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योगी सरकार में खेल क्रांति: वाराणसी का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम जल्द बनेगा नई पहचान

विजय कुमार निगम लखनऊ:- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खेल और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रहे हैं। उनकी दूरदर्शी सोच और मजबूत नेतृत्व में प्रदेश में खेल अवसंरचना तेजी से विकसित हो रही है। इसी कड़ी में वाराणसी में निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में उभर रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह अत्याधुनिक स्टेडियम प्रदेश में खेल विकास के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन चुका है। स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है और जल्द ही यह खिलाड़ियों व क्रिकेट प्रेमियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

  यह परियोजना उत्तर प्रदेश की बढ़ती खेल क्षमता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश खेल क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रहा है। यह स्टेडियम न केवल पूर्वांचल के खिलाड़ियों के लिए नई संभावनाएं खोलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मानचित्र पर मजबूत पहचान भी दिलाएगा।

              इस अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी शिव थीम है, जो इसे देश के अन्य क्रिकेट स्टेडियमों से अलग पहचान देती है। स्टेडियम का मीडिया सेंटर/ नार्थ पवेलियन भगवान शिव के डमरू के आकार में तैयार किया जा रहा है। वहीं फ्लडलाइट्स त्रिशूल की आकृति में स्थापित की जा रही हैं। प्रवेश द्वार बेलपत्र थीम पर आधारित है, जबकि छत को अर्धचंद्राकार स्वरूप दिया जा रहा है। काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आधुनिक वास्तुकला के साथ जोड़ने का यह प्रयास स्टेडियम को एक अद्वितीय पहचान प्रदान करेगा। 

             लगभग 30,000 दर्शकों की बैठने की क्षमता वाला यह स्टेडियम आधुनिक सुविधाओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परिसर में एक अंतरराष्ट्रीय मानकों का मुख्य क्रिकेट मैदान और एक पूर्ण आकार का प्रैक्टिस ग्राउंड तैयार किया गया है। इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मैचों के आयोजन के साथ-साथ खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास के लिए भी उत्कृष्ट वातावरण उपलब्ध होगा। फिलहाल स्टेडियम का निर्माण कार्य अंतिम चरण में चल रहा है, सितंबर माह तक पूरा होने की संभावना है।

     स्टेडियम में खिलाड़ियों, मैच अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, प्रसारण एजेंसियों और दर्शकों के लिए सभी आवश्यक विश्वस्तरीय सुविधाओं का समावेश किया गया है। इसमें अत्याधुनिक ड्रेसिंग रूम, आधुनिक पवेलियन, उन्नत मीडिया एवं ब्रॉडकास्ट सुविधाएं, 1500 गाड़ियों की क्षमता वाली पार्किंग, उच्च क्षमता वाली फ्लडलाइट व्यवस्था, आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, उन्नत विद्युत एवं अग्नि सुरक्षा प्रबंधन और दर्शकों के लिए उच्चस्तरीय सुविधाएं शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं के चलते यह स्टेडियम देश के प्रमुख क्रिकेट स्टेडियमों की श्रेणी में शामिल होने की पूरी क्षमता रखता है।

           इस महत्वाकांक्षी परियोजना की एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि इसका निर्माण उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन द्वारा अपनी संचित निधियों से कराया जा रहा है। लगभग 400 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है। यह स्टेडियम यूपीसीए की वित्तीय आत्मनिर्भरता, संस्थागत क्षमता और प्रदेश में क्रिकेट के समग्र विकास के प्रति उसकी गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि अगर खेल संस्थाएं दूरदर्शी सोच और संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ कार्य करें, तो विश्वस्तरीय खेल अवसंरचना का निर्माण संभव है।

            इस परियोजना को साकार करने में योगी सरकार का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने इस स्टेडियम परियोजना को हर स्तर पर मजबूत सहयोग प्रदान किया। राज्य सरकार द्वारा स्टेडियम निर्माण के लिए लगभग 90 वर्षों की अवधि के लिए भूमि लीज पर उपलब्ध कराई गई, जिससे परियोजना को मजबूत आधार मिला। यही नहीं, परियोजना से जुड़ी सभी प्रशासनिक अनुमतियां और आवश्यक स्वीकृतियां भी समयबद्ध ढंग से प्रदान की गईं, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी बड़ी बाधा के तेज गति से आगे बढ़ सका है।

        योगी सरकार की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता तेज निर्णय क्षमता और समयबद्ध क्रियान्वयन रही है, जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण इस परियोजना में देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री की त्वरित विकास निधि के माध्यम से स्टेडियम के समीप विद्युत उपकेंद्र की स्थापना कराई गई और मात्र चार माह के भीतर विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित कर दी गई। यह कदम निर्माण कार्य को गति देने के साथ-साथ भविष्य में स्टेडियम के सुचारु संचालन के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा। वाराणसी प्रशासन और राज्य सरकार के निरंतर समन्वय ने इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है।   यह स्टेडियम केवल एक खेल परिसर नहीं होगा, बल्कि पूरे पूर्वांचल में क्रिकेट के भविष्य का केंद्रबिंदु बनेगा। वाराणसी सहित पूर्वांचल के लाखों युवाओं को अपने ही क्षेत्र में विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, अभ्यास और प्रतियोगी माहौल उपलब्ध होगा। इससे क्षेत्र की उभरती प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने के बेहतर अवसर मिलेंगे।

इसके अतिरिक्त यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिताओं की मेजबानी कर वाराणसी को वैश्विक खेल मानचित्र पर नई पहचान देगा। खेल गतिविधियों में वृद्धि से खेल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार, होटल उद्योग, परिवहन, व्यापार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। यूपीसीए के सीईओ अंकित चटर्जी ने बताया कि क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण कार्य 92 प्रतिशत पूरा हो चुका है। यह परियोजना उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश सरकार और वाराणसी प्रशासन के सफल समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने बताया कि आने वाले दशकों तक प्रदेश के खेल विकास, युवा सशक्तीकरण और क्रिकेट संस्कृति को नई दिशा देने वाली एक स्थायी धरोहर के रूप में स्थापित होगी।

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