UP में कैंसर के विरुद्ध ‘0 टॉलरेंस’:"स्क्रीनिंग से लेकर सुपर स्पेशियलिटी इलाज तक..! | Soochana Sansar

UP में कैंसर के विरुद्ध ‘0 टॉलरेंस’:”स्क्रीनिंग से लेकर सुपर स्पेशियलिटी इलाज तक..!

विजय कुमार निगम लखनऊ | उत्तर प्रदेश में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ योगी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ को केंद्र में रखकर उन्नत और बहुस्तरीय स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को मिशन मानते हुए प्रदेश में विशेष रूप से कैंसर स्क्रीनिंग से लेकर सुपर स्पेशियलिटी इलाज और आर्थिक सहायता तक हर स्तर पर मरीजों को सहारा उपलब्ध कराने के सार्थक प्रयास किए जा रहे हैं। लखनऊ और वाराणसी के उन्नत कैंसर संस्थान क्रियाशील हैं, वहीं प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक मशीनों की स्थापना कैंसर स्क्रीनिंग और उपचार की विभिन्न प्रक्रियाओं को पूरा करने में सहायक सिद्ध हो रही है। इसके साथ ही ग्रामीण अंचलों में सरकार स्वयं सहायता समूहों की मदद से विशेष अभियान चलाकर कैंसर की रोकथाम और उपचार को प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। कैंसर जैसी जटिल बीमारी के उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी उन्नत तकनीकों को भी प्रभावी बनाने के प्रयास जारी हैं, जिससे मृत्युदर में कमी लाई जा सके। ये सभी प्रयास प्रदेश में कैंसर उपचार की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

लखनऊ स्थित कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान आज देश के सबसे आधुनिक कैंसर उपचार केंद्रों में गिना जा रहा है। संस्थान में कुल 220 बेड क्रियाशील हैं और यहां रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, सर्जरी सहित समग्र इलाज की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है। अत्याधुनिक मशीनें, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम इलाज को तेज और प्रभावी बना रहे हैं। इससे मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों की ओर पलायन करने की मजबूरी कम हुई है। वहीं वाराणसी स्थित होमी भाभा कैंसर अस्पताल के साथ स्थापित समन्वय से प्रदेश में कैंसर उपचार का ढांचा और मजबूत हुआ है। दोनों संस्थानों के बीच रेफरल सिस्टम, विशेषज्ञ परामर्श और तकनीकी सहयोग से मरीजों को बेहतर और त्वरित इलाज मिल रहा है। यह मॉडल क्षेत्रीय स्तर पर उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का उदाहरण बन रहा है।

गोरखपुर, मेरठ, प्रयागराज और झांसी के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में लीनियर एक्सिलेटर और कोबाल्ट यूनिट जैसी अत्याधुनिक रेडियोथेरेपी मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे क्षेत्रीय स्तर पर कैंसर इलाज की पहुंच बढ़ी है। मरीजों को अब लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ रही, जिससे इलाज में देरी और अतिरिक्त खर्च दोनों कम हुए हैं। साथ ही, कैंसर की जांच, रोकथाम और उपचार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी फ्यूचरिस्टिक तकनीक को लागू करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मेलों और जिला अस्पतालों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में ओरल, ब्रेस्ट और सर्वाइकल जैसे कैंसर की स्क्रीनिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान कर मृत्यु दर कम करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं ताकि लोग समय पर जांच कराएं। वहीं, कैंसर इलाज की ऊंची लागत को देखते हुए संस्थानों के भीतर ही सस्ती दरों पर कीमोथेरेपी व्यवस्था व दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे कुल खर्च 40 से 60 प्रतिशत तक कम हुआ है। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री राहत कोष आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए अंतिम सुरक्षा कवच का काम कर रहा है। इस प्रयास का स्पष्ट उद्देश्य है कि धन के अभाव में किसी भी नागरिक का इलाज न रुके।

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