प्रधानमंत्री जी के 5 अप्रैल 2020 को रात में 9 बजे 9-दीपक जलाने के आवाहन का वैज्ञानिक पहलू

IC-WAC

प्रोफ0 भरत राज सिंह
महानिदेशक, स्कूल आफ मैनेजमेन्ट साइंसेस,
व अध्यक्ष, वैदिक विज्ञान केन्द्र, लखनऊ

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ब्रह्मांड में तमाम घटनाओ ऐसी है जिसमें हम यदि ग्रहो की संख्या देखें तो वह 9 है़, प्रत्येक ग्रह की 12-राशियो होती है जिसके अनुसार कुल संख्या=108 आती है और योग= 9 आता है । वही ज्योतिष के अनुसार 27-नक्षत्रो होते है और प्रत्येक नक्षत्र के 4-चरण होते है, इसकी संख्या =108 आती है, और योग भी 9 आता है । यही नही आकाश-गंगा के तारो की संख्या 108 होता है, जिसका भी योग=9 होता है तथा समुंद्र मंथन में 54-देव और 54-असुरो द्वारा अमृत कलश निकला था, जिसका योग=9 आता है । रुद्राक्ष व तुलसी की मालाओ में भी मनिकाए भी 108-108 होती है, जिनके भी योग 9-9 आता है । यह सन्योग नही कहा जा सकता है, इन सबका ब्रह्मांड में महत्व है । सम्पूर्ण ब्रह्मांड गतिशील है और परम शक्ति से ओत-प्रोत है ।

आज जब कोरोना ने पूर्ण मानवता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है प्रधान्मंत्री मोदी जी ने सामूहिक शक्ति प्रदर्शन के लिये जनता कर्फू, उसके बाद लाकडाउन और अब 5 अप्रैल 2020 को 9 बजे रात को 9 मिनट के लिये विजली बंद करने के उपरान्त दिया जलाकर, मोमबत्ती या मोबाइल की लाइट जलाकर सामूहिक शक्ति प्रदर्शन कर देश-वाशियो से जहाँ कोरोना महामारी के अंधकार से रोशनी की आश लगाई जा रही है, वही दूसरी तरफ लोगो मे एकता का अटूट प्रदर्शन होगा, जिस शक्ति से कोरोना हारेगा । भले ही ज्योतिष के कड़ी मे 5 अप्रैल का योग (5+4=9) है तथा 9 बजे सायं और 9 मिनट उजाला करना सभी का योग =(9+9+9=27) जो पुनः 9 अंक बना रहा है और शुभ लक्षण दिखा रहा है कि कोरोना पर मानवता की विजय होगी, उसी क्रम में, वैज्ञानिक पहलू पर विचार करना अत्यंत आवश्यक है ।

इसका वैज्ञानिक पहलू यह है कि जहाँ मानव द्वारा प्रकृति में किये जा रहे अप्रत्याशित छेड़-छाड़ से ब्रह्मांड पर अत्यधिक बुरा असर पड़ चुका है और प्रदूषण ने तो पूर्ण मानवता को भी नष्ट करने के कगार पर ला दिया है । जो मनुष्य के द्वारा धरती के अवयवो को अप्रत्यासित ढंग से दोहन अथवा नष्ट करने से हुआ है । विगत दो-वर्षो से यह देखा जा रहा है कि हवा व ध्वनि प्रदूषण विश्वभर में अप्रत्याशित रूप से बढ गया है और विश्व के 20-अधिकतम प्रदूषित शहरो मे से 16-शहर तो भारतवर्ष के है, जहा वायु प्रदूषण इंडेक्स-2.5 जो 490 से 589 तक पहुच चुका था । इस वर्ष तो इसकी चरम सीमा का लोगो द्वारा अनुभव किया जा रहा था कि जैसे हम सभी गैस-चैम्बर मे स्वाँस ले रहे हो । इससे वीमारी की अधिकता भी बढी हुई पायी गई और मृत्यु दर मे भी बढोत्तरी पाया गया । हमे यह जानकर खु़शी होगी कि आजका लखनऊ का ए.क्यू.आई. इंडेक्स – 59 है, जबकि यही 22 मार्च 2020 को लखनऊ मे 187 था । मोदीजी के 5 अप्रैल 2020 के प्रयास से, जहाँ भारतवर्ष की प्रतिदिन की उत्पन्न विजली 11,84,672 मेगा यूनिट है उसमे मे मात्र 9-मिनट में ही लगभग 7,450 मेगा यूनिट की बचत होग़ी और वही स्वास्थ्य के लिये हवा और शुद्ध होकर कोरोना महामारी सक्रमण को भी समाप्त करने मॆं मदद मिलेगी ।

वही दूसरी तरफ, दुनिया भर में विभिन्न परंपराओं और संस्कृतियों मे तेल के दीपक जलाना एक हिस्सा था, जब तक कि बिजली की रोशनी लोकप्रिय नहीं हुई। सबसे पहले ज्ञात तेल का दीपक लगभग 4500 से 3300 ईसा पूर्व के चालकोलिथिक युग में उपयोग मे लाये जाने का जिक्र है। आज, उनका उपयोग केवल कुछ घरों व त्योहारो तक सीमित है अथवा अब केवल किसी अपील के साथ जुडा है ।

यद्यपि इसका उद्धरण संस्कृत के मंत्रो मे मिलता है –
शुभं करोति कल्याणं आरोग्यं धनसम्पदाम l
शत्रुबुद्धिबिनाशाय दीपज्योतिर्नमोस्तुते ll

यह आरोग्य बनाता है और धन-धान्य से परिपूर्ण करके शुभ कल्याण करता है । इससे शत्रु का विनाश, और बुद्धि के विकास मे दीप- ज्योति मदद करती है ।

दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः l
दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोस्तुते ll
पाप को हरने वाली दीप ज्योति परब्रम्ह जो सभी पाप को हरण करती है, इसे नमस्कार करते है ।

तेल के दीपक को जलाने के कुछ फायदे हैं । कुछ वनस्पति तेलों का उपयोग, विशेष रूप से यदि आप दीपक को जलाने के लिए सरसो का तेल, तिल का तेल, अरंडी का तेल या घी का उपयोग करते हैं, तो एंटी-ऑक्सीडेंट ग्राफीन ऑक्साइड उत्पन्न होता है, जिससे जर्म, बैक्टीरिया के कण, सूक्ष्म कीडे आदि नष्ट हो जाते हैं । यह नकारात्मकता को समाप्त करता है और इसका सकारात्मक ऊर्जा का अपना क्षेत्र पैदा होगा । अब जब भारत की 130 करोड़ जनता द्वारा यदि तेल अथवा घी का 9-9 दिया, 9-मिनट तक जलाये जायेगे तो उससे नकाररात्मक ऊर्जा दूर होकर सकारात्मक ऊर्जा पैदा होगी ।

अतः प्रधान-मंत्री नरेंद्र मोदी जी के 5 अप्रैल 2020 को रात 9 बजे 9-दीपक जलाकर सामूहिक शक्ति प्रदर्शन कर कोरोना महामारी संक्रमण पर विजय प्राप्त करने हेतु आव्हान का बहुत बडा सकारात्मक असर पडेगा ।

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