोगों की समस्याओं को समझते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> यही नहीं दिल्ली के सीएम भी जमीन से जुड़े हैं और इन सबके बीच भारतीय रिजर्व बैंक इस दौरान बहुत ही मददगार रहा, आम लोगों के साथ व्यापार, उद्योगों को कई तरह से राहत देकर इन आर्थिक चुनौतियों से निपटा जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> इसका थोड़ा सा सुखद अनुभव इसलिए महसूस हो रहा है क्योंकि  हमारी अर्थव्यवस्था पहले की तरह पटरी पर लौटने  का भरसक प्रयत्न कर रही है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> लोगों की जिंदगी भी नार्मल होती जा रही है। उम्मीद है 2021 लोगों के लिए राहत और मजबूती लेकर आया है।<br></p>



<p class="wp-block-paragraph">परन्तु अभी भी हमें बहुत सतर्कता की जरूरत है। कोरोना का नया स्ट्रेन भी आ गया है। हम सभी को अपने लाइफ स्टाइल में बदलाव स्थाई रूप से लाना होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> मास्क, दो गज की दूरी बहुत  है जरूरी। असल में कोरोना ने कई दिखावोंं जो शादियों, फंक्शन पर होते थे, रोक लगा दी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> कई चीजें जो अनावश्यक थी उन पर भी अपने आप ही रोक लग गई। अभी छात्र और उनके माता-पिता कई समस्याओं से जूझ रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> उम्मीद है उन्हें भी इस साल के मध्य तक राहत मिलेगी।<br>नए साल पर लोग नए ढंग से और नए संकल्प के साथ काम करते हैं, हम भी इस मामले में आप से अलग नहीं हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> पिछले साल की तड़प और मानवीय क्षति को देखते हुए साल की शुरूआत हमारे यहां पारम्परिक रूप से हवन के साथ हुई है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">मैं पहले ही स्पष्ट कर चुकी हूं कि प्रार्थना सबके लिए की गई अर्थात सर्वे भवन्तु सुखिन: यानी कि सब लोग सुख में रहें लेकिन इसके साथ ही नए वर्ष पर हमारे सामने कई चुनौतियां हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> हालांकि उम्मीदों के रास्ते खुले ह तो हमें इन दोनों पर ही साथ-साथ आगे बढऩा है। कोरोना खत्म होगा, स्कूल-कालेज खुलेंगे, बाजार खुल चुके हैं</p>



<p class="wp-block-paragraph">, किसान आंदोलन खत्म होगा और ये लोग अपने घरों को लौटेंगे तथा खेत-खलिहान में पहले की तरह जुट जाएंगे। इसके अलावा जो फैक्ट्रियां, कारखाने और उद्योग-धंधे बंद हो गए थे, वे फिर से खुल जाएंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> जो मजदूर दिल्ली से लौट कर बिहार या पूर्वी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश लौट गए उनकी वापसी होगी, बेरोजगारी दूर होगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> ऐसी कई चुनौतियां हैं जिनका सामना करते हुए हम जीवन सामान्य रूप से जीने की पटरी पर आ जाएंगे। खुशी इस बात की है कि वर्ष 2021 के आरम्भ में ही हम ऐसी उम्मीद कर रहे हैं और जब उम्मीद की किरण रोशन होती है तो सब कुछ सही होता है। </p>



<p class="wp-block-paragraph">कितने ही गीतकारों ने इतनी अच्छी-अच्छी बातें कहीं हैं, जिन्हें जीवन में उतार कर आगे बढऩा है। कन्हैया ने कहां जन्म लिया, कहां किसने पाला, कितनी मुसीबतों का सामना किया, कितने राक्षसों को मारा और आखिरकार धर्म युद्ध हुआ जिसमें उन्हें विजय मिली।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, ब्रह्मा, विष्णु, महेश और मां जगदम्बा, महालक्ष्मी, महा सरस्वती और महाकाली के रूप में मानव जाति का कल्याण किया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph"> तो यह हमारी आस्था की कहानी है जो हमारे जीवन को आज भी अपने साथ चला रही है।<br>हमारे छात्र और कर्मचारी या फिर अन्य लोग आज भी कोरोना से प्रभावित हो रहे हैं परन्तु मेरा मानना है </p>



<p class="wp-block-paragraph">कि इस कोरोना काल में हमने चुनौतियों से लडऩा सीखा, सबकुछ साकारात्मक रहा, आनलाइन कक्षाएं छात्रों ने सीखीं तो शिक्षकों ने भी खुद को अपडेट किया। नई-नई तकनीक मोबाइल ने सिखला दी और सबका सिस्टम आनलाइन हुआ। फिर भी मुश्किलें </p>



<p class="wp-block-paragraph">आईं, मेरा मानना है कि मुश्किलों में ही आदमी और निखरता है। पिछले वर्ष ही हमने अश्विनी जी को खोया था लेकिन वो कहा करते थे</p>



<p class="wp-block-paragraph"> कि मुश्किलों से घबराना नहीं। उनकी बात हम स्वीकार करते हैं और पालन कर रहे हैं। इसीलिए मुश्किलों पर हम विजय पा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> कई और क्षेत्र हैं जहां हर किसी के लिए मुश्किलों भरा<br>समय आता है, वह भगवान पर भी आया है परन्तु हम मुश्किलों से लड़ते हैं तभी जीतते हैं, इसे ही जीवन का उतार-चढ़ाव कहा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">  हम लोग अपने काम में डटे रहें, मेहनत करते रहें और सबके भले की भावना के साथ आगे बढ़ते चलें तो सब कुछ सामान्य होगा यह तय है।</p>



<p class="wp-block-paragraph"> इसलिए वर्ष 2021 के बारे में<br>हम यही कहेगें कि यह वर्ष 20 से 21 ही साबित होगा क्योंकि हम उम्मीदों के साथ चल रहे हैं। एक बार फिर से हर किसी को हैप्पी, हैल्दी, वैल्दी न्यू ईयर।</p>
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