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योगी सरकार का ‘स्मार्ट ग्राम’ प्लान, गांव-गांव खुलेंगी डिजिटल लाइब्रेरी; पंचायत भवन बनेंगे उत्सव और शिक्षा के नए केंद्र.

उत्तर प्रदेश के गांवों की तस्वीर अब पूरी तरह से बदलने वाली है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को केवल पक्की सड़कों और बिजली तक सीमित नहीं रख रही, बल्कि उन्हें आधुनिक डिजिटल सुविधाओं और सामाजिक केंद्रों से जोड़ रही है। सरकार के नए मास्टरप्लान के तहत ग्राम पंचायतें अब केवल प्रशासनिक कामकाज का अड्डा नहीं रहेंगी, बल्कि वे युवाओं की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और सामाजिक उत्सवों का नया केंद्र बनेंगी। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए 600 करोड़ रुपये से अधिक की व्यवस्था की गई है, जो गांवों को ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

युवाओं के लिए वरदान: गांव में ही मिलेगी डिजिटल लाइब्रेरी

ग्रामीण युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अब शहरों की तरफ नहीं भागना पड़ेगा। योगी सरकार ने ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित करने के लिए बजट में 454 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया है। इन लाइब्रेरियों का मकसद सिर्फ अलमारियों में किताबें सजाना नहीं है, बल्कि युवाओं को ई-बुक्स, डिजिटल अध्ययन सामग्री और हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना है। कई जिलों में फर्नीचर और किताबों की आपूर्ति पूरी हो चुकी है। इस पहल से गांवों में डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी और बच्चों में पढ़ने की आधुनिक आदतें विकसित होंगी।

पंचायत भवन बनेंगे गांव के नए ‘सोशल हब’

राज्य सरकार की सोच पंचायत भवनों को केवल फाइलों और बैठकों तक सीमित रखने की नहीं है। सरकार इन्हें बहुउद्देशीय सामुदायिक केंद्रों के रूप में विकसित कर रही है। इसके तहत 1000 बहुउद्देशीय पंचायत भवनों के निर्माण के लिए करीब 57 करोड़ रुपये जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा, गांव में शादी-विवाह और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए हर विधानसभा के ग्रामीण क्षेत्र में ‘पंचायत उत्सव भवन’ या बारात घर बनाए जाएंगे, जिसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इससे ग्रामीणों को मांगलिक कार्यक्रमों के लिए एक सुरक्षित और व्यवस्थित जगह मिल सकेगी।

सिर्फ निर्माण नहीं, गुणवत्ता और जवाबदेही पर भी सख्त पहरा

सरकारी इमारतें बनने के बाद अक्सर रखरखाव के अभाव में खराब हो जाती हैं, लेकिन इस बार योगी सरकार ने जवाबदेही तय करने का कड़ा इंतजाम किया है। डिजिटल लाइब्रेरी और पंचायत भवनों के संचालन के लिए एक मानक कार्यप्रणाली (SOP) तैयार की गई है। इसमें भवन की सुरक्षा, स्वच्छता, किताबों और आईटी उपकरणों का रखरखाव, और नियमित निरीक्षण जैसी शर्तें शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि इसमें ‘नागरिक फीडबैक’ का भी विकल्प रखा गया है, ताकि सुविधाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे और किसी भी लापरवाही पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।

प्रशासनिक इकाई से आगे बढ़कर विकास का केंद्र बन रही पंचायतें

डिजिटल लाइब्रेरी से जहां एक ओर ग्रामीण युवा वैश्विक डिजिटल दुनिया से सीधे जुड़ेंगे, वहीं पंचायत उत्सव भवन समाज को एक सूत्र में बांधने का काम करेंगे। योगी सरकार का यह मॉडल स्पष्ट करता है कि पंचायतें अब सिर्फ सरकारी योजनाएं लागू करने वाली इकाई नहीं हैं, बल्कि ये शिक्षा, रोजगार, डिजिटल क्रांति और सामाजिक परिवर्तन का प्रमुख केंद्र बन रही हैं। गांवों में विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराकर उत्तर प्रदेश ग्रामीण विकास का एक नया राष्ट्रीय मॉडल पेश कर रहा है।

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