
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत से पश्चिम एशिया में शांति और सुरक्षा कायम करने के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल करने की अपील की है। ईरानी मीडिया एजेंसी तस्नीम न्यूज के मुताबकि पेजेश्कियान ने कहा कि भारत अपने संपर्कों का इस्तेमाल संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे से दूर करने तथा बातचीत और समझौते की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। साथ ही यह भी कहा कि ईरान ने कभी युद्ध का स्वागत नहीं किया। लगातार संघर्ष से न ईरान को फायदा है, न पूरे क्षेत्र को और न ही मानवता को। उन्होंने यह बात किर्गिस्तान में शंघाई सहयोग संगठन और शंघाई प्लस शिखर बैठकों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में कही।
भारत से पेजेश्कियान ने आखिर क्या मदद मांगी?
पेजेश्कियान ने भारत की क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिति को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारत के कई पक्षों के साथ संपर्क हैं और ईरान के साथ उसके पुराने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध भी हैं। इसलिए भारत इन संपर्कों का इस्तेमाल संबंधित पक्षों को युद्ध और खूनखराबे से दूर करने तथा बातचीत और समझौते की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए कर सकता है। उनका कहना था कि क्षेत्र और दुनिया के समझदार लोगों की प्राथमिकता शांति, सुरक्षा और स्थिरता होनी चाहिए।

क्या ईरान युद्ध से बचने के लिए बातचीत पर जोर दे रहा है?
- पेजेश्कियान ने कहा कि उनकी सरकार की शुरुआत से ही ईरान की नीति शांति और स्थिरता कायम करने तथा विवादों को बातचीत और वार्ता के जरिए सुलझाने की रही है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ने कूटनीतिक रास्ते के बजाय युद्ध, असुरक्षा और ताकत के जरिए अपनी इच्छा थोपने का रास्ता चुना।
- पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान अपने लोगों को खतरे और असुरक्षा से बचाना चाहता है और इसके लिए शांति तथा सुरक्षा का माहौल जरूरी है।
क्या पेजेश्कियान ने अमेरिका पर समझौते की शर्तें नहीं निभाने का आरोप लगाया?
पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान ने लंबित मुद्दों को सुलझाने के लिए हुए समझौतों के तहत अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी की हैं, लेकिन उनके मुताबिक अमेरिका ने अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कीं। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि तेहरान अभी भी समझौते और आपसी समझ की कोशिश जारी रखे हुए है। उन्होंने तर्क दिया कि तर्क और समझदारी यही कहती है कि युद्ध और युद्ध की राजनीति से बचना चाहिए। उनके मुताबिक कुछ समूह ऐसे हैं, जिन्हें संघर्ष जारी रहने में अपना हित दिखाई देता है।
क्या पीएम मोदी भी पेजेश्कियान की शांति वाली बात से सहमत दिखे?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेजेश्कियान से मुलाकात पर संतोष जताया और कहा कि मुश्किल दौर के दौरान भी भारत ने ईरान के साथ अपने संपर्क और सहयोग को बनाए रखने की कोशिश की।
पीएम मोदी ने पेजेश्कियान के शांति और सुरक्षा से जुड़े विचारों तथा उनके अनुभव का जिक्र करते हुए उन्हें शांति पसंद नेता बताया।
उन्होंने कहा कि पेजेश्कियान शांति कायम करने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं और उनकी कोशिशों से सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।
पीएम मोदी ने पेजेश्कियान की उस बात से भी सहमति जताई कि कुछ समूहों को युद्ध जारी रहने में अपना हित दिखाई देता है। उन्होंने क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को तेज करने की जरूरत बताई। दोनों नेताओं ने शांति और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास जारी रखने पर जोर दिया।
भारत-ईरान के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
पीएम मोदी और पेजेश्कियान ने केवल पश्चिम एशिया की स्थिति पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर भी बात की।
इनमें परिवहन और समुद्री सहयोग शामिल रहा। दोनों नेताओं ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम और चाबहार बंदरगाह में सहयोग पर भी चर्चा की।
दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने के लिए मौजूदा क्षमताओं का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया।
क्या भारत और ईरान के रिश्ते और मजबूत होने की संभावना है?
पेजेश्कियान ने भारत और ईरान के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग की काफी संभावनाएं हैं। उन्होंने प्रतिबंधों के असर को कम करने की कोशिशों और आपसी सहयोग को बढ़ाने की जरूरत बताई। पेजेश्कियान के मुताबिक अमेरिका और इस्राइली शासन की ओर से ईरान के दूसरे देशों के साथ सहयोग को सीमित करने की कोशिशों के बावजूद तेहरान भारत के साथ विभिन्न क्षेत्रों में रिश्ते बढ़ाने के लिए तैयार है।



