
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी छह दिवसीय तीन देशों की सफल यात्रा के अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूजीलैंड के ऑकलैंड पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने स्वयं हवाई अड्डे पर पहुँच कर किया। चार दशक बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रही है क्योंकि यह भारत और न्यूजीलैंड के बीच तेजी से बदलते सामरिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क आधारित संबंधों को नई ऊंचाई देने वाला महत्वपूर्ण अवसर भी है।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब मार्च 2025 में प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा से दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा आई थी।
इसके बाद दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हुए, जिसने आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोल दिए। अब ऑकलैंड में होने वाली शिखर वार्ता इस साझेदारी को अगले चरण में पहुंचाने का काम करेगी। दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी तथा रणनीतिक सहयोग सहित द्विपक्षीय संबंधों के हर पहलू पर व्यापक चर्चा करेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने न्यूजीलैंड रवाना होने से पहले स्पष्ट किया था कि यह यात्रा भारत की पूर्व की ओर सक्रिय नीति को और मजबूत करेगी तथा महासागर दृष्टि को नई गति देगी। इससे स्पष्ट है कि भारत अब केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्र, खुला और समावेशी व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में अपने विश्वसनीय साझेदारों के साथ मिलकर आगे बढ़ रहा है।
इस यात्रा का सामरिक महत्व अत्यंत व्यापक है। न्यूजीलैंड भले ही आकार में छोटा देश हो, लेकिन हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण है।
समुद्री सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री संसाधनों की रक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषय आज वैश्विक राजनीति के केंद्र में हैं। ऐसे समय में भारत और न्यूजीलैंड का निकट आना पूरे क्षेत्र में शक्ति संतुलन और सहयोग की नई संभावनाएं पैदा करता है। पिछले दो वर्षों में रक्षा और समुद्री सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा भी इस यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। गुजरात के लोथल में विकसित हो रहे राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर में न्यूजीलैंड की भागीदारी पर भी चर्चा दोनों देशों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।
हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया की सफल यात्रा पूरी कर न्यूजीलैंड पहुंचे हैं। इंडोनेशिया में महत्वपूर्ण खनिज, समुद्री सुरक्षा और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों सहित चौदह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जबकि ऑस्ट्रेलिया में तीसरे वार्षिक शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत किया। नागरिक परमाणु ऊर्जा समझौता तथा समुद्री रक्षा सहयोग इस यात्रा की प्रमुख उपलब्धियां रहे। इन सभी पहलों को यदि एक साथ देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि भारत हिंद प्रशांत क्षेत्र में अपने विश्वसनीय मित्र देशों का मजबूत समूह तैयार कर रहा है, जिसमें न्यूजीलैंड की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है।
हम आपको बता दें कि भारत और न्यूजीलैंड के संबंध केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं,
बल्कि दोनों देशों के लोगों के बीच गहरे विश्वास पर आधारित हैं। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल का समुदाय दोनों देशों के बीच सबसे मजबूत सेतु बन चुका है। दीपावली, होली, रक्षाबंधन, बैसाखी, ओणम, पोंगल और अन्य भारतीय पर्व पूरे उत्साह से मनाए जाते हैं। कथक, भरतनाट्यम, हिंदी और भारतीय संस्कृति के प्रति वहां बढ़ती रुचि सांस्कृतिक निकटता का प्रमाण है। प्रधानमंत्री मोदी अपने प्रवास के दौरान भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे इसलिए भारतीयों में इस ऐतिहासिक यात्रा को लेकर अभूतपूर्व उत्साह दिखाई दे रहा है। अनेक सांस्कृतिक दल विशेष प्रस्तुतियों की तैयारी कर चुके हैं और भारतीय मूल के लोग इसे अपने सम्मान और पहचान से जुड़ा ऐतिहासिक क्षण मान रहे हैं।
साथ ही खेल भी दोनों देशों की मित्रता का मजबूत आधार हैं। वर्ष 2026 में भारत और न्यूजीलैंड अपने खेल संबंधों के सौ वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं।
इसकी शुरुआत 1926 में भारतीय सेना की हाकी टीम के न्यूजीलैंड दौरे से हुई थी, जिसमें महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद भी शामिल थे। हाल ही में भारतीय महिला हाकी टीम ने ऑकलैंड में राष्ट्र कप जीतकर इस खेल संबंध को और मजबूत किया। दोनों देशों ने खेल सहयोग को नई दिशा देने के लिए अद्यतन सहयोग समझौता भी किया है। क्रिकेट, हॉकी और पर्वतारोहण जैसे क्षेत्रों में दशकों पुरानी साझेदारी आज भी दोनों देशों को मजबूती से जोड़ रही है।
प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान उद्योग जगत और खेल जगत की प्रमुख हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे।
इससे निवेश, नवाचार, कृषि, शिक्षा, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्रों में नए अवसर पैदा होंगे। मुक्त व्यापार समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से भारतीय निर्यात, कृषि उत्पाद, सेवा क्षेत्र और निवेश को बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। साथ ही भारतीय युवाओं, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए भी नए अवसर खुलेंगे।
बहरहाल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि भारत आज आत्मविश्वास के साथ विश्व मंच पर अपनी भूमिका का विस्तार कर रहा है।
उनकी सक्रिय, संतुलित और दूरदर्शी विदेश नीति ने भारत को वैश्विक नेतृत्व के केंद्र में स्थापित किया है। मित्र देशों के साथ भरोसेमंद संबंध, सामरिक संतुलन, आर्थिक साझेदारी और सांस्कृतिक जुड़ाव को समान महत्व देकर प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की कूटनीति को नई पहचान दी है। न्यूजीलैंड की यह ऐतिहासिक यात्रा न केवल दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देगी, बल्कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका और विश्व समुदाय में उसके मजबूत नेतृत्व को भी और अधिक प्रतिष्ठा प्रदान करेगी।
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