
भाजपा ने नए तेवर के साथ संगठन की नींव पर चुनावी पिरामिड सजाना शुरू कर दिया है। अपेक्षाकृत युवाओं के हाथ चुनावी रथ की कमान देकर स्पष्ट संदेश दिया गया है। राष्ट्रीय टीम में यूपी से चुने गए चेहरों की औसत उम्र 49 साल है, जिन्हें जातीय समीकरणों के मुताबिक चुनिंदा राज्यों में विशेष अभियान पर उतारने की रणनीति है।
टीम न सिर्फ अगले साल यूपी समेत पांच राज्यों में होने वाले विधान सभा चुनाव की गणित संभालेगी, बल्कि मिशन-2029 में भी जुटेगी। इस बहाने भाजपा पिछले लोकसभा चुनाव में हुए बड़े नुकसान की भरपाई के लिए समीकरण बिठाने में जुटेगी। विशेष फोकस अल्पसंख्यकों की आशंकाओं को दूर करने एवं देशभर में बिखरे ओबीसी वोटों को एक सूत्र में पिरोने पर होगा।
पार्टी ने यूपी के आठ में से दो मुस्लिम चेहरों को संगठन में तवज्जो देकर रणनीतिकारों को भी चौंकाया है। बंगाल, यूपी, केरलम, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश एवं बिहार जैसे मुस्लिम प्रभाव वाले राज्यों में अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष 40 साल के कुंवर बासित अली को नई जिम्मेदारी के साथ उतारकर चुनावी नट बोल्ट को कसने का प्रयास होगा। प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष रहते हुए बासित ने सूबे को कई बार मथा, जिसका लाभ पार्टी दोनों चुनावों में उठाना चाहेगी।
मुस्लिम समाज को साधने की तैयारी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर रहे प्रोफेसर तारिक मंसूर भाजपा से वैचारिक रूप से दूर खड़े मुस्लिम समाज को साधने के लिए शैक्षणिक परिसरों में संवाद करेंगे। भारत की आबादी में करीब 60 प्रतिशत ओबीसी वोटबैंक है, जिसके हाथ में चुनावी जीत-हार की चाबी होती है। सर्वाधिक जिम्मा ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष 48 साल के अमरपाल मौर्य पर होगी। संघ की पृष्ठभूमि से आए मौर्य संगठन की बारीकी को से समझते हैं।
उन्हें यूपी, बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, महाराष्ट्र व हरियाणा से लेकर दक्षिण भारत के राज्यों में भी ओबीसी वोटों के बिखरे समीकरण को एक बिंदु पर लाना होगा। वह राज्यों के संगठन से मिलकर पहले चरण में प्रदेश कार्यकारिणी की मीटिंग कर हवा का रुख परखेंगे। राष्ट्रीय महामंत्री 53 साल के हरीश द्विवेदी की भूमिका पूर्वांचल, मध्य यूपी से लेकर उत्तराखंड, दिल्ली, मध्यप्रदेश, बिहार, राजस्थान समेत तमाम राज्यों में ब्राह्मणों में भरोसा पैदा करने पर होगा।

जमकर अभरा पार्टी का मतभेद
द्विवेदी के पास बिहार एवं असम में सफल प्रभारी के रूप में काम करने का अनुभव है। पिछली टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहते 75 साल के डा. लक्ष्मीकांत वाजपेयी झारखंड के प्रभारी बनाए गए, लेकिन उनके सामने पार्टी में जमकर मतभेद उभरा। वह चुनावी जमीन बनाने में सफल नहीं हुए और कांग्रेस जीत गई। उनकी उम्र व प्रदर्शन देखते हुए पार्टी ने इस बार टीम में जगह नहीं दी।
राज्यसभा सदस्य 45 साल की संगीता यादव, पूर्व सांसद 53 साल की रेखा वर्मा एवं 50 साल की स्मृति ईरानी के रूप में यूपी की तीन महिलाओं पर महत्वपूर्ण जिम्मा है, जिनकी पहली परीक्षा 2027 में यूपी विधान सभा चुनाव में होगी, जिसके बाद दूसरी कड़ी परीक्षा 2029 लोकसभा चुनाव में देनी होगी। तीनों के पास चुनावी और संगठन का अनुभव है। बुंलदशहर से 2014 से लगातार तीसरी बार सांसद चुने गए 48 साल के भोला सिंह भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं। उन्हें पार्टी ने राष्ट्रीय मंत्री बनाकर देशभर में दलित वोटों को साधने का लक्ष्य दिया है।



