दुग्ध व्यवसाय के लिए उत्तम नस्ल के पशु का चुनाव अहम

बहराइच। प्रवासी श्रमिकों हेतु दुग्ध उत्पादन व्यवसाय विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत यह आयोजन आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र बहराइच प्रथम के सभागार में किया गया।

दुग्ध व्यवसाय प्रशिक्षण का शुभारम्भ मुख्य अतिथि विधायक बलहा सरोज सोनकर ने किया।

दुग्ध व्यवसाय प्रशिक्षण का शुभारम्भ करतीं मुख्य अतिथि विधायक बलहा सरोज सोनकर।
दुग्ध व्यवसाय प्रशिक्षण का शुभारम्भ करतीं मुख्य अतिथि विधायक बलहा सरोज सोनकर।

पशु के चयन पर निर्भर दुग्ध व्यवसाय की सफलता

प्रशिक्षण कार्यक्रम को विधायक श्रीमती सोनकर ने सम्बोधित किया। उन्होंने कहा कि पशुओं की उत्तम नस्ल का चुनाव दुग्ध व्यसाय के लिए एक अत्यन्त ही महत्वपूर्ण पहलू है।

उन्होंने कहा कि दुग्ध व्यवसाय की सफलता और असफलता पशुओं के चयन पर आधारित है।

क्षेत्र विशेष के अनुसार करें चयन

विधायक ने सुझाव दिया कि दुग्ध व्यवसाय के लिए क्षेत्र विशेष के अनुसार पशुओं का चयन करें।

दुग्ध व्यवसाय में पशुओं के आवास का महत्व

कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. एम.पी. सिंह ने बताया कि पशु पालन में पशुओं के आवास व्यवस्था का विशेष महत्व है।

उऩ्होंने कहा कि प्रायः ग्रामीण स्तरों पर पशु पालकों द्वारा पशुओं की आवास व्यवस्था पर विशेष ध्यान नही दिया जाता है जिसका प्रभाव पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता पर पड़ता है।

उऩ्होंने सुझाव दिया कि पशुओं को रखने का स्थान ऐसा हो जहाँ वायु एवं सूर्य का प्रकाश पहुॅचता हो।

पशु रोग प्रबन्धन की जानकारी भी जरूरी

मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डाॅ. बलवन्त सिंह ने बताया कि पशुपालकों को पशु रोग प्रबन्धन की जानकारी अवश्य होनी चाहिए। इससे समय रहते बीमार और स्वस्थ पशुओं की पहचान कर उऩ्हें रोगी पशुओं से अलग किया जा सके। उप कृषि निदेशक डाॅ. आर.के. सिंह ने फसलों एवं पशुओं के बीमा, जिला उद्यान अधिकारी पारसनाथ ने विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

कृषि विज्ञान केन्द्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. शैलेंद्र सिंह ने पशुओं के लिए वर्ष भर हरे चारे के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मक्का, लोबिया, ज्वार, लाही, बाजरा, बरसीम जई एवं नेपियर घास के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।

प्रशिक्षण समन्वयक रेनू आर्या ने दूध में पोषक तत्वों एवं इसके उपयोग की जानकारी दी। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डाॅ. आर.के. पाण्डेय ने चारे की फसल में रोग एवं कीट नियंत्रण के बारे में बताया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में में जनपद के सभी विकास खण्डों से प्रवासी श्रमिकों द्वारा प्रतिभाग किया गया।

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