ज्वाला देवी इंटर कालेज में मातष् शक्ति हुआ का आह्वान


प्रयागराज। बालकों के सर्वागीण विकास को गति प्रदान करने की दष्ष्टि से उनकी प्रथम गुरू मातष् शक्ति के साथ सार्थक संवाद की योजना के अन्तर्गत आज बुधवार को दोपहर 12ः00 बजे विद्यालय के विशाल सभागार में संकुल स्तरीय मातष् गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। तत्पश्चात विद्यालय के प्रधानाचार्य युगल किशोर मिश्र ने अतिथिओं का परिचय कराते हुये उनका सम्मान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में प्रो.मंजू तिवारी (मनोविज्ञान विभाग, ईसीसी) कार्यक्रम मंे अध्यक्ष के रुप में काशी प्रान्त का प्रान्त संगठन मंत्री डा.राम मनोहर तथा कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रुप में काशी प्रान्त के प्रदेश निरीक्षक रामजी सिंह, सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या मीना तथा सम्भाग निरीक्षक दयाराम उपस्थित रहें। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि ने अपने उद्बोधन में कहा कि कहा जाता है कि बालक की शिक्षा का शुभारम्भ जन्म के बाद माॅ के द्वारा ही होता हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में माॅ एक अनमोल इंसान के रुप में होती हैं जिसके बारे में शब्दों में बयाॅ नहीं किया जा सकता। ऐसा कहा जाता हैं कि भगवान हर किसी के साथ नही रह सकता इसलिए उसने माॅ को बनाया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे प्रान्त संगठन मंत्री ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि आज इस मातष् गोष्ठी कार्यक्रम के द्वारा श्रीराम मन्दिर निर्माण निधि संग्रह अभियान हेतु मातष् शक्ति का आह्वाहन किया गया है जिससे आप सब मातष् शक्तियों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगांे को इस जनजागरण अभियान हेतु जागष्त किया जा सके।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने कहा कि बालक सच्चरित्रवान, राष्ट्रभक्त, स्वावलम्बी, सदाचारी, परिश्रमी एवं विनम्रशील तभी हो सकता हैं जब उसके ऊपर इन समस्त गुणों से युक्त माॅ एवं गुरुजन की प्रतिछाया बनी रहें। आज हम इन समस्त गुणों का विकास बालक के अन्दर कैसे हो इसकें लियें हम सब माताओं और गुरुजनों को कदम से कदम मिलाकर चलना होगा। यह संकुल स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन संकुल प्रमुख युगल किशोर मिश्र एवं सह संकुल प्रमुख सुमन्त पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन में हुआ।
कार्यक्रम में दीपक यादव, पवन दीक्षित, सन्तोष पाण्डेय, डा. राकेश सिंह, सरोज दुबे, सन्दीप गुप्ता, अरिमर्दन सिंह, हरेकष्ष्ण त्रिपाठी, अजीत सिंह, शत्रुघ्न सिंह, रत्नेश चतुर्वेदी, सुनील ओझा एवं अन्य आचार्य बन्धु उपस्थित रहें।

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