
संसद के मानसून सत्र (Parliament Monsoon Sesssion) के तीसरे दिन लोकसभा में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और स्पीकर ओम बिड़ला (Om Birla) के बीच हल्की नोंकझोंक देखने को मिली. अखिलेश इस बात से नाराज हो गए कि सदन में उन्हें क्यों बोलने नहीं दिया. उन्होंने इशारा करते हुए कहा कि आपके बीजेपी और कांग्रेस को बुलवा लिया, लेकिन हमें बोलने का मौका क्यों नहीं दिया. ये बात ठीक नहीं है. इस्तीफा क्या है, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ जब चाहे यहां नहीं तो सदन के बाहर ले लेंगे. सवाल ये है कि छात्रों के साथ जो बर्ताव हुआ. हम मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास के बाहर गए.
दरअसल, संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे को लेकर उस समय तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने इस विषय पर चर्चा की मांग करते हुए सरकार और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला पर सवाल उठाए. इस दौरान सदन में कुछ देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही. कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि अखिलेश जी बोलना चाहते हैं… अखिलेश जी… अखिलेश जी? इसके बाद अखिलेश यादव अपनी सीट से खड़े होकर बोलने लगे.

हमें क्यों नहीं बोलने दिया, क्या आपका इनसे कोई समझौता हो गया है?
अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने नाराजगी भरे लहजे में कहा कि यह मुद्दा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि देश के युवाओं और छात्रों का है. अध्यक्ष महोदय, यह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या भाजपा का मुद्दा नहीं है. यह देश के युवाओं और छात्रों का मुद्दा है. आपने कांग्रेस और बीजेपी को बोलने का मौका दिया, लेकिन हमें क्यों नहीं बोलने दिया? क्या आपने इनसे कोई समझौता हो गया है?
उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार छात्रों और युवाओं की आवाज उठा रहा है. अगर उनकी बात नहीं सुनी जाएगी तो वे सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ पुलिस ने अमानवीय व्यवहार किया. उन्होंने कहा, छात्रों के हाथ तोड़े गए, सिर फोड़े गए, उनके कपड़े फाड़े गए. क्या बेटियों के साथ भी ऐसा व्यवहार किया जाएगा?
अगर सदन में हमारी बात सुन ली जाती तो..
सपा प्रमुख ने आगे कहा कि विपक्षी नेताओं को मजबूरी में प्रधानमंत्री आवास जाना पड़ा. उन्होंने कहा कि अगर सदन में हमारी बात सुन ली जाती तो हमें प्रधानमंत्री आवास नहीं जाना पड़ता. प्रधानमंत्री युवाओं के मुद्दे पर सदन में बयान क्यों नहीं दे सकते? जब बाहर बोल सकते हैं तो संसद के भीतर क्यों नहीं? उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री के इस्तीफे का क्या है, यहां नहीं तो सदन के बाहर उनका इस्तीफा ले लेंगे. लेकिन असली सवाल छात्रों के साथ हुए व्यवहार का है. उन्होंने कहा कि युवाओं के साथ हुई कथित ज्यादती पर सरकार को जवाब देना चाहिए.



