
बिजली उपभोक्ता भले ही स्मार्ट मीटर के तेज चलने से लेकर लोड जंप करने की लगातार शिकायतें करते रहे हैं लेकिन तकनीकी जांच में मीटर में ऐसी खामियां नहीं मिली हैं। स्मार्ट मीटर की तकनीकी गुणवता की जांच के लिए गठित उच्च स्तरीय तकनीकी समिति द्वारा लगभग चार माह बाद दी गई रिपोर्ट को पावर कॉर्पोरेशन प्रबंधन ने शासन को सौंप दिया है।
सूत्रों के अनुसार समिति ने जांच रिपोर्ट में स्मार्ट मीटर में किसी बड़ी तकनीकी गड़बड़ी का उल्लेख नहीं किया है। मीटर को मूल रूप से ठीक बताया गया है। रिपोर्ट में मीटर के ऑपरेशनल पार्ट में ही कुछ सुधार ही प्रस्तावित किए गए हैं। रिपोर्ट को सार्वजनिक न किए जाने पर गंभीर सवाल उठाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि समिति को स्मार्ट मीटर में तकनीकी खामियां न मिलने के बारे में उपभोक्ताओं को बताया जाए कि उनकी शिकायतों और मीटर की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किस स्तर पर और किस मानक के आधार पर किया गया?

उपभोक्ताओं को जांच रिपोर्ट देखने और उसके बारे में जानकारी प्राप्त करने का पूरा अधिकार है इसलिए सरकार को पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए स्मार्ट मीटर जांच की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट सभी बिजली वितरण कंपनियों की वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए।
उल्लेखनीय है कि स्मार्ट मीटर की गुणवता तथा कनेक्टिविटी की समस्या के संबंध में लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए लगभग चार माह पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डॉ. आशीष कुमार गोयल ने स्मार्ट मीटर की तकनीकी गुणवता की जांच के लिए चार सदस्यीय उच्च स्तरीय तकनीकी समिति 12 अप्रैल को गठित की थी।
समिति में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर अंकुश शर्मा व प्रोफेसर प्रबोध बाजपेयी सहित वड़ोदरा के इलेक्ट्रिकल रिसर्च एवं डवलपमेंट एसोसिएशन के अनुभाग प्रमुख तेजस मिस्त्री और पावर कारपोरेशन के निदेशक वितरण जीडी द्विवेदी को बतौर संयोजक शामिल किया गया था। समिति को वैसे तो सभी तरह के स्मार्ट मीटरों का तकनीकी परीक्षण कर 10 दिन में रिपोर्ट देनी थी लेकिन अब रिपोर्ट सौंपी गई है।



