
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश के शहरों में विकास कार्यों को गति देने के लिए सरकार ने नगरीय निकायों के खजाने में 1201.64 करोड़ रुपये और दे दिए हैं।
पांचवें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के तहत अक्टूबर माह की यह धनराशि प्रदेश के 762 नगरीय निकायों को दी गई है। निकायों के पास विकास कार्यों के लिए संसाधन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर सड़क, नाली, जलनिकासी, पेयजल और सफाई व्यवस्था से जुड़े कामों को गति मिलेगी।
विधानसभा चुनाव से पहले सरकार के सामने शहरी क्षेत्रों में विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं को लेकर अपनी उपलब्धियां सामने रखने की चुनौती भी है।
नगर निगमों से लेकर छोटी नगर पंचायतों तक में सड़क, जलभराव, साफ-सफाई और पेयजल जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में राज्य वित्त आयोग से मिलने वाली धनराशि निकायों के लिए विकास कार्यों का महत्वपूर्ण जरिया बनेगी।
नगरीय निकायों के लिए 18 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था
खास बात यह है कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में नगरीय निकायों के लिए 18 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह राशि 16,200 करोड़ रुपये थी। अब तक नगरीय निकायों को नौ हजार करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं।
अब 17 नगर निगमों को 531.78 करोड़, 200 नगर पालिका परिषदों को 427.05 करोड़ और 545 नगर पंचायतों को 242.81 करोड़ रुपये दिए गए हैं। नगरीय निकायों के लिए बढ़े बजट का असर शहरों में चल रहे विकास कार्यों पर भी दिखाई देगा। खासकर उन नगर पंचायतों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की संभावना है, जहां आबादी बढ़ने के साथ नागरिक सुविधाओं की मांग भी बढ़ी है।
निदेशक नगरीय निकाय अनुज कुमार झा की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि नवसृजित नगर पंचायतों में सड़क, नाली, इंटरलाकिंग, जल निकासी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए भी धनराशि खर्च की जाएगी। सरकार ने धनराशि के इस्तेमाल को लेकर निगरानी की व्यवस्था भी सख्त रखी है।



