किसानों की नवली मे लाल मौरम निकालने को सादे स्टाम्प पेपर पर सांडी खंड 77 ने कराए हस्ताक्षर…. | Soochana Sansar

किसानों की नवली मे लाल मौरम निकालने को सादे स्टाम्प पेपर पर सांडी खंड 77 ने कराए हस्ताक्षर….

ग्राम सांडी खंड 77 की अंधेरगर्दी।

@आशीष सागर दीक्षित।

  • गांव के शामिल खाता धारक परिजनों को प्रति किसान दिया महज 75 हजार रुपया जबकिं एक करोड़ से ऊपर की लाल मौरम खोद ले गए सांडी खंड 77 के पट्टेधारक।
  • किसान रामसेवक का कहना है पहले परिजनों पर दबाव बनाया फिर सादे स्टाम्प पेपर पर कराए दस्तखत !!! इसमें क्या लिखा जाएगा किसी को कुछ जानकारी नही है। इस किराएनामे सादे स्टाम्प पेपर की एक प्रति भी किसान को हार्ड कापी नही दी गई। सिर्फ मोबाइल पर फ़ोटो खींचने की इजाजत देता है सांडी खण्ड 77 का खदान संचालक।
  • बाँदा की सरहद पर मजरा बगीचा डेरा ग्राम पंचायत सांडी मे मौरम खंड 77 है लेकिन केन नदी की जलधारा का अत्यंत खनन से डाइवर्जन / जलधारा मुड़ने से हमीरपुर के गढ़ा गांव की सीमा पर भी धर्मकांटा लगाया गया है। यह बाँदा की सरहद पर भी लगा है।
  • बाँदा खान निरीक्षक का बयान नदी की जलधारा व दिशा बदलने से खनन पट्टे का कुछ रकबा हमीरपुर की तरफ है इसलिए वहां धर्मकांटा लगा है। लेकिन सवाल यह कि क्या हमीरपुर से भी न्यू यूरेका माइन्स एंड मिनरल्स फर्म के प्रोपराइटर हिमांशु मीणा ने लीज एग्रीमेंट रजिस्ट्रार दफ्तर से कराया है ? यदि नही तब यह लीगल व वैध कैसे है कि हमीरपुर की तरफ से केन नदी मे खनन व खनिज ट्रांसपोर्ट निकासी हो रही है ?
  • हमीरपुर मे गढ़ा व बाँदा मे ग्राम पंचायत सांडी के मजरों मे रहने वाले किसानों से सादे स्टाम्प पेपर पर खेतिहर भूमि का खनन के लिए (नवली / तरी) खोदने को किराएनामे कराए गए है।
  • प्रतिबंधित अर्थ मूविंग एलएनटी पोकलैंड मशीन का प्रयोग करके न्यू यूरेका माइन्स एंड मिनरल्स ग्राम सांडी होते हुए खरेई हार से खपटिहा कला आते है। इस दरम्यान वनविभाग की प्रतिबंधित आरक्षित वन भूमि के सूचना बोर्ड को भी ताक पर रखतें है खनन पट्टेधारक व ओवरलोडिंग परिवहन निकासी वाले चमत्कारी ठेकेदार।
  • ग्राम रिसौरा, तेरा ब, सादिक मदनपुर, ग्राम मरौली के खंड 5 तक फैला है केन नदी मे लाल मौरम अवैध खनन का साम्राज्यवाद।
  • राजनीति, मीडिया और सिस्टम की तिकड़ी मे मदमस्त है मौरम ठेकेदार। एनजीटी, सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश व लीज अनुबंध की शर्तों के साथ यूपी उप खनिज परिहार नियमावली की उपधारा 41 ज का खुलेआम घोर उल्लघंन बाँदा की मौरम खदानों मे हो रहा है। फतेहपुर व हमीरपुर की तर्ज पर यूपी एसटीएफ की आमद हो तो नक्कारखाने मे लगाम कस सकेगी।

बाँदा। बुंदेलखंड के बाँदा मे केन नदी पर लाल मौरम खनन का खेल वैध पट्टे की आड़ मे इस सत्र पर शुरू हो गया है। इस सीजन मे करीब 26 मौरम खण्ड चलने के आसार है। इससे ज्यादा हो जायें तो अतिश्योक्ति मत करिएगा। गत सत्र मे जून तक केन को बेतहाशा अवैध खनन से बेजार करने वाले एक बार संघठित होकर फिर मैदान मे उतरे है। आज मुख्यतः बात करते पैलानी तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत सांडी की जहां “न्यू यूरेका माइन्स एंड मिनरल्स” फर्म हिमांशु मीना के नाम है। यह 26 एकड़ मे मौरम पट्टा लिया है। इस वैध पट्टे की चौहद्दी पर ग्राम समाज की ज़मीन से अवैध खनन व किसानों की तरी और नवली से भी अवैध खनन किया जाता है। ताजा उदाहरण यह है कि यहां कारिंदा डेरा के किसान रामसेवक निषाद व परिजनों से सादे स्टाम्प पेपर मे दस्तखत कराकर किरायानामा लिया गया है।

हलफनामा मे खनन कंपनी और उसके गुर्गे किस तारीख़ को क्या लिख लेंगे यह किसानों को भी जानकारी नही है। मजेदार है कि हलफनामा की एक छायाप्रति भी किसान के पास नही है। सिर्फ मोबाइल पर फ़ोटो है जो वह अपने गांव मे दिखाते है। न्यू यूरेका माइन्स एंड मिनरल फर्म के इस सीजन की कमान कैलाश यादव उर्फ पहलवान, इनके भतीजे अशोक यादव, बब्लू सिंह उर्फ टुंडा, झांसी के सोलंकी (लोडिंग काम) व अन्य ने संभाली है। यही मीडिया मैनेजमेंट भी कर रहें है। बड़ी बात है पिछले जून तक घोर विवादित यह मौरम खदान स्थानीय किसानों के आंदोलन से चर्चा मे थी। मौजूदा जिलाधिकारी व एसपी साहब ने माकूल कार्यवाही नही की तो किसानों को चुप रहने का घूंट पीना पड़ा। किंतु यह लड़ाई अब वह ऊपरी स्तर पर लड़ने को आतुर है जबकि खदान संचालक रोजमर्रा मे दबाव व प्रभाव का उपयोग उन्हें मनाने को कर रहें है। गौरतलब है कि खण्ड 77 ग्राम सांडी मे हमीरपुर की तरफ से ग्राम गढ़ा मे भी मापतौल को धर्मकांटा लगा है। इस पर खान निरीक्षक कहतें है कि नदी की दिशा व जलधारा बदल गई है जिससे खनन पट्टे का कुछ हिस्सा हमीरपुर की तरफ हो गया है। तब क्या खनन पट्टेधारक ने हमीरपुर की तरफ भी लीज एग्रीमेंट लिया है ? यहां भी किसानों से हलफनामा लेकर उपजाऊ भूमि पर रस्ता लिया गया है । बेधड़क परिवहन निकासी हो रही है। जबकि बाँदा के ग्राम सांडी के मजरा बगीचा डेरा मे भी धर्मकांटा लगा है। ग्राम सांडी के कारिंदा डेरा, अमान डेरा आदि के रहवासियों से सादे स्टाम्प पत्र पर किरायानामा नवली व तरी मे लाल मौरम निकासी को खनन संचालक फर्म ने लिया है। लेकिन यह गोलमाल बिना मौके की नोटरी या रजिस्ट्री के किसान से की गई है।

विडंबना देखिए कि ग्राम सांडी खण्ड 77 मे प्रतिबंधित एलएनटी अर्थ मूविंग पोकलैंड मशीनों से ठीक वैसे ही नदी जलधारा मे खनन होता है जैसे कि गिरवां के ग्राम रिसौरा, अतर्रा के तेरा ब, चिल्ला के सादिक मदनपुर व ग्राम मरौली के खंड 5 मे संजीव गुप्ता, शक्ति सिंह करवातें है। बेलगाम खनन ठेकेदार और राजनीतिक समर्थन व मीडिया को साधकर यह बड़ा खेला प्रशासन की विफलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जिसने उत्तरप्रदेश सरकार को 2027 मे कटघरे पर खड़ा करने का बीड़ा उठाया है।

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