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CM योगी सरकार आयुष पद्धति को बढ़ावा देने के लिए सोवा रिग्पा का शुरू करेगी पाठ्यक्रम

विजय कुमार निगम लखनऊ:- योगी सरकार आयुष पद्धतियों को बढ़ावा देने और वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी  के निर्देश पर प्रदेश के आयुष कॉलेजों में 2500 वर्ष पुरानी पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली ‘सोवा रिग्पा’ (अमची चिकित्सा) और सिद्ध पद्धति की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इससे न सिर्फ पारंपरिक चिकित्सा को नई पहचान मिलेगी, बल्कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा भी व्यापक होगा। 

   योगी सरकार का लक्ष्य है कि आयुर्वेद, योग, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी के साथ-साथ सोवा रिग्पा पद्धति को भी मुख्यधारा में लाया जाए। यह पहल खासतौर पर उन बीमारियों के इलाज में कारगर साबित होगी, जिनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ पूरक उपचार की जरूरत होती है, जैसे कैंसर, जोड़ों का दर्द, मानसिक रोग और दीर्घकालिक बीमारियां आदि।

  प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने बताया कि सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति के डिग्री कोर्स शुरू करने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। इन कोर्सों के लिए जरूरी मानकों, पाठ्यक्रम और इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित किया जा रहा है। योगी सरकार ने इसके लिए हरी झंडी दे दी है और जल्द ही प्रदेश के चयनित आयुष कॉलेजों में इनकी पढ़ाई शुरू हो जाएगी। इन कोर्सों की शुरुआत के साथ ही डिग्री लेने वाले चिकित्सकों का पंजीकरण भी किया जाएगा, जिससे वे अधिकृत रूप से अपने उपचार केंद्र खोल सकेंगे। इससे प्रदेश में पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं का विस्तार होगा और मरीजों को वैकल्पिक उपचार के अधिक विकल्प मिलेंगे।

  प्रमुख सचिव ने बताया कि वाराणसी में सोवा रिग्पा का एक प्रमुख केंद्र विकसित किया जाएगा। यह केंद्र शोध, प्रशिक्षण और उपचार का हब बनेगा, जहां जटिल बीमारियों के इलाज पर विशेष फोकस रहेगा। वाराणसी को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया है क्योंकि यह पहले से ही आयुर्वेद और आध्यात्मिक चिकित्सा का प्रमुख केंद्र रहा है। सोवा रिग्पा और सिद्ध पद्धति के कोर्स शुरू होने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। प्रशिक्षित चिकित्सक अपने क्लीनिक खोल सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचा सकेंगे। इसके अलावा, इन पद्धतियों पर शोध को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे इनके वैज्ञानिक आधार को और मजबूत किया जा सकेगा।

 सोवा रिग्पा हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, जिसकी उत्पत्ति तिब्बत में मानी जाती है। यह पद्धति शरीर, मन और पर्यावरण के संतुलन पर आधारित है। इसमें जड़ी-बूटियों, खनिजों और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर रोगों का उपचार किया जाता है। यह प्रणाली विशेष रूप से गठिया, पाचन विकार, मानसिक तनाव, त्वचा रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार में उपयोगी मानी जाती है।

  सिद्ध चिकित्सा प्रणाली मुख्य रूप से दक्षिण भारत में प्रचलित है और इसे भी आयुष ढांचे में मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। सिद्ध पद्धति शरीर के तीन दोषों वात, पित्त और कफ के संतुलन पर आधारित है। इसमें औषधियों के साथ-साथ जीवनशैली और आहार पर विशेष जोर दिया जाता है।

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