
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 1947 में सत्ता की लालसा में देश का विभाजन किया गया और इसकी कीमत करोड़ों लोगों को विस्थापन, हिंसा और नरसंहार के रूप में चुकानी पड़ी। इतिहास का स्मरण इसलिए जरूरी है, ताकि अतीत की गलतियों से सबक लेकर उन्हें दोहराने से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि जो लोग उस समय सत्ता के लिए मौन थे, उनकी सोच आज भी नहीं बदली है।
लोक भवन में विभाजन त्रासदी पर आधारित प्रदर्शनी, लाइव पेंटिंग और लघु फिल्म के अवलोकन के बाद योगी ने कहा कि विभाजन मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। करोड़ों हिंदुओं को अपनी मातृभूमि से विस्थापित होना पड़ा और लाखों हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन समेत अन्य लोगों का कत्लेआम हुआ। सत्ता हासिल करने की लिप्सा इतनी हावी थी कि सनातन परंपरा से एक रहे देश के टुकड़े कर दिए गए।

गलतियों का परिमार्जन करने का अवसर
उन्होंने कहा कि विभाजन क्यों हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और दोषियों को कितनी सजा मिली, ये सवाल आज भी देश के सामने हैं। इतिहास केवल परीक्षा का विषय नहीं, बल्कि गौरवशाली क्षणों से प्रेरणा लेने और अतीत की गलतियों का परिमार्जन करने का अवसर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के पीछे भी यही भाव है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में जो लोग सत्ता के लिए मौन थे, उनके कृत्य आज भी जारी हैं। बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचार के दौरान भी ये दल वोटबैंक के डर से चुप रहे। सत्ता को निजी संपत्ति और पारिवारिक विरासत मानने वालों ने अपने स्वार्थ के लिए देश में अराजकता और अव्यवस्था पैदा की।
योगी ने कहा कि देश की गुलामी के पीछे आपसी अंतर्विरोध और जाति-क्षेत्र के आधार पर विभाजन दो बड़े कारण थे। हमले के समय लोग यह सोचकर चुप रहे कि हमला दूसरे पर हो रहा है, मैं क्यों बोलूं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर देश को गुलाम बनाया गया। स्वार्थ के लिए कभी क्षेत्र, धर्म तो कभी समुदाय के नाम पर देश को बांटा गया, जिसका दुष्परिणाम आज नक्सलवाद, आतंकवाद, माओवाद और उग्रवाद के रूप में सामने है।



