@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा।
केस से जुड़ी 26 मार्च की खबर पढ़ने को लिंक क्लिक करें…
- बाँदा शहर के तीन कारोबारी युवकों क्रमशः आशीष अग्रवाल , स्वतंत्र साहू और लोकेंद्र सिंह चन्देल पर गत 6 माह से दुष्कर्म, ब्लैकमेल करने और नशा कराकर नृत्य कराने का एफआईआर मे आरोप लगाने वाली तीनों युवतियों ने बीते 26 मार्च को महिला जिला अस्पताल मे मेडिकल परीक्षण कराने से मना कर दिया।
- तीन दिन से चर्चा मे चल रहा मुकदमा अपराध संख्या 0275/2025 नगर कोतवाली बाँदा मीडिया बम की तर्ज पर फूट पड़ा है।
- नाम न लिखने की शर्त पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि एक माननीय ने रकम के तीन पार्ट तय कराए जिससे केस मे समझौता की मध्यस्थता की नींव पड़ी। रकम के दो पार्ट भुगतान एफआईआर के मास्टरमाइंड तक पहुंचे लेकिन तीसरा पार्ट कोर्ट मे बयान पक्ष होने के बाद देने की शर्त रखी गई जिसमे बात बिगड़ गई। मास्टरमाइंड पर विश्वास न करना आरोपियों की आफत बन गया। सूत्रानुसार तीन अभियुक्तों को लड़कियां सप्लाई करने वाले नवीन विश्वकर्मा ने हाल ही मे 40 लाख कमाए है। अधिवक्ता सूत्र का नाम खोलना उसका जीवन खतरे मे डालना होगा।
- नगर कोतवाली मे दर्ज मुकदमे के एक आरोपी का परिचय वाला माननीय के रामदरबार तक पहुंच रखता है। मास्टरमाइंड ने पूरा खेल रचा है, आरोपियों की रईसजादी उनकी बदकिस्मती है।
- मास्टरमाइंड की डिमांड बढ़ती गई मामला बिगड़ता गया, फिलहाल पुलिस ने आरोपियों की यथाशक्ति यथाशीघ्र गिरफ्तारी करने का दावा किया है।
बाँदा। शहर बाँदा के चर्चित दुष्कर्म कांड पर तीन दिन से खबरों का दौर चल रहा है। हर पत्रकार अपने सूत्रधार लगाकर प्रकरण मे नया ट्विस्ट खोजने का प्रयास कर रहा है। उधर आरोपियों ने मीडिया से दूरी बना रखी है। वहीं कथित पीड़िताओं ने कुछ बोलने से कन्नी काट रखी है। मामले की जांच सीओ सिटी राजीव प्रताप सिंह कर रहें है। एक दलित और दो मुस्लिम युवतियों ने तीन धनाढ्य युवाओं पर नौकरी देने के बहाने दुष्कर्म के आरोप लगाए है। पीड़िता एफआईआर मे लिखती है उन्हें नशे की हालत मे नग्न नचाया जाता था फिर दुष्कर्म होता था। यह सबकुछ छह माह से चल रहा था। शहर का एक होटल इसका अड्डा था।

जिनके माध्यम से तीन लड़कियों की मुलाकात इन तीन शहरी कारोबारी युवाओं से हुई उसका नाम नवीन विश्वकर्मा। लड़कियां दावा करती है उन्होंने नवीन को भी घटनाक्रम की जानकारी दी लेकिन वह शोषण कर्ताओं का साथ देता रहा। असल मे लड़कियां सप्लायर / दलाल नवीन विश्वकर्मा ही है। युवतियां कहती है हिम्मत बांधकर उन्होंने न्याय पाने के लिए सामने आने का साहस जुटाया है। एफआईआर हुए लगभग तीन दिन से ज्यादा हो रहे है। प्रथम दृष्टया पुलिस थाने मे 161 का बयान महिला पुलिसकर्मी की उपस्थिति मे लेती है जिसकी वीडियोग्राफी होती है। वहीं मेडिकल परीक्षण होता है और फिर 164 का कलमबंद बयान न्यायालय मे होता है।
तीनों युवतियों ने मेडिकल कराने से किया इंकार-
इस चर्चित केस का पहला ट्विस्ट / रहस्यमय मोड़ तब आया जब तीनो युवतियों ने बीते 26 मार्च को महिला ज़िला अस्पताल मे मेडिकल कराने से मना कर दिया। डाक्टर ने इनसे लिखित लिया। वहीं पुलिस ने 164 के बयान कोर्ट मे कराए है।

गौरतलब है 164 के बयान पीड़िता अधिकांशतः महिला जज के सामने देती है। यह लिफाफे मे सीलबन्द होता है। आईओ को बयान सिर्फ पढ़ने की इजाजत है इसकी तस्वीर या छायाप्रति भी नही ले सकते हैं। बतलाते चले कि वर्ष 2018 के बाद से 164 के बयान की नकलकापी मिलना बंद हो चुकी है। अलबत्ता आईओ बयान पढ़कर ही धारा 161 के थाने वाले बयान, 164 के कोर्ट बयान व तहरीर और उपलब्ध साक्ष्यों,नेचर आफ केस, पीड़िता के समर्थन मे गवाही और घटनास्थल की पड़ताल पर केस की विवेचना को जांच के अंतिम पायदान तक ले जाता है। मेडिकल परीक्षण से इंकार करना ही मामले मे पेंच पैदा करता है। यह किस मंशा से हुआ यह तो एफआईआर कर्ता, मास्टरमाइंड और प्रकरण के इर्दगिर्द घूमते लोग ही बतला सकते है। लेकिन कचहरी से कानूनी विशेषज्ञ तक यह केस शहरी सुर्खियों का केंद्र है। फिलहाल पुलिस मीडिया रिपोर्ट दबाव मे आरोपियों की यथाशीघ्र गिरफ्तारी की बात कह रही है। सूत्र बतलाते है आरोपी फरार है, हाईकोर्ट मे अधिवक्ता हड़ताल पर है इसलिए सोमवार तक कोई काम नही होगा। शनिवार और रविवार उच्चन्यायालय बन्द रहता है। किंतु यदि आरोपियों की गिरफ्तारी होती है तो पुलिस चार्जशीट फ़ाइल करेगी। केस डायरी की धारा कम या ज्यादा हो सकती है लेकिन ट्रायल केस मे युवतियों का मेडिकल न कराना, लगातार 6 माह तक चुप रहना और डिजीटल साक्ष्य वीडियो आदि किसने कब किस प्रयोजन से बनाये यह भी जिरह का हिस्सा बनेगा। युवतियों ने घटनास्थल एक होटल बताया है। धनाढ्य युवाओं की रंगीनमिजाजी से सूचना संसार इंकार नही करता है।