
नयी दिल्ली । कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया है कि उनका संगठन किसी राजनीतिक दल में तब्दील नहीं होगा और न ही वे भविष्य में कोई राजनीतिक पार्टी जॉइन करेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन का उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि आगे एक ष्रिस्पॉन्स ग्रुपष् बनाया जाएगा, जो शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर लगातार आवाज उठाएगा। हाल ही में दिए एक विस्तृत इंटरव्यू में अभिजीत दीपके ने नीट पेपर लीक अमेंडमेंट बिल, छात्र आंदोलन, सरकार की भूमिका, विपक्ष के समर्थन, सोनम वांगचुक से मुलाकात की कोशिश और आंदोलन की आगामी रणनीति पर खुलकर अपनी बात रखी। अभिजीत दीपके का कहना है कि संसद से पारित पेपर लीक अमेंडमेंट बिल का मुख्य फोकस पेपर लीक होने के बाद की कानूनी कार्रवाई पर है, जबकि असली जरूरत ऐसी व्यवस्था बनाने की थी जिससे पेपर लीक की घटनाएं ही न हों। उन्होंने कहा कि सरकार ने सजा और जुर्माने की अवधि बढ़ा दी है, लेकिन इससे यह संदेश भी जाता है कि सरकार पहले से मानकर चल रही है कि पेपर लीक की घटनाएं होती रहेंगी। उनके अनुसार छात्रों की सबसे बड़ी मांग परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना थी।

दीपके ने प्रधानमंत्री द्वारा घोषित फास्ट-ट्रैक कोर्ट की पहल का जिक्र करते हुए कहा कि यदि सरकारी एजेंसियां पहली सुनवाई में ही पूरी तैयारी के साथ उपस्थित नहीं होतीं तो कानून का प्रभाव सीमित रह जाता है। उन्होंने कहा कि केवल कठोर कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि ईमानदार राजनीतिक इच्छाशक्ति और जवाबदेही तय करना अधिक जरूरी है। उन्होंने बताया कि आंदोलन की प्रमुख मांगों में पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करना शामिल था। दीपके के अनुसार सरकार ने बातचीत में आश्वासन तो दिया, लेकिन अब तक पीड़ित परिवारों को राहत नहीं मिली है। उनका कहना है कि यदि बड़े सरकारी फैसलों के लिए संसाधन तुरंत जुटाए जा सकते हैं तो प्रभावित परिवारों की मदद में देरी नहीं होनी चाहिए। अभिजीत दिपके ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय में हुए बदलाव छात्र आंदोलन के दबाव का परिणाम माने जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और मंत्रालय के कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में केवल चेहरों के बदलाव से नहीं, बल्कि संस्थागत सुधारों से स्थायी परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण था। ऐसे में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लिया जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ और छात्रों को परेशान किया गया तो भविष्य में फिर से लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने का विकल्प खुला रहेगा।
राजनीतिक समर्थन के सवाल पर अभिजीत दीपके ने कहा कि आंदोलन में विभिन्न विचारधाराओं के लोग शामिल हुए, लेकिन इसे किसी राजनीतिक दल ने संचालित नहीं किया। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या ऐसे छात्रों और युवाओं की थी जो पहली बार किसी जन आंदोलन का हिस्सा बने थे। उन्होंने कहा कि भोजन, चिकित्सा और अन्य व्यवस्थाएं आम नागरिकों, शिक्षकों, डॉक्टरों और समाज के विभिन्न वर्गों के सहयोग से संचालित हुईं। उनका कहना है कि आंदोलन पूरी तरह स्वतंत्र और जनता के सहयोग से आगे बढ़ा।अभिजीत दीपके ने साफ किया कि उनका अगला कदम चुनावी राजनीति नहीं होगा। उन्होंने कहा कि वे किसी राजनीतिक पार्टी में शामिल नहीं होंगे और न ही नया दल बनाएंगे। इसके बजाय एक ष्रिस्पॉन्स ग्रुपष् का गठन किया जाएगा, जो शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, युवाओं के अधिकार और जनहित से जुड़े मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहेगा। उन्होंने दोहराया कि आंदोलन का रास्ता आगे भी लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक रहेगा।
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योगी सरकार का दिव्यांग बच्चों की शुरुआती शिक्षा पर जोर, 28 नए बचपन डे केयर सेंटरों की स्थापना को मंजूरी
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