
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का सोमवार को हुआ विरोध प्रदर्शन और संसद मार्च को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि ‘जंतर मंतर टू संसद भवन’ तक हुए विरोध प्रदर्शन बाबत सटीक खुफिया इनपुट जुटाने में दिल्ली पुलिस चूक गई। दिल्ली पुलिस को विरोध प्रदर्शन के बारे में सभी तरह की जानकारी नहीं थी। संसद भवन परिसर के मुख्य गेटों पर सीआईएसएफ के स्नाइपर तैनात करने पड़े। प्रदर्शनकारियों का जंतर-मंतर से संसद भवन के सामने तक पहुंचना, उनकी संख्या का अंदाजा न होना, लगभग दो हजार पुलिस कर्मी व आरएएफ की तैनाती, प्रदर्शन के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल और दिल्ली मेट्रो के अनियोजित एवं ऑन स्पॉट लिए गए निर्णय, दिल्ली पुलिस को अब इन्हीं सवालों का जवाब देना है।

वांगचुक को अस्पताल तक ले जाने में कामयाब
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का अनशन और कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन, इसे लेकर दिल्ली पुलिस के पास ठोस खुफिया इनपुट का अभाव रहा है। वांगचुक की हालत जब बिगड़ने लगी तो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके लिए दिल्ली पुलिस ने सुबह मॉक ड्रिल के बहाने जंतर-मंतर पर पहुंचकर कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को तितर बितर कर दिया। दिल्ली पुलिस, छोटी सी कार्रवाई के जरिए वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल तक ले जाने में कामयाब रही। हालांकि इस कार्रवाई से एक दिन पहले दिल्ली पुलिस में एक बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला था। गृह मंत्रालय ने एकाएक पुलिस आयुक्त सतीश गोलचा को उनके पद से हटाकर अनुराग कुमार को दिल्ली पुलिस की कमान सौंप दी थी। अनुराग कुमार, लगभग बीस साल तक आईबी में रहे हैं।
दिल्ली पुलिस को देना है इन सवालों का जवाब:
- -जब कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले से ही संसद मार्च की घोषणा कर रखी थी तो पुलिस ने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस की तरफ से संसद मार्च की अनुमति भी नहीं मिली थी।
- -दिल्ली पुलिस को इसका कोई अंदाजा नहीं था कि संसद मार्च में युवाओं की कितनी संख्या हो सकती है। उसे राजनीतिक दलों का कितना समर्थन हासिल है। संसद मार्च से पहले कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न दलों के नेताओं से मिलकर उनसे जंतर-मंतर पर पहुंचने की अपील की थी।
- -प्रदर्शनकारियों ने जब जंतर-मंतर से मार्च निकालना शुरु किया तो कई जगहों पर पुलिस और आरएएफ के जवान उनके पीछे थे। दो हजार से ज्यादा पुलिस कर्मी, प्रदर्शनकारियों को रोक नहीं सके। नतीजा, पहली बार किसी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों को संसद भवन के मुख्य गेट पर स्नाइपर तैनात करने पड़े।
- -प्रदर्शनकारियों ने पुलिस द्वारा लगाए गए अवरोधकों को आसानी से पार कर लिया। वे रेल भवन होते हुए रफी मार्ग के जरिए पीटीआई के सामने संसद भवन परिसर के बिल्कुल करीब तक पहुंच गए। पुलिस उन्हें पहले किसी प्वाइंट पर रोकने में असफल रही।
- -पुलिस के पास इस जानकारी का अभाव था कि नई दिल्ली और दूसरे इलाकों में कितने प्रदर्शनकारी मौजूद हैं। कई जगहों पर अवरोधक लगाए गए, मगर प्रदर्शनकारी तकरीबन सभी दिशाओं से आते रहे।
- -दोपहर तक नई दिल्ली में ट्रैफिक व्यवस्था का बुरा हाल रहा। अगर दिल्ली पुलिस के पास पुख्त इनपुट था तो आसपास के सरकारी कार्यालयों का समय नहीं बदला गया। इसमें छुट्टी भी एक विकल्प था।
- -दिल्ली मेट्रो ट्रेन में अतिरिक्त कर्मचारी ड्यूटी पर थे। उनका काम ये देखना था कि मेट्रो में प्रदर्शनकारियों का भारी जमावड़ा तो नहीं हो रहा। यहां पर भी दिल्ली पुलिस और मेट्रो स्टाफ के बीच तालमेल की कमी रही। राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर भीड़ को मैनेज करने के लिए एकाएक निर्णय लिए जा रहे थे।
- -राजीव चौक, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय और मंडी हाउस मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ के चलते अव्यवस्था हो गई। पटेल चौक पर मेट्रो को नहीं रोका गया। बाकी स्टेशनों के कई गेट बंद कर दिए गए। मेट्रो स्टेशनों पर प्रदर्शनकारियों की नारेबाजी के बीच सीआईएसएफ को उन्हें अलग व्यवस्था के जरिए बाहर निकालना पड़ा।
- -दिल्ली पुलिस के निचले स्टाफ से कहा गया था कि उन्हें प्रदर्शनकारियों से उलझना नहीं है। उनका आचरण ठीक होना चाहिए। ये आदेश तब दिए गए थे, जब दिल्ली पुलिस को प्रदर्शनकारियों की संख्या का सटीक अंदाजा नहीं था। पुलिस की सोच यह थी कि जंतर-मंतर पर चार-पांच हजार प्रदर्शनकारी पहुंचेंगे तो उन्हें संभाल लेंगे।



