कतर्नियाघाट व चकिया वन क्षेत्रों में इको पर्यटन के विकास से जनपद में आयेगी खुशहाली



बहराइच 09 सितम्बर। घने वनों, कल-कल, छल-छल करती अथाह जलराशि से पूरित नदियों, सुन्दर मनोहारी वन्य जीवों, पशु पक्षियों के कलरव से गुंजित भू-भाग पर इको पयर्टन की अपार संभावनाओं को देखते हुए

जिलाधिकारी शम्भु कुमार ने मंगलवार को देर शाम कतर्नियाघाट वन्य जीव प्रभाग के वन संरक्षक/प्रभागीय वनाधिकारी ज्ञान प्रकाश सिंह व प्रभागीय वनाधिकारी बहराइच मनीष सिंह के साथ शिविर कार्यालय पर आयोजित बैठक में निर्देश दिया कि तहसील मिहींपुरवा (मोतीपुर) एवं चकिया के वन क्षेत्रों एवं समीपवर्तीं ग्राम पंचायतों के लिए पर्यटन विकास के दृष्टिगत प्रभावी कार्ययोजना तैयार करें।
जिलाधिकारी ने कहा कि कतर्नियाघाट जैसी जैव विविधता से परिपूर्ण भू-भाग होना जनपद के लिए गौरव की बात है। श्री कुमार ने कहा कि अगर कतर्नियाघाट जैसी जैव विविधिता की बात की जाय तो भारत में कुछ एक स्थान ही होंगे जो जैव विविधता में इस भू-भाग की बराबरी कर सकें। उन्होंने बताया कि इस प्रभाग की जैव विविधता का अंदाज़ा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि यहाॅ पर दुर्लभ गोल्डेन महाशेर, गैंगेटिक डालफिन, बंगाल फ्लोरिकन, पाॅच प्रजातियों के हिरण, गैण्डा तथा हाथी, बाघ, तेन्दुआ जैसे अनेकों जीव जन्तु तथा नाना प्रकार के पेड़ पौधे एक ही स्थान पर पाये जाते हैं।
जिलाधिकारी ने कहा कि ईको पर्यटन को बढ़ावा देने से जहाॅ एक ओर विविधता भरे वातावरण को बेहतर ढंग से बचाया जा सकता है वहीं समीपवर्ती लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा कर हम उन्हें संरक्षण के लिए प्रेरित कर सकेंगे। जिलाधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र में ईको पर्यटन का विकास होने से लोगों की आय में वृद्धि होने से लोग वन एवं वन्य जीवों की उपयोगिता को बेहतर ढंग से समझेंगे जिससे मानव वन्य जीव संघर्ष तथा अवैध शिकार एवं कटान जैसी घटनाओं में कमी आयेगी।
जिलाधिकारी श्री कुमार ने वनाधिकारियों को निर्देश दिया कि इको पर्यटन की कार्ययोजना बनाते समय स्थानीय आर्थिक व्यवस्था व प्राकृतिक संरक्षण तथा स्थानीय कल्चर का साक्षात्कार देश-विदेश व शहरी लोगों से कराये जाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा संचालित ‘‘एक जनपद एक गन्तव्य योजना’’ तथा ‘‘होम स्टे योजना’’ को शीर्ष प्राथमिकता प्रदान की जाय। होम स्टे योजना के तहत ठहरने वाले पर्यटक प्राकृतिक के साथ-साथ स्थानीय कल्चर व कस्टम से रू-ब-रू हो सकेंगे और उन्हें पर्यटन के समय घर जैसा एहसास भी होगा। श्री कुमार ने यह भी निर्देश दिया कि कार्ययोजना बनाते समय कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटकों की पहली पसन्द बोटिंग व जंगल सफारी को भी अधिक विशेष महत्व दिया जाय। श्री कुमार ने कहा कि कार्ययोजना को तैयार करने में तहसील प्रशासन की ओर से वन विभाग को हर संभव सहयोग प्रदान किया जायेगा।

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