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CM योगी “विभाजन की त्रासदी से सबक लेकर मजबूत भारत के निर्माण का संकल्प लें”

मुख्यमंत्री योगी ने इसका कारण आपसी अंतर्विरोधों को बताते हुए कहा कि क्षेत्र, भाषा और दूसरे आधारों पर समाज में पैदा हुए विभाजन के साथ षड्यंत्रकारी ताकतों को अवसर मिला। जब किसी समाज को यह लगता है कि हमला किसी दूसरे वर्ग, क्षेत्र या समुदाय पर हो रहा है तो वह अपने स्तर पर प्रतिरोध नहीं करता। यही कमजोरी देश के लिए नुकसानदायक साबित हुई।

विजय कुमार निगम लखनऊ:- विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1947 में देश के विभाजन की त्रासदी को मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताया। आज पूरा देश उस भीषण त्रासदी की स्मृतियों से जुड़ रहा है, जब करोड़ों हिंदुओं को अपनी ही मातृभूमि और जन्मभूमि से विस्थापित होना पड़ा तथा बड़ी संख्या में हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन समाज के लोगों को हिंसा और कत्लेआम का सामना करना पड़ा। उस समय पीड़ितों की पीड़ा सुनने और उनके प्रति संवेदना व्यक्त करने वाला कोई नहीं था। सत्ता प्राप्ति की लिप्सा में एक सनातन राष्ट्र को विभाजन की ओर धकेलकर उसके टुकड़े कर दिए गए।

 मुख्यमंत्री योगी शुक्रवार को लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस समारोह कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान सीएम ने इससे संबंधित कई पेंटिंग का भी अवलोकन किया।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है। इतिहास को केवल पन्ने पलटने या परीक्षा के पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं किया जा सकता। इतिहास हमें गौरवशाली अतीत पर गर्व करने के साथ-साथ अतीत की गलतियों से सीख लेकर उन्हें दोबारा न दोहराने की प्रेरणा देता है। यह समझना जरूरी है कि विभाजन की परिस्थितियां क्यों पैदा हुईं, इसके लिए कौन जिम्मेदार था, दोषियों को कितनी सजा मिली और आखिर कब तक देश को उस त्रासदी की कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के पीछे भी यही भावना है कि वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराया जाए। पूरे प्रदेश के नागरिकों को चाहिए कि वे अपने वर्तमान और आने वाली पीढ़ी को बताएं कि विभाजन की त्रासदी क्या थी और उससे हमें क्या सीख मिलती है।

         मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि 1947 में भारत को स्वतंत्रता मिली, लेकिन इसके साथ ही देश का विभाजन भी हुआ। पंजाब और बंगाल के उन हिस्सों को भी पाकिस्तान को सौंप दिया गया, जहां बड़ी संख्या में ऐसे लोग रहते थे जो विभाजन के परिणामस्वरूप प्रभावित हुए। विभाजन के दौरान लाखों लोग अपने घर-बार छोड़कर शरणार्थी बनने को मजबूर हुए। उस समय हुए नरसंहार और विस्थापन की पीड़ा को आज की पीढ़ी के सामने लाना जरूरी है। प्रदर्शनी में प्रदर्शित तस्वीरों और वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि इनमें उस समय की भयावह परिस्थितियों की झलक मिलती है। इसलिए लोगों को यह देखना चाहिए कि किस तरह परिवार अपने घरों से निकलने को मजबूर हुए और किस तरह लोगों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी झेली।

  मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में अकेले लाखों लोगों की जान गई। विभाजन के दौरान ट्रेनों में हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं आज भी उस त्रासदी की भयावहता को सामने लाती हैं। यह इतिहास मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ी को सबक देने के लिए है। विभाजन की कीमत निर्दोष नागरिकों ने चुकाई और उसका प्रभाव लंबे समय तक देश को झेलना पड़ा। आतंकवाद, नक्सलवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों को भी अतीत की परिस्थितियों और देश के भीतर पैदा हुए विभाजनकारी तत्वों के संदर्भ में समझने की जरूरत है। भारत के पास कभी शक्ति, बुद्धि और वैभव की कमी नहीं रही। लगभग 16वीं-17वीं शताब्दी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में विश्व अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी करीब 24-25 प्रतिशत तक बताई जाती है। भारत वैभवशाली और संपन्न था, इसलिए विदेशी आक्रांताओं की नजर भारत पर थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब देश में न शक्ति की कमी थी, न बुद्धि की और न ही वैभव की, तब सवाल उठता है कि देश गुलाम क्यों हुआ।

भारत को कमजोर करने में आंतरिक विभाजन ने बड़ी भूमिका निभाई। सनातन काल से एक भारत के रूप में मौजूद देश समय के साथ अलग-अलग हिस्सों में बंटता गया। स्वतंत्रता संग्राम के अनेक सेनानियों का जिक्र करते हुए कहा कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, राजगुरु, राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई और वीर सावरकर समेत अनेक महापुरुषों ने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया। जिन क्रांतिकारियों ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया, उनके योगदान को याद रखना जरूरी है।

              मुख्यमंत्री ने राजनीतिक स्वार्थ और परिवारवाद को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। देश की अनेक संस्थाओं और योजनाओं का नामकरण एक परिवार विशेष से जोड़ दिया गया, जबकि स्वतंत्रता संग्राम में बलिदान देने वाले असंख्य क्रांतिकारियों के योगदान को अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। समाज में जाति, क्षेत्र, भाषा और अन्य पहचानें अपनी जगह हो सकती हैं, लेकिन सबसे बड़ी पहचान भारतीय होने की होनी चाहिए। पंजाबी, बंगाली, मराठी, तमिल, कन्नड़ या मलयाली होना व्यक्तिगत और सामाजिक पहचान हो सकती है, लेकिन प्रत्येक नागरिक को भारतीय होने पर गौरव की अनुभूति होनी चाहिए। समाज में विभाजन की भावना उन ताकतों को मजबूत करती है जो भारत को कमजोर करना चाहती हैं। नागरिकों को यह भी समझना होगा कि देश की सुरक्षा केवल सरकार या सेना की जिम्मेदारी नहीं है। सीमा पर जवान देश की रक्षा करते हैं, तभी नागरिक चैन की नींद सो पाते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक का भी दायित्व है कि वह राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने में अपना योगदान दे।

                   मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का जिक्र करते हुए कहा कि इस कानून के प्रावधानों को लेकर विपक्ष द्वारा देश में भ्रम फैलाया गया। कानून में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को नागरिकता देने का प्रावधान है। इसमें किसी की जमीन या संपत्ति छीनने का कोई प्रावधान नहीं था। इसके बावजूद कानून के विरोध में देश के कई हिस्सों में आंदोलन और हिंसा की कोशिशें हुईं। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, मेरठ, संभल, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर समेत कई स्थानों का उल्लेख किया। प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत होने के कारण स्थिति को नियंत्रण से बाहर नहीं जाने दिया गया।

              मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व सपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि नागरिकता कानून के विरोध के पीछे राजनीतिक स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति काम कर रही थी। यदि किसी विस्थापित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन या पारसी को भारत सरकार नागरिकता देकर बसाना चाहती है तो किसी को इससे परेशानी क्यों होनी चाहिए। बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि वहां हुई घटनाओं पर भी राजनीतिक दलों को अपनी प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी। सीएम ने आरोप लगाया कि कुछ दल वोट बैंक की राजनीति के कारण ऐसे मामलों पर बोलने से बचते हैं। विभाजन के बाद विस्थापित परिवारों के पुनर्वास का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विभाजन की त्रासदी के दशकों बाद भी कई परिवार नागरिकता और स्थायी पहचान के लिए संघर्ष करते रहे। उत्तर प्रदेश में ऐसे परिवारों के दस्तावेज दुरुस्त कराने और जमीन के कागजात उपलब्ध कराने की दिशा में काम किए।  

श्री योगी ने कहा कि पीलीभीत में बांग्लादेश से आए हजारों परिवारों के दस्तावेज दुरुस्त कर उन्हें जमीन से जुड़े कागजात उपलब्ध कराए गए। लखीमपुर खीरी में भी बांग्लादेश से आए पीड़ित हिंदू परिवारों को नागरिकता उपलब्ध कराई गई। करीब 16 हजार के आसपास लोगों को नागरिकता प्रदान की गई। वहीं रामपुर में पाकिस्तान से आए लोगों के दस्तावेज दुरुस्त करने और नागरिकता की प्रक्रिया चलने की बात भी कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के समय विस्थापित लोगों के पुनर्वास और उनकी संपत्ति के नुकसान की भरपाई के लिए गंभीर प्रयास होने चाहिए थे लेकिन पिछली सरकारों ने इस दिशा में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। 

            मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन की त्रासदी और इतिहास की अन्य घटनाएं केवल स्मरण करने के लिए नहीं हैं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों को समझने का माध्यम हैं। यदि भारत विरोधी ताकतें सोशल मीडिया और दूसरे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर समाज में अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रही हैं तो नागरिकों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे सही तथ्यों को सामने रखें और समाज को जागरूक करें। आज भारत सुरक्षित है, एक भारत-श्रेष्ठ भारत की भावना के साथ आगे बढ़ रहा है और दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि देश की विकास यात्रा में आने वाली बाधाओं को दूर करने में अपना योगदान दे। क्योंकि मजबूत, सुरक्षित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की जिम्मेदारी प्रत्येक नागरिक की है।

          मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत भारत तभी बनेगा, जब समाज एक पहचान के साथ आगे बढ़ेगा। गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा खालसा पंथ की स्थापना और संत रामानंद की समतावादी परंपरा का उल्लेख करते हुए जाति-पाति और छुआछूत से ऊपर उठने का आह्वान करते हुए कहा कि जो भारत माता के प्रति समर्पित है, वह अपना है और समाज को इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। आत्मनिर्भरता को राष्ट्र निर्माण का आधार पर किसान, कारीगर, युवा, महिलाएं और गरीब सभी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ें। कोई भी समाज आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुए बिना लंबे समय तक अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित नहीं रख सकता। इसलिए सरकार अपनी योजनाओं के माध्यम से किसानों, युवाओं, महिलाओं और उद्यमियों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।

             मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आने वाले समय में भारत अपनी स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा। 2047 का विकसित भारत तभी बनेगा जब उत्तर प्रदेश विकसित होगा और उत्तर प्रदेश तभी विकसित होगा जब लखनऊ समेत प्रदेश के सभी क्षेत्र आत्मनिर्भर बनेंगे। विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब गरीब गरीबी से बाहर आएगा। मध्यम वर्ग और सामान्य नागरिक बेहतर जीवन जिए, हर कारीगर उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़े, किसान आत्मनिर्भर बने और हर परिवार अपने बच्चों को स्वावलंबन का मंत्र दे। विभाजन विभीषिका की स्मृति हमें अतीत की गलतियों को दोहराने से बचने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और आने वाली पीढ़ी को इतिहास से सीख देने का अवसर देती है। नागरिकों से एकजुट होकर मजबूत, सुरक्षित, समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।

               विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस पर राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी  के नेतृत्व में मौन यात्रा निकाली गई। सबसे पहले श्री योगी ने हजरतगंज स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। मौन यात्रा के जरिए देश की एकता का संदेश दिया गया। करीब आधे किमी की यात्रा के दौरान सीएम योगी के हाथ में ‘देश नहीं झुकने देंगे, फिर देश नहीं बंटने देंगे’ लिखा पोस्टर भी नजर आया। उनके साथ लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल समेत अन्य वरिष्ठ नेता भी कदमताल करते हुए लोकभवन तक पहुंचे। इस दौरान उनके हाथ में ‘राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता सर्वोपरि’, ‘विभाजन के कारण पलायन करने को मजबूर हुए लाखों लोग ट्रेनों से वापस आते समय सांप्रदायिक दंगों की भेंट चढ़ गए’ जैसे तमाम पोस्टर चर्चा का विषय बने।

          मुख्यमंत्री योगी ने विभाजन की त्रासदी को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उस समय कांग्रेस का दायित्व था कि सबसे पहले विस्थापितों को नागरिकता प्रदान कर जमीन के पट्टे उपलब्ध करवाती। जितनी उनकी प्रॉपर्टी वहां नष्ट या जब्त की गई थी, उतनी यहां उपलब्ध करवानी चाहिए थी। इसके बजाय कांग्रेस शत्रु संपत्ति की रक्षा और उसमें बंदरबांट करने में मशगूल रही। ये लोग उसी संपत्ति को लूट-खसोट का आधार बनाकर अपनी निजी प्रॉपर्टी बना रहे थे। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह संपत्ति पाकिस्तान से आने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन लोगों में बांटी जानी चाहिए थी। महमूदाबाद के नवाब की पूरी प्रॉपर्टी को बचाने के लिए कांग्रेसियों ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया। मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह ऐसे लोगों की पैरोकार बन रही है, जिन पर देश की आजादी के खिलाफ और विभाजन कराने में भूमिका होने के आरोप हैं।

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