Main StoriesnewsRecommendedTrending Storiesउत्तर प्रदेशचुनावताजा खबरेबड़ी खबरराज्यराष्ट्रीय

पुलिस स्मृति दिवस-2026 : CM योगी आदित्यनाथ बोले-राष्ट्र के प्रति बलिदानियों का ऋण कोई भी चुका नहीं सकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुलिस स्मृति दिवस पर बुधवार को रिजर्व पुलिस लाइंस में कर्तव्यपालन के दौरान बलिदान देने वाले उत्तर प्रदेश के छह पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। इनमें गौतमबुद्धनगर के दो अग्निशमनकर्मी और जालौन के चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। उन्होंने शहीदों को नमन किया। इस दौरान शहीदों के परिजनों को सम्मानित भी किया गया।

पुलिस स्मृति दिवस हर वर्ष 21 अक्टूबर को कर्तव्यपालन के दौरान प्राणों का बलिदान देने वाले पुलिसकर्मियों की स्मृति में मनाया जाता है। इस दिन देशभर में शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके त्याग और समर्पण को याद किया जाता है। मुख्यमंत्री ने स्मृति परेड कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण कोई भी चुका नहीं सकता है।

तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव

गौतमबुद्धनगर के फायर सर्विस चालक तीर्थपाल सिंह और फायरमैन रोहित यादव चार अगस्त 2026 को ग्रेटर नोएडा के ईकोटेक-तीन क्षेत्र स्थित ईलजिन इलेक्ट्रानिक्स कंपनी में लगी आग बुझाने के दौरान बलिदान हो गए थे। रात करीब 3:28 बजे कंपनी में आग लगने की सूचना मिलने पर अग्निशमन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। आग बुझाने के दौरान कंपनी की दीवार अचानक ढहकर अग्निशमन वाहनों पर गिर गई। मलबे में दबने से तीर्थपाल सिंह और रोहित यादव गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में उपचार के दौरान दोनों की मृत्यु हो गई।

चार पुलिसकर्मियों की सड़क हादसे में जान चली गई

जालौन जिले के चार पुलिसकर्मियों की सड़क हादसे में जान चली गई थी। पांच मई 2026 को उरई कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। अपहृत व्यक्ति की सकुशल बरामदगी के लिए उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, सिपाही अशोक कुमार और सिपाही प्रदीप कुमार निकले थे। हरियाणा के नूंह जिले के तावड़ू क्षेत्र के धुलावट टोल प्लाजा के पास उनकी स्कार्पियो आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में चारों पुलिसकर्मियों की मृत्यु हो गई।

कुछ ऋण ऐसे, जिन्हें चुकाया नही जा सकता

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर पर कहा कि कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें चुकाया नही जा सकता। शहीदों के प्रति राष्ट्र का ऋण भी ऐसा ही है। आज हम उन वीर पुलिस जवानों को नमन कर रहे हैं। जिन्होंने देश की सुरक्षा, समाज की शांति,नागरिकों की रक्षा करते हुए, अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनके बलिदान को स्मरण करते हुए मन श्रद्धा व सम्मान से भर उठता है,उनके साहस पर मस्तक गर्व से ऊंचा होता है,और उनके प्रति कृतज्ञता हमे अपने दायित्वों का बोध भी कराती है। किसी भी राष्ट्र की महानता, इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने इतिहास और मूल्यों और उन लोगो के योगदान को कितना सम्मान देती है,जिनके त्याग से उनका वर्तमान सुरक्षित और भविष्य संभव हुआ है।

उन्होंने कहा कि याद करिये, एक दौर वह भी था, जब पुलिस का एक थानेदार या एसपी भी किसी अपराधी पर हाथ डालने से पहले सोचता था। अपराधी को छूते ही, सत्ता के गलियारों से फोन आने लगते थे। अगले ही कुछ घंटों में अपराधी की बजाय अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई हो जाती थी। पुलिस अपराधियों को पकड़ने के पहले हुक्मरानों के पालतू पशुओं को खोजने के लिए जंगलों में दौड़ने पर विवश थी।

न आवास अच्छा और न अन्य सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले तो थानों में सीलन भरी बैरके थीं। तपती खपरैल छतें थीं और सत्ता के गलियारों में पीएसी कंपनियों में ताला लगाकर उनको बंद करने का षड्यंत्र भी रचा जा रहा था। अपराधी पुलिस की खुली जीप में बैठकर खुल्लमखुल्ला ऑटोमेटिक हथियार लहराते थे और हमारे बहादुर जवान जंग लगी रायफल लेकर अपनी जान बचाने के लिए भागे भागे फिरते थे। अपराधियों का ऐसा सामानांतर राज था कि कानून केवल तमाशबीन बनकर रह गया था। जो लोग पुलिस कार्रवाई, एनकाउंटर पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़ा करते हैं, ये वही लोग हैं जो दुर्दांत माफिया व आतंकियों की मौत पर छाती पीटते हैं। उनकी कब्रों पर जाकर मातम मनाते हैं। जब इन्हीं माफिया के गोलियों से हमारा कोई निर्दोष जवान शहीद होता है तो ये सभी लोग,उन अनाथ बच्चों के आंसू पोछने के लिए इनके पास संवेदना नही होती है।

Like us share us

Related Articles

Back to top button