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उ.प्र. में चल रही पारदर्शी भर्ती व्यवस्था यानि विश्वास की नींव

विजय कुमार निगम लखनऊ : हर युवा के अपने लक्ष्य होते हैं, सपने होते हैं और आकांक्षा होती है कि उसे उसकी मेहनत का फल ईमानदारी से मिले और इसके लिए वह रात-रात भर किताबों से जूझता है, अभावों में जिंदगी गुजारते हुए मेहनत करता है लेकिन यदि उसकी परीक्षा का पेपर इम्तिहान से पहले ही बाज़ार में बिकने लगे, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता ही नहीं, लाखों सपनों की हत्या भी होती है। उत्तर प्रदेश ने वर्षों तक यह पीड़ा झेली है। पर्चा लीक, सॉल्वर गैंग, फर्जी अभ्यर्थी और भर्तियों में परिवारवाद-भाई-भतीजावाद की शिकायतें प्रदेश के युवाओं के लिए एक स्थायी दुःस्वप्न बन चुकी थीं। 2017 में मुख्यमंत्री योगी  ने सत्ता संभाली तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि युवाओं को इस दुःस्वप्न से कैसे निकाला जाए और बीते नौ साल इस बात के साक्षी हैं कि भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नकल-मुक्त बनाने के बाद युवाओं में अब इस बात का भरोसा है कि भर्तियों में योग्यता ही अंतिम मापदंड होगी।

  यह बदलाव योगी सरकार की संस्थागत और कानूनी रणनीति का परिणाम है। सबसे बड़ा और निर्णायक कदम रहा ‘उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अध्यादेश एवं विधेयक’, जिसने नकल माफिया की रीढ़ तोड़ दी।

इससे पहले तक पेपर लीक करने वाले, सॉल्वर बिठाने वाले और फर्जी वेबसाइट बनाकर छात्रों को ठगने वाले गिरोह मामूली सजा भुगतकर फिर सक्रिय हो जाते थे। अब स्थिति बिल्कुल अलग है। दोषी पाए जाने पर दस वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है, एक करोड़ रुपये तक का आर्थिक दंड लगाया जा सकता है, और संगठित अपराध में लिप्त व्यक्तियों व संस्थानों की संपत्ति कुर्क व जब्त करने का भी प्रावधान किया गया है। फर्जी परीक्षा केंद्र बनाना, फर्जी प्रवेश पत्र जारी करना और फर्जी वेबसाइट के जरिए अभ्यर्थियों को गुमराह करना, यह सब अपराध हैं। गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) ने भर्तियों में संगठित अपराध करने वालों की कमर तोड़ दी। 

योगी सरकार की दृष्टि स्पष्ट थी कि परिणाम चाहिए तो हर तरफ निगाह रखनी होगी, इसीलिए फर्जी वेबसाइट, डिजिटल पेपर लीक नेटवर्क और साइबर धोखाधड़ी की निगरानी के लिए एसटीएफ, साइबर सेल तथा इंटेलिजेंस यूनिट को सीधे भर्ती परीक्षाओं से जोड़ दिया गया।

परीक्षा एजेंसियों, प्रिंटिंग यूनिट, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और परीक्षा केंद्र संचालकों तक की जवाबदेही तय की गई। कानून के साथ-साथ तकनीक का प्रयोग भी इस बदलाव की रीढ़ बना। परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग, बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस रिकग्निशन तकनीक और क्यूआर कोड आधारित एडमिट कार्ड जैसी व्यवस्थाएं सामने आईं। इसका असर साफ दिखा। नकल माफिया के नेटवर्क बिखरे, गिरोहों में डर बैठा  और भर्तियों में शुचिता आई। पारदर्शी व्यवस्था के लिए और भी कदम उठाए गए। उदाहरण के रूप में 2017 के बाद समूह ग और घ की अनेक भर्तियों में साक्षात्कार यानी इंटरव्यू आधारित चयन प्रक्रिया को सीमित करते हुए लिखित परीक्षा और मेधा यानी मेरिट आधारित पारदर्शी चयन प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई। यह निर्णय अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि इंटरव्यू आधारित प्रणाली में अपनों को अधिक अंक देने की गुंजाइश सबसे अधिक रहती है और यही वह जगह होती है जहाँ सिफारिश, पैरवी और भाई-भतीजावाद अपनी जड़ें जमाते हैं। 

सपा सरकार में हुई भर्तियों से तुलना करने पर आंकड़े बहुत कुछ बोलते हैं।

2012 से 2017 के बीच प्रदेश में मात्र सवा लाख के आसपास सरकारी नौकरियां दी गईं। वह एक ऐसा दौर था जब भर्तियों में देरी, विवाद और भ्रष्टाचार के आरोप आम बात थे। इसके विपरीत, योगी सरकार के नौ वर्षों के कार्यकाल में नौ लाख से अधिक युवाओं को सरकारी रोजगार मिला है। यह उपलब्धि किसी एक विभाग तक सीमित नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में फैली है। पुलिस विभाग में कांस्टेबल से लेकर सब-इंस्पेक्टर तक और महिला पुलिसकर्मियों की रिकॉर्ड नियुक्तियां हुईं, शिक्षा विभाग में सहायक शिक्षकों और शिक्षकों की भर्ती, स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ नर्स, एएनएम, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट और नर्सिंग ऑफिसर समेत हजारों पदों पर नियुक्तियां, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी और फॉरेस्ट गार्ड जैसे पदों पर बड़ी संख्या में चयन हुए। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के जरिए भी पदों के चयन में निरंतरता बढ़ी। युवाओं को हर स्तर पर अवसर देने के लिए योगी सरकार ने प्रयास किया। जब भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी होती है, विवादमुक्त होती है, और समयबद्ध ढंग से पूरी होती है, तभी इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां संभव हो पाती हैं। 

इस पूरी व्यवस्था का एक और पहलू है जो अक्सर आंकड़ों की भीड़ में छूट जाता है। मुख्यमंत्री स्वयं एक अभिभावक की भूमिका में हर भर्ती प्रक्रिया को देखते हैं।

परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों के रहने, आने-जाने और खाने-पीने की व्यवस्था पर ध्यान देना, दूर-दराज से आने वाले छात्रों की असुविधा कम करने के प्रयास करना, एक संवेदनशील नेतृत्व की पहचान है। जब कोई सरकार अपने अभ्यर्थियों को केवल परीक्षा में बैठने वाला नंबर नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य मानकर व्यवस्था करती है, तो स्वाभाविक रूप से वह प्रक्रिया पारदर्शिता की ओर बढ़ती है। नेतृत्व जब अभिभावक के भाव से काम करता है, तब भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के लिए जगह स्वतः सिकुड़ जाती है, क्योंकि कोई भी अभिभावक अपने बच्चों के बीच पक्षपात नहीं करना चाहता।

  योगी सरकार ने भरोसे  को केंद्र में रखकर काम किया और परिणाम आज युवाओं के विश्वास के रूप में सामने है। ऐसा नहीं कि योगी सरकार में नकल माफिया ने घुसपैठ की कोशिश नहीं की। यूपीपीएससी की आरओ/एआरओ व टीईटी समेत कुछ परीक्षाओं के पेपर लीक हुए लेकिन महत्वपूर्ण बात यह कि सरकार ने तत्काल निर्णय लेते हुए उन्हें रद किया ताकि परीक्षाओं के प्रति भरोसा बरकरार रहे। 

  ऐसे नहीं कि चुनौतियां पूरी तरह खत्म हो गई हैं लेकिन अब भर्तियों को लेकर युवाओं में आश्वस्ति की भाव है। पारदर्शिता एक सतत प्रक्रिया है, एक बार की उपलब्धि नहीं, इसे हर परीक्षा, हर चक्र में फिर से अर्जित करना होगा, लेकिन अब इस दिशा में ठोस और स्थायी आधार तैयार हैं जो युवाओं को भावनात्मक रूप से भरोसा देता है।

आगरा में बनेगा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, सीएम योगी ने की बड़ी घोषणा; 2027 चुनाव से पहले खेला ट्रंप कार्ड.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार शाम आगरा पहुंचे। सीएम ने फतेहाबाद रोड स्थित टाटा मैदान पर आयोजित जनसभा को भी संबोधित किया। रविवार को खंदारी कैंपस में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा और बीमा योजना का शुभारंभ करेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार सीएम योगी शनिवार दोपहर करीब 3:40 बजे जालौन से हेलिकॉप्टर …

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‘हमारी मांगें मान ली गईं’, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मीटिंग के बाद CJP ने खत्म किया प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी और सरकार के बीच तीसरे दौर की बैठक खत्म हो चुकी है। बैठक में भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मौजूद रहे। दोनों पक्षों के बीच सीजेपी द्वारा उठाए गई 5 मांगों पर चर्चा हुई और सभी मांगों को सरकार ने मान लिया है। वहीं सौरभ दास ने प्रेस …

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मुख्यमंत्री योगी “पेपर लीक वाले नकल माफिया मिट्टी में मिला दिए जाएंगे”

विजय कुमार निगम लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पेपर लीक वाला नकल माफिया इन्हीं दलों की विरासत है, जिसे मिट्टी में मिला दिया जाएगा। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए केवल दो ही जगह हैं- जेल या जहन्नुम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी …

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“झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए” धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बोले अभिजीत दीपके

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जंतर-मंतर प्रदर्शन को विदेशी फंडिंग नहीं होने का दावा भ्रामक, फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट्स पर सरकार की चेतावनी

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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर जश्न, सीजेपी ने कहा, आंदोलन जारी रहेगा, रखीं दो नई मांगें

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आधुनिक तकनीक, नवाचार और बाजार को जोड़कर गो पालन को ज्यादा लाभकारी बनाने पर हुआ मंथन

विजय कुमार निगम लखनऊ:- योगी सरकार गोशालाओं को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, हरित ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और स्थानीय उद्यमिता के ऐसे केंद्रों में बदलने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है, जहां गोबर से ऊर्जा, गोमूत्र से मूल्यवर्धित उत्पाद और गो उत्पाद आधारित उद्योगों के जरिए रोजगार और आय का नया चक्र तैयार होगा। लक्ष्य है कि …

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