
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की प्रारंभिक जांच में ड्रेनेज सिस्टम में खामियां सामने आई हैं। आइआइटी खडगपुर, स्वतंत्र लेबोरेटरी व दिल्ली से आई एनएचएआइ अधिकारियों की संयुक्त टीम ने संयुक्त निरीक्षण किया। करीब चार घंटे से अधिक चले निरीक्षण में टीम ने अप व डाउन यानी 126 किलोमीटर एक्सप्रेसवे का सफर किया। टीम ने कई जगह फोटोग्राफ लिए।
आइआइटी खडगपुर से आए प्रोफेसर केएस रेड्डी ने हर बिन्दु को अपनी डायरी में लिखा और दिल्ली से आई एनएचएआइ के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ निरीक्षण करने के दौरान चर्चा करते हुए कहा कि ग्रीन फील्ड पर लखनऊ से कानपुर जाते वक्त कर्व ज्यादा है। अफसरों ने बताया कि कोई नदी नीचे से निकली है। इसलिए कर्व है। यहां टीम को कानपुर से लखनऊ आने वाले एक्सप्रेसवे पर ढाल ज्यादा दिखी।
टीम ने पाया कि बरसात का पानी दाएं व बाएं दोनों तरफ से बराबर निकलना चाहिए लेकिन अधिकांश पानी कर्व वाले स्थान पर ज्यादा आ रहा था। यह स्थान उन्नाव के कोरारी, किलोमीटर 64 व आसपास मिला। यहां टीम को ड्रेनेज में भी थोड़ी खामी प्रारंभिक जांच में मिली। हालांकि अभी यह जांच चार दिन चलेगी और संयुक्त टीम ने कोई रिपोर्ट सार्वजनिक न करने का दावा किया है।

ग्रीन फील्ड में नीचे चला गया पानी
टीम ने स्वतंत्र लेबोरेटरी के सदस्यों की मदद से उन स्थानों के डामर भी लिया, जहां सड़क धंस रही थी। इसके अलावा मिट्टी खोदाई कराकर ली गई। टीम ने पाया कि मिट्टी में कई फीट नीचे तक नमी है। सूत्रों के मुताबिक बरसात का पानी ग्रीन फील्ड में नीचे तक चला गया है। अर्थ वर्क बेहतर तरीके से न होने के कारण जब भारी वाहन निकले तो सड़क धंस गई।
यही नहीं, ग्रीन फील्ड के नीचे ड्रेनेज लेयर सही न होना भी पाया गया। हालांकि यह सभी चीजें ठीक होने वाली हैं लेकिन डामर की गुणवत्ता प्रारंभिक जांच में ठीक मिली। स्वतंत्र लेबोरेटरी टीम के सदस्यों ने जो सैंपल लिए हैं, उनकी जांच आइआइटी खडगपुर के प्रोफेसर कराएंगे या फिर किसी निजी एजेंसी से कराई जाएगी, इस पर अभी निर्णय नहीं किया गया है।



