
280 कैरेक्टर लोकतंत्र के खंभे को हिला रहे हैं. मुझे नहीं लगता है

कि सुप्रीम कोर्ट की छवि इतनी नाजुक है. 280 कैरेक्टर से सुप्रीम कोर्ट अस्थिर नहीं हो जाता- प्रशांत भूषण, वरिष्ठ अधिवक्ता

280 कैरेक्टर लोकतंत्र के खंभे को हिला रहे हैं. मुझे नहीं लगता है

कि सुप्रीम कोर्ट की छवि इतनी नाजुक है. 280 कैरेक्टर से सुप्रीम कोर्ट अस्थिर नहीं हो जाता- प्रशांत भूषण, वरिष्ठ अधिवक्ता