उत्तर प्रदेशताजा खबरेबड़ी खबरराष्ट्रीय

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्टेट बैंक में की पांच सौ करोड़ की एफडी | Ayodhya Ram Mandir

रामनगरी अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण कार्य गति पकडऩे के साथ ही श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट मंदिर निर्माण के लिए दान में मिली धनराशि को भी समायोजित कर रहा है। इसके साथ ही ट्रस्ट ने विदेशी मुद्रा में निधि समर्पण प्राप्त करने के लिए खाता खोलने की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है।

Ayodhya Ram temple donations cross Rs 1,500 crore: Trust- The New Indian  Express

निधि समर्पण अभियान का होगा देशव्यापी आडिट

निधि समर्पण अभियान का जिला स्तर पर आडिट चल रहा है। इसके पूरा होने के बाद देशभर की एक आडिट रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके साथ ही हैदराबाद की आइटी कंपनी की ओर से तैयार साफ्टवेयर से निधि समर्पण अभियान की पारदर्शी मॉनिटरिंग की गई। इसी से देश की 46 हजार बैंक शाखाओं से उक्त मियाद के दौरान लगातार संपर्क बना रहा।

दिल्ली में खुला कार्यालय

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नई दिल्ली में अपना कैंप कार्यालय खोला है। इसके एवज में भवन स्वामी को 25 हजार रुपये प्रतिमाह किराया देना तय हुआ है। यहां कार्यालय में 35 कर्मचारी कार्य करेंगे। कार्यालय को संसाधनों से लैस कर दिया गया है। 

ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय ने ट्रस्ट के सदस्यों से यह विवरण साझा किया है। यह भी बताया कि अनुभवी चार्टर्ड एकाउंटेंट के परामर्श के बाद पांच सौ करोड़ रुपये एसबीआइ अयोध्या शाखा में स्थाई निधि के रूप में जमा किए गए हैं। इस बीच विदेश से मंदिर निर्माण के लिए निधि समर्पण की उम्मीद भी अब जग गई है। ट्रस्ट ने दिल्ली की एसबीआइ की मुख्य शाखा में खाता खोलने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। दरअसल, विदेश से निधि समर्पण के लिए एसबीआइ की मुख्य शाखा में ही खाता अनिवार्य है। इस खाते का संचालन ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के साथ ही स्वामी गोङ्क्षवद देव गिरि व डा. अनिल मिश्रा करेंगे। इनमें से किसी दो के हस्ताक्षर से खाते का संचालन होगा।

श्रीरामजन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भारतीय स्टेट बैंंक की अयोध्या शाखा में पांच सौ करोड़ रुपये की एफडी की है। एफडी की यह धनराशि निधि समर्पण अभियान से प्राप्त तकरीबन सात हजार करोड़ रुपये का ही हिस्सा है। राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर में निधि समर्पण अभियान चला था।

Like us share us

Related Articles

Back to top button