
हवाई टिकटों के दाम अचानक कई गुना बढ़ जाने की समस्या और शिकायतें के मद्देनजर आज S. Laxminarayanan द्वारा दायर जनहित याचिका (W.P.(C) No. 1124/2025) पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका के तथ्यों पर गौर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दो हफ्तों में कदम उठाने को कहा है। यह मामला यात्रियों के अधिकार , पारदर्शिता और निष्पक्ष किराया निर्धारण से जुड़ा महत्वपूर्ण कानूनी विवाद बन गया है।

क्या थी हवाई किराए में अनियमतताओं को लेकर याचिका
भारत में निजी एयरलाइंस बिना पर्याप्त नियमों के डायनेमिक प्राइसिंग अपनाकर यात्रियों से अत्यधिक किराया वसूल रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में S. Laxminarayanan vs Union of India & Ors. नामक जनहित याचिका (PIL) लगायी गई थी। याचिका की खास मांगें थी…
- एल्गोरिदम आधारित डायनेमिक प्राइसिंग की निगरानी और नियमन किया जाए।
- एयर टिकट के किराए में होने वाली अचानक और अत्यधिक बढ़ोतरी पर नियंत्रण के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं।
- एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क (जैसे सीट चयन, सामान, प्राथमिकता सेवाएं आदि) को पारदर्शी बनाया जाए।
- यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए।
- एक स्वतंत्र Aviation Tariff and Consumer Protection Commission या इसी प्रकार का नियामक निकाय गठित किया जाए।
- घरेलू उड़ानों में इकोनॉमी क्लास के लिए कम-से-कम 25 किलोग्राम मुफ्त चेक-इन बैगेज बहाल करने की मांग भी की गई है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और फैसला
- सुप्रीम कोर्ट ने तथ्यों पर गौर करते हुए इस व्यापक जनहित से जुड़ा मामला माना और सुनवाई की। इस याचिका पर सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने की।
- मामले में केंद्र की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि नियमों का ड्राफ़्ट तैयार हो चुका है और उसका अनुवाद किया जा रहा है, साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें संसद के सामने भी पेश करना होगा। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी
- सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि नए कानून ( भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 ) के तहत बनाए गए नियम कब तक लागू होंगे। केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
- अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिया कि दो सप्ताह के भीतर नियमों का पूरा विवरण उसके समक्ष रखा जाए। बेंच की ओर से केंद्र सरकार को आदेश दिया गया कि वे नियम एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में जमा करें, चाहे उन्हें संसद में पेश किया गया हो या नहीं।
क्या है भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024
दरअसल, भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 (Bharatiya Vayuyan Adhiniyam, 2024) भारत की संसद द्वारा पारित एक प्रमुख कानून है जो 1 जनवरी 2025 से लागू हुआ है। इसने 90 साल पुराने Aircraft Act, 1934 की जगह ली है। इस नए अधिनियम का उद्देश्य आधुनिक विमानन तकनीक, सुरक्षा, और वैश्विक मानकों के अनुरूप भारत के उड्डयन क्षेत्र को उन्नत और विनियमित करना है।
अगली सुनवाई का इंतजार
हालांकि भारत के एविएशन सेक्टर को आधुनिक बनाने के मकसद से लाया गया ‘भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024‘ जनवरी 2025 में लागू तो हुआ, जबकि इससे जुड़े नियमों को अभी भी अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर यह बात कही है कि वे नियम एक सीलबंद लिफ़ाफ़े में जमा करें, चाहे उन्हें संसद में पेश किया गया हो या नहीं। अब अगली सुनवाई का इंतजार है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट हवाई जहाज के किराए और नियमों को लेकर कुछ निर्देश दे सकता है।



