बाढ़ आपदा मे किसानों को फौरी राहत,लेकिन बाँदा 200 तो चित्रकूट मे 1500 हेक्टेयर फसलें नष्ट…

@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा।

  • चित्रकूट मंडल के हर ज़िले का आपदा विभाग और राजस्व (लेखपाल सर्वे)/कृषि विभाग सर्वेक्षण कर रहा है।
  • मंडल मे प्रशासन स्तर पर लेखपाल गांव-गांव पीड़ितों को साथ मे फ़ोटो लेने के बाद सरकार की तरफ से आपदा राहत सामग्री दे रहें है।
  • भगवा रंग पर आपदा राहत सामग्री पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व प्रधानमंत्री मोदी जी की तस्वीर है।
  • चित्रकूट मंडल मे ज़िला हमीरपुर सर्वाधिक बाढ़ प्रभावित हुआ है। यमुना,केन और चन्द्रावल नदियों के बरसाती पानी ने गंवई जनता का भारी नुकसान किया है।
  • बाँदा मे लगभग 30 गांव तो चित्रकूट मे करीब 20 से 25 गांव बाढ़ से जलमग्न हुए है।
  • बाँदा मे किसानों को सरकारी सर्वे मुताबिक 200 हेक्टेयर मे लगभग 60 करोड़ के आसपास घाटा हुआ है।
  • चित्रकूट मे लेखपाल, राजस्व टीम व कृषि विभाग 1500 हेक्टेयर फसलों को चपत का आंकड़ा दे रहा है।
  • सरकारी सर्वेक्षण से इतर ग्रामीण इलाकों मे भारी नुकसान हुआ है। समाजवादी नेताओं ने भी मदद दी है।
  • चित्रकूट मंडल मे भादौ माह की फसलें जैसे मूंग, तिली, उड़द,अरहर,ज्वार को क्षति हुई है। वहीं आगामी सर्दी की फसलें भी अब लेट होंगी।
  • सत्तारूढ़ बीजेपी के नेताओं की तस्वीर छपी बोरी देखकर सपा ने भी अखिलेश यादव की फोटो वाला झोला उतार दिया है।

बाँदा। चित्रकूट मंडल के खाशकर तीन ज़िले क्रमशः बाँदा, हमीरपुर और चित्रकूट मे बाढ़ ने बड़ा नुकसान किया है। यह तीनों ज़िले बुंदेलखंड की केन, यमुना-बेतवा और मंदाकिनी नदियों के किनारे बसे है। सर्वाधिक दैवीय आपदा हमीरपुर मे हुई है। यहां यमुना, बेतवा और केन, चन्द्रावल सब आपस मे मिलती है जिससे बाढ़ का स्वरूप ज्यादा विस्तार लेता है। वहीं बाँदा के थाना चिल्ला मे फतेहपुर की सरहद केन और यमुना का संगम है। बाँदा के थाना पैलानी, जसपुरा में किसानों को केन और चन्द्रावल नदियों ने बाढ़ प्रभावित किया है।

बतलाते चले कि चन्द्रावल नदी केन के सहायक नदी है। इससे दो और बरसाती नदी उर्मिल व धसान महोबा मे मिलती है। मंडल मे महोबा की मिट्टी लाल व दोमट है जिससे बरसाती पानी का जलभराव कम होता है। वहीं बाँदा, हमीरपुर और चित्रकूट मे काली/ मरवा मिट्टी होने से पानी देर तक भरा रहता है। उत्तरप्रदेश शासन ने अपने स्तर से इस बाढ़ से प्रभावित किसानों को फौरी मदद दी है। वहीं समाजसेवियों और विपक्षी नेताओं मे सपा ने गांवों मे सहायता की है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर भी विपक्षी नेताओं मसलन समाजवादी पार्टी के जनप्रतिनिधियों का बाढ़ से हलकान गांवो मे जाकर किसानों और जनता की मदद करना स्वाभाविक है। वहीं सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री मोदी जी की तस्वीरों से सजी आपदा राहत बोरी मे सामग्री वितरण की है। अच्छा ये है कि बाढ़ की मार के बीच यदि राजनीति से मुसीबत के मारों का कुछ भला होता है तो यह अच्छी बात है।


गौरतलब है बाँदा प्रशासन ने लेखपालों के द्वारा बाढ़ से जलमग्न गांवो मे आपदा राहत सामग्री पहुंचाई है। वहीं गाहेबगाहे जिलाधिकारी, एसपी साहब और अन्य क्षेत्रीय अधिकारी भी गांवो का भ्रमण करके किसानों की आर्थिक क्षतिपूर्ति का आंकलन कर रहें है।


बाँदा के इन गांवों तक पहुंचा प्रशासन-

बाँदा शहर मे केन नदी पर बसपा सरकार मे तटबंध बन जाने से शहरी मुहल्लें बाढ़ से बचे रहते है। वहीं तहसील पैलानी, थाना जसपुरा और बबेरू क्षेत्र मे बाढ़ से पीड़ित परिवारों को आपदा राहत सामग्री की सरकारी मदद भरी बोरियां दी जा रहीं है। प्रशासन से मिली जानकारी मुताबिक तहसील पैलानी के ग्राम शकंर पुरवा, तारा(चिल्ला), लौमर, नान्दादेव, तगड़ा डेरा, अमचौली, महबरा,गुरगवा, पण्डवन डेरा, सिन्धन खुर्द, बरेहटा,अमारा,मथुरापुरी, इतराजपुरी, मरोहला डेरा,साबादा,खजुरी,खपटिहा खुर्द आदि नदी क्षेत्र से लगे गांवों मे अरहर, मूंग, तिली की फसलों का नुकसान हुआ है। यहां प्रशासन सर्वेक्षण करके मदद कर रहा है। ज़िला बाँदा के तहसील बबेरू मे भी बाढ़ से ठीकठाक नुकसान हुआ है। यहां प्रशासन ने ग्राम जलालपुर, औगासी, मरका, चरका,अरवारी, औदहा, मुड़वारा, मतेहना, खेरा, राघोपुर, वीरा, इटर्रा, जोरावर सहित अन्य गांव पहुंचकर मदद दी है। व राजनीतिक नेताओं मे सपा ने राशन वितरण किया है। एक अनुमान के मुताबिक तकरीबन 300 के आसपास कच्चे व अधबने मकानों को क्षति पहुंची है। जिनके घरों का बड़ा नुकसान हुआ है उन्हें प्रशासन द्वारा सीएम या ग्रामीण पीएम आवास दिलाने का आश्वासन दिया गया है।

चित्रकूट मे बाढ़ से तबाह हुआ किसान-

मंडल के चित्रकूट मे राजापुर तहसील के सरधुआ, अर्की मोड़,उन्नायबन्ना,गंनीवा, देहरुचमाफी, गड़वारा, कंधवनिया, पनौटी, सगवारा, कलवलिया, बिहरावां, नैनी, देववारी,हस्ता, बकटाखुर्द, अतरौली,धुमाई,सुरकी,बिलास गांवों मे बाढ़ ने यमुना व मंदाकिनी के पानी से नुकसान किया है। वहीं चित्रकूट के ही मानिकपुर विकासखंड के ओहन बांध डूब क्षेत्र से लगे अति दूरस्थ व आदिवासियों के गांवो मे बाढ़ ने संपर्क मार्ग खराब किये व किसानों को तोड़ने का काम किया है। उल्लेखनीय है कि यहां भी स्थानीय समाजसेवी व प्रशासनिक स्तर से आपदा राहत सामग्री दी जा रही है। वहीं समाजवादी पार्टी के नेताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी बीजेपी के माननीयों व फोटोशूट कराकर मदद देने के आरोप लगाये है। साथ ही आपदा राहत बोरी पर “प्रधानमंत्री मोदी जी व मुख्यमंत्री योगी जी” की फ़ोटो पर तर्क भी किये है यदि वे कि मददगार है तो राजनीति क्यों !!? मजेदार बात है कि समाजवादी पार्टी ने भी देखादेखी पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चेहरे वाले झोलों मे राशन सामग्री देना शुरू कर दिया है। अर्थात आपदा मे सियासत से चूकना कोई नही चाहता है। चित्रकूट मे आंकलन अनुसार यहां 32 गाँव बाढ़ से प्रभावित हुए है।

मानव जनित आपदा से पीड़ित बुंदेलखंड-

चित्रकूट मंडल / बुंदेलखंड के संदर्भ मे यहां यह भी बतलाना आवश्यक है कि वर्ष 2005 के बाद चित्रकूट मंडल मे इस तर्ज पर बाढ़ आई है। जिसका बड़ा कारण नदियों का उत्खनन से बढ़ता जा रहा डूब क्षेत्र है। वहीं नदियों के किनारे जंगलों के कटने से भी नदी का कछार बढ़ रहा है। हर साल अक्टूबर से जून माह तक चित्रकूट मंडल के हमीरपुर, बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन की नदियों मे प्राकृतिक संसाधनों का अति दोहन करते हुए बड़े पैमाने पर लाल मौरम-बालू का बेखौफ खनन सफेदपोश नेताओं, बाहरी माइनिंग कंपनियों और माफियाओं की सरपरस्ती मे होता है। उसके सापेक्ष प्रशासन की कार्यवाही नगण्य रहती है। वहीं वनविभाग का वार्षिक कागजी पौधरोपण और ग्रेनाइट पत्थरों के खनन से भी उपजाऊ खेती परती व बंजर हो रही है।

जिससे जलस्तर नीचे जा रहें है। बुंदेलखंड का इलाका सुखाड़, कमवर्षा या अति वर्षा जैसी आपदाओं का शिकार बन रहा है। बुंदेलखंड की नदियों पर बनते बड़े बांधों ने भी प्राकृतिक रूप से जुड़ी नदियों के चैनलों को नुकसान पहुंचाने का काम किया है। वहीं भूमि संरक्षण और सिंचाई विभाग की बन्धियों मे बड़े स्तर पर वित्तीय घोटालेबाजी है। ग्रामपंचायत स्तर पर बने तालाबों व चंदेलों की जल संरक्षण व्यवस्था को सरकारी योजनाओं से बजट गर्क करने तक सीमित कर दिया गया है। मसलन अमृत सरोवर तालाब व मनरेगा से निर्मित तालाबों का व्यापक भ्रस्टाचार इसकी नजीर है। सत्तारूढ़ पार्टी ने सामाजिक कार्यकर्ताओं पर नकेल डालकर उन्हें ब्यूरोक्रेसी का गुलाम बनाने का सुनियोजित कार्यक्रम चलाया है।


बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों मे लेखपाल के माध्यम से मदद देने के बाद फोटोशूट पर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि गांवो मे लेखपाल गड़बड़ी करते है। ग्राम प्रधान व सचिव मुंह देखकर मदद न दे इसके लिए लाभार्थियों की तस्वीरों को लेखपालों द्वारा एकत्र किया जाता है। ताकि जिन गांवो मे मदद जा रही है। वहां की रिपोर्ट शासन,सरकार को डेटा सहित दी जा सके।

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