
उत्तर प्रदेश के शहरों में हर नागरिक तक स्वच्छ, सुरक्षित और सुचारु पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में योगी सरकार का अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) तेजी से रंग ला रहा है। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक जलापूर्ति नेटवर्क, नलकूपों और जलाशयों का निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है।
इस महत्वाकांक्षी मिशन के अंतर्गत राज्य की 137.45 लाख (1.37 करोड़ से अधिक) आबादी को आच्छादित करने और कुल 27.49 लाख परिवारों को सीधे पाइपलाइन से पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है।

पाइपलाइन नेटवर्क: 68% से अधिक काम पूरा
उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में जलापूर्ति वितरण नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने के लिए कुल 25,302.80 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का लक्ष्य रखा गया था। इसमें से 17,431 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। इस उपलब्धि से कई नगरों में जल संकट दूर हुआ है और सीधे घरों तक पानी की पहुंच आसान हुई है।
नलकूपों और जलाशयों का निर्माण प्रगति पर
शहरी जलापूर्ति की निर्बाध व्यवस्था के लिए स्रोत और भंडारण क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नए नलकूप: निर्धारित 1,950 नलकूपों के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 984 नए नलकूपों का निर्माण पूरा कर लिया गया है।
ओवरहेड टैंक: प्रस्तावित 802 ओवरहेड जलाशयों में से 196 जलाशयों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।
भूमिगत टैंक: पानी के प्राथमिक भंडारण के लिए स्वीकृत 197 भूमिगत जलाशयों में से 24 जलाशयों का निर्माण पूर्ण हो चुका है।
समयबद्ध सीमा में पूरे होंगे सभी प्रोजेक्ट्स
परियोजनाओं की प्रगति पर यूपी जल निगम (नगरीय) के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र शहरी परिवार को स्वच्छ पेयजल से जोड़ना प्राथमिक लक्ष्य है।
उन्होंने कहा, “अमृत 2.0 मिशन के तहत जलापूर्ति नेटवर्क, नलकूपों और ओवरहेड जलाशयों के निर्माण कार्यों की जल निगम नगरीय द्वारा नियमित और डिजिटल निगरानी की जा रही है। हमारा पूरा प्रयास है कि सभी स्वीकृत परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरी की जाएं ताकि प्रदेश के नागरिकों को स्थायी और निर्बाध जलापूर्ति का लाभ मिल सके।”
स्मार्ट अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ संचालित यह मिशन न केवल प्रदेश के शहरी जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाएगा, बल्कि जल-जनित बीमारियों पर प्रभावी रोकथाम लगाने में भी मील का पत्थर साबित होगा।



