
चुनाव आयोग को लेकर चल रहे विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की बैठक हुई है। इसी बीच चुनाव आयोग ने कई मुद्दों पर अपना पक्ष साफ किया है और एसआईआर को लेकर कई फैसले भी लिए हैं। चुनाव आयोग ने कहा है कि कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र आयोग की किसी नीति या आईटी विभाग से जुड़ा मामला नहीं था, बल्कि आयोग में प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था।
कैबिनेट सचिव को भेजा गया पत्र किस बारे में था?
चुनाव आयोग के मुताबिक, यह पत्र प्रतिनियुक्ति पर आयोग में काम कर रहे एक अधिकारी के कामकाज से संबंधित था। संबंधित अधिकारी ने काम के पुनर्वितरण से जुड़े जो आदेश जारी किए थे, उन्हें वास्तव में लागू नहीं किया गया। दोनों चुनाव आयुक्तों के आदेश के बाद काम के पुनर्वितरण वाले आदेशों को लागू नहीं किया गया था। आयोग के मुताबिक, डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की आईटी डिविजन पर निगरानी वास्तव में कभी वापस नहीं ली गई। यानी आईटी डिविजन की निगरानी हटाए जाने की बात को आयोग ने सही नहीं माना है।
चुनाव आयोग ने क्या-क्या फैसले लिए?
केंद्रीय चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं की सुविधा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। आयोग की शनिवार को हुई बैठक में तय किया गया कि अनमैप्ड और लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी के मामलों में नोटिस पाने वाले लोगों को सुनवाई के लिए ईआरओ और एईआरओ कार्यालय बुलाने की जरूरत नहीं होगी। चुनाव आयोग की बैठक में लिए गए फैसलों के अनुसार, ऐसे लोगों के घर जाकर बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) दस्तावेज एकत्र करेंगे और उन्हें ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे। इसके बाद संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेंगे।

आयोग ने कहा कि केवल विशेष परिस्थितियों में, ईआरओ के निर्णय के अनुसार, सुनवाई आयोजित की जाएगी और इसे प्राथमिकता के आधार पर ऑनलाइन कराया जाएगा। यदि सुनवाई की आवश्यकता पड़ती है तो मतदाता अपने परिवार के किसी भी वयस्क सदस्य को अपनी ओर से अधिकृत कर सकता है। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की सुविधाओं को और मजबूत करने का भी फैसला किया है। जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश दिया गया है कि वे जरूरत के अनुसार पर्याप्त संख्या में हेल्प डेस्क स्थापित करें या विशेष शिविर आयोजित करें। इन सुविधाओं का लाभ रैन बसेरों में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों, बेघर लोगों और अन्य जरूरतमंदों को उपलब्ध कराया जाएगा।
‘एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा’
आयोग ने कहा कि एसआईआर के लिए फॉर्म-6 के साथ संलग्न घोषणा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है। वहीं, एसआईआर अवधि के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए निर्वाचन नियम, 1960 के तहत लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। आयोग ने कहा कि फील्ड अधिकारियों को उनकी वैधानिक शक्तियों के अनुरूप ईसीआईनेट प्रणाली में भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है। ईसीआईनेट की समीक्षा के लिए वरिष्ठ उप निर्वाचन आयुक्त (डीईसी) की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाएगी। इसमें आईआईटी और आईआईआईटी के एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को भी शामिल किया जाएगा। यह समिति यह दोबारा जांच करेगी कि ईसीआईनेट अधिनियमों और नियमों के प्रावधानों के अनुरूप काम कर रहा है या नहीं और अपनी रिपोर्ट आयोग को सौंपेगी।
आयोग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) से मिले सुझावों के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेडेशन पहले ही किए जा चुके हैं। यदि फील्ड अधिकारियों को आगे किसी अतिरिक्त लचीलेपन की जरूरत होगी तो उसे भी लागू किया जाएगा। भविष्य में आईटी मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई पहलों को आयोग की मंजूरी से पहले कमेटी ऑफ ऑफिसर्स (सीओओ) में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
सभी बैठकों का एजेंडा पहले ही किया जाएगा प्रसारित
चुनाव आयोग की बैठक में यह भी तय किया गया है कि उसकी सभी बैठकों के लिए एजेंडा पहले से प्रसारित किया जाएगा और बैठकों की कार्रवाई के मिनट्स जारी किए जाएंगे। इसके अलावा, सभी अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट हर वर्ष निर्धारित समयसीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी। अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए आयोग की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। आयोग ने यह भी कहा कि आयोग के आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।
गोवा के 97 मतदाताओं का मामला क्या है?
गोवा में एसआईआर के दौरान छूटे 97 मतदाताओं को लेकर भी चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने बताया कि गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ को इन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फॉर्म लेने का निर्देश दिया है। आयोग के मुताबिक, 97 में से 81 मतदाता पहले ही फॉर्म-6 भर चुके हैं, ताकि उनका नाम मतदाता सूची में शामिल किया जा सके। इसका मतलब है कि एसआईआर के दौरान नाम छूट जाने के बाद भी मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का रास्ता खुला है।



