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पृथ्वी और चांद की दूरी से ज्यादा लंबा सफर तय करता है यूपी का खनिज परिवहन…

@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा।।

  • पट्टेधारक खनन क्षेत्र मे प्रति एकड़ 200 छायादार पौधों का रोपण तक नही किये।
  • फर्जी बिलिंग से ई-रिक्शा, टिर्री,एम्बुलेंस,स्कूटर,क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर के नाम एमएम 11 रवन्ना जारी किया गया।
  • बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, सोनभद्र,प्रयागराज, चित्रकूट सहित 17 ज़िलों मे जमकर अवैध खनन हुआ है।

बाँदा। उत्तरप्रदेश सरकार की योगी सरकार मे नित नए कीर्तिमान बन रहें है। 5 बार पौधरोपण का विश्वरिकार्ड बनाने के बाद अब उत्तरप्रदेश की राज्य सरकार के मातहत खनिज विभाग ने भी कैग (सीएजी) की रिपोर्ट वाल्यूम नम्बर 9 , साल 2024 के आडिट मुताबिक अदभुत चमत्कार किया है। गौरतलब है कि पृथ्वी से चांद की दूरी है 3,34,400 किलोमीटर लेकिन यूपी मे योगी जी की सरकार ने कैग की रिपोर्ट अनुसार एक जिले से दूसरे ज़िले तक खनिज परिवहन को 1 करोड़ किलोमीटर की दूरी तय की है।

काबिलेगौर है कि इस रिपोर्ट का पेज नम्बर 65 अति महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही पेज 63 व 84,113 भी कारनामों से तरबतर है। खनिज ट्रांसपोर्ट की दूरी एक ज़िले से दूसरे ज़िले तक अनुमानित 200 से 1200 किलोमीटर तक अधिकता है। लेकिन बुंदेलखंड, सोनभद्र, प्रयागराज, फतेहपुर मे चल रहे लाल मौरम व ग्रेनाइट खनन के वास्ते 83 हजार 156 वाहन शामिल किये गए है। साल 2017 से 2022 तक जबरजस्त अवैध खनन हुआ है। यह परिवहन भी मजेदार है जैसे टिर्री , ई-रिक्शा, जानवरों की एम्बुलेंस, आदमी की एम्बुलेंस, स्कूटर, मोटरसाइकिल, क्रेन, जेसीबी, ट्रैक्टर आदि इनसे लाल बालू मौरम बाँदा, हमीरपुर, चित्रकूट, फतेहपुर, प्रयागराज, सोनभद्र मे ढोते हुए इन सबके एमएम 11 प्रपत्र जारी हुए हैं। बड़ी बात है कि खनन के सापेक्ष किसी भी पट्टेधारक ने अपने खनन क्षेत्र मे लीज होल्डर शर्तों व पर्यावरण अनापत्ति प्रमाणपत्र की गाइडलाइंस का अनुपालन नही किया है।

खनिज न्यास फाउंडेशन जिसकी अध्यक्षता डीएम करतें है उसको ताक पर रख दिया गया। वहीं प्रतिबंधित अर्थ मूविंग मशीनों से केन, यमुना, बेतवा,मंदाकनी जैसी नदियों को रौंद डाला गया है। सवाल यह कि क्या सर्वोच्च न्यायालय या हाईकोर्ट इसका स्वतः संज्ञान लेगी ? क्या एनजीटी की नींद टूटेगी ? पूर्व बसपा और सपा सरकार मे बाबूसिंह कुशवाहा, गायत्री प्रसाद प्रजापति को सीबीआई तक पहुंचाने वाली मौजूदा बीजेपी राज्य सरकार अपनी ज़मीनी जांच निष्पक्षता से करा सकती है ? क्योंकि एक पेड़ माँ के नाम,गुरुजी के नाम और पर्यावरण संरक्षण की प्रतिज्ञा वालों को इतना तो करना ही चाहिए। जिससे ब्यूरोक्रेसी मे माफियाओं व भ्रस्ट अफसरों पर नकेल लग सके।

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