
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी गो संरक्षण नीति ने उत्तर प्रदेश में गो सेवा के पारंपरिक स्वरूप को बदलते हुए इसे एक सफल उद्यमिता और स्वरोजगार मॉडल में बदल दिया है। प्रदेश में अब गौशालाएं केवल गोवंश के आश्रय स्थल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और करोड़ों के टर्नओवर वाले कारोबार का मुख्य आधार बन चुकी हैं। योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अब देश-विदेश में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर, पर्यावरण विशेषज्ञ, बड़े कारोबारी और सामाजिक संस्थाएं इस क्षेत्र में उतरकर नए आर्थिक आयाम स्थापित कर रहे हैं।
ग्लोबल हुआ यूपी का पंचगव्य: अमेरिका से दुबई तक भारी मांग
योगी सरकार द्वारा गोवंश संरक्षण को जैविक खेती, महिला सशक्तिकरण और स्वदेशी उत्पादों से जोड़ने का नतीजा अब धरातल पर दिखने लगा है। प्रदेश में बने A2 दूध, बिलौना घी, पंचगव्य औषधियों, जैविक खाद और हर्बल ब्यूटी प्रोडक्ट्स की मांग केवल देश में ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर बढ़ी है। आज उत्तर प्रदेश के गो-आधारित उत्पाद अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, दुबई और कई यूरोपीय देशों के बाजारों तक निर्यात हो रहे हैं, जिससे ग्रामीण युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है।
सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने छोड़ा विदेश, गाजियाबाद में खड़ा किया 10 करोड़ का कारोबार
सीएम योगी की प्रेरणा से गाजियाबाद में सॉफ्टवेयर इंजीनियर असीम रावत ने अपनी करीब 15 साल की कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर ‘हेता ऑर्गेनिक’ की शुरुआत की। आज उनकी संस्था वृद्ध व बेसहारा गोवंश की देखभाल के साथ-साथ देसी गायों के दूध से 150 से ज्यादा प्रकार के वैल्यू-एडेड उत्पाद बना रही है। A2 बिलौना घी, ब्राह्मी घृत, कुकीज, हर्बल टी और स्किन-हेयर केयर प्रोडक्ट्स के जरिए यह संस्था सालाना करीब 10 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर रही है, जो आधुनिक प्रबंधन और गो सेवा के समन्वय का बेहतरीन उदाहरण है।

वाराणसी का सुरभि शोध संस्थान: 28,000 गोवंश और 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार
वाराणसी में समाजसेवी सूर्यकांत जालान द्वारा संचालित ‘सुरभि शोध संस्थान’ गो सेवा और आजीविका का बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। लखनऊ, वाराणसी, मिर्जापुर और दिल्ली में फैली इनकी गौशालाओं में 28,000 से अधिक गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद व औषधियां तैयार कर संस्थान ने 1,000 से अधिक स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार दिया है। यह मॉडल साबित करता है कि सामाजिक जिम्मेदारी के साथ-साथ गो सेवा को बड़े पैमाने पर उत्पादन और रोजगार से जोड़ा जा सकता है।
पर्यावरण इंजीनियर ने बुलंदशहर में बनाया सफल मॉडल, गो सेवा आयोग का विशेष जोर
इसी तरह बुलंदशहर के पर्यावरण इंजीनियर पराग गौड़ ने 70 देसी गायों के साथ काम शुरू कर सवा करोड़ रुपये का सफल सालाना कारोबार खड़ा किया है। वे शुद्ध दूध, घी और विशेष च्यवनप्राश बनाकर स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, योगी सरकार उच्च उत्पादकता वाली देसी गायों की नस्ल सुधारने और उन्हें प्राकृतिक खेती से जोड़ने पर निरंतर जोर दे रही है, जिससे राज्य में गो आधारित उद्यमिता को एक नया मुकाम मिल रहा है।



