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योगी सरकार ने यूपी के पोषण मॉडल को बदला, डिजिटल निगरानी से पारदर्शी हुआ राशन वितरण.

उत्तर प्रदेश में कुपोषण के खिलाफ जंग को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘टेक होम राशन’ (THR) व्यवस्था का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया गया है। प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पोषण सामग्री पहुंचाने की प्रक्रिया अब केवल राशन बांटने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे उच्च तकनीक से जोड़कर उत्पादन इकाई से लेकर लाभार्थी तक सप्लाई चेन को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाया गया है।

वर्तमान में राज्य के लगभग 1.56 करोड़ लाभार्थियों को इस डिजिटल निगरानी प्रणाली के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।

जीपीएस ट्रैकिंग और क्यूआर कोड से थमेगी कालाबाजारी

पोषण सामग्री को सुरक्षित और समय पर आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचाने के लिए बहुस्तरीय डिजिटल सुरक्षा तंत्र लागू किया गया है।

  1. जीपीएस से वाहनों की निगरानी: कारखानों से राशन लेकर निकलने वाले परिवहन वाहनों की जीपीएस (GPS) से रियल-टाइम ट्रैकिंग की जाती है, जिससे आपूर्ति के दौरान होने वाली किसी भी हेराफेरी या देरी की तुरंत पहचान हो सके।
  2. क्यूआर कोड (QR Code) आधारित ट्रैकिंग: राशन के प्रत्येक पैकेट पर क्यूआर कोड अंकित किया गया है। इससे सामग्री की पहचान, निर्माण तिथि और वितरण से जुड़ी पूरी जानकारी डिजिटल रूप से ट्रैक होती है।
  3. ओटीपी (OTP) से सत्यापन: जब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता द्वारा लाभार्थी को राशन सौंपा जाता है, तो ओटीपी आधारित सत्यापन प्रक्रिया पूरी की जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि सामग्री सही और निर्धारित व्यक्ति तक ही पहुँचे।
  4. उम्र और शारीरिक आवश्यकता के अनुसार तय हो रहा पोषण
  5. बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के अनुसार, तकनीक के समावेश से व्यवस्था में लीकेज रुका है और अधिकारियों के लिए निगरानी आसान हुई है। इसके साथ ही, अलग-अलग वर्ग की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार उत्पाद दिए जा रहे हैं। 
  6. 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चे: शारीरिक विकास के लिए आवश्यक फोर्टिफाइड और सुपाच्य पोषण सामग्री।
  7. गर्भवती व धात्री माताएं: स्वास्थ्य सुधार और आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर विशेष ‘टेक होम राशन’ पैकेट।
  8. योगी सरकार ने पोषण को केवल एक कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि ‘सुशासन और जन-स्वास्थ्य’ का हिस्सा बनाया है। इस डिजिटल व्यवस्था से जहाँ एक ओर बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है, वहीं दूसरी ओर निर्धारित गुणवत्ता का राशन समय पर लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
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