
तालाब, झील और नदियों से जुड़े वेटलैंड सिर्फ पानी का ठिकाना नहीं, बल्कि हमारे पर्यावरण की प्राकृतिक जीवनरेखा हैं। ये भूजल को रिचार्ज करने के साथ बाढ़ के प्रभाव को कम करते हैं और हजारों जलीय जीवों व पक्षियों को आश्रय देते हैं।
इसी महत्व को देखते हुए प्रदेश सरकार ने ऐसी सात और वेटलैंड को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी शुरू कर दी है। योगी सरकार ने सात वेटलैंड को रामसर साइट घोषित कराने के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है।
राज्य आर्द्रभूमि प्राधिकरण की ओर से तैयार प्रस्तावों के आधार पर केंद्र से आगे की प्रक्रिया पूरी करने का आग्रह किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 13 रामसर साइट हैं। मैनपुरी के सौंज वेटलैंड का प्रस्ताव पहले से केंद्र सरकार के पास है।

सात नए स्थल जुड़ने के बाद संख्या हो जाएगी 21
सात नए स्थल जुड़ने के बाद इनकी संख्या 21 होने की उम्मीद है। रामसर साइट का दर्जा किसी वेटलैंड को अंतर्राष्ट्रीय महत्व की पहचान देता है। इससे संबंधित क्षेत्रों के वैज्ञानिक संरक्षण, जल प्रबंधन, जैव विविधता की निगरानी और इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के अवसर बढ़ते हैं।
साथ ही स्थानीय स्तर पर लोगों को इन जलक्षेत्रों के महत्व से जोड़कर इनके संरक्षण की जिम्मेदारी को सामुदायिक प्रयास में बदला जा सकता है।
सात नए प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने पर राज्य की अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले वेटलैंड का दायरा और बढ़ेगा, जिससे जल संरक्षण और जैव विविधता के संरक्षण की मुहिम को नई ताकत मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।



