
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में विधि की उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को न्यायालय की भाषा में विकसित भारत का लक्ष्य समझाया। समारोह में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं तथा मेधावियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि हम मान लें कि हमारा केस नंबर 2047 है और उसका विषय विकसित भारत है, तो इस मुकदमे के याची देश के 140 करोड़ नागरिक हैं। इनकी ओर से युवा पीढ़ी को अधिवक्ता के रूप में देश के विकास की दलील आगे बढ़ानी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी मुकदमे को मजबूती से लड़ने के लिए केवल दलील पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उसके समर्थन में तथ्य, साक्ष्य और तर्क भी जरूरी होते हैं। इसी तरह विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए भी ठोस कार्यों और प्रमाणों के साथ अपना पक्ष रखना होगा। उन्होंने विद्यार्थियों से सवाल किया कि यदि उन्हें विकसित भारत के पक्ष में दलील देनी हो, तो वे इसे किस तरह आगे बढ़ाएंगे।
1975 का दौर और विधि के शासन का महत्व
योगी आदित्यनाथ ने देश के ऐतिहासिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि आपातकाल का दौर लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि के शासन के महत्व को समझने का एक बड़ा उदाहरण है। उन्होंने विधि के शासन (रूल आफ ला) और शासक के शासन के बीच अंतर को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया। लोकतंत्र में कानून सर्वोपरि है और सभी को उसके दायरे में रहकर काम करना चाहिए।

राम, कृष्ण और शिव से सीखने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने राम, कृष्ण और शिव के व्यक्तित्व पर भी लिखा था। इन तीनों के आदर्शों से जीवन के लिए महत्वपूर्ण सीख मिलती है। शिव जैसी विवेकशीलता, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसी कर्मनिष्ठा व वचनबद्धता व्यक्ति को सही दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। विधि के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए कठिन परिस्थितियों में भी विवेकपूर्ण निर्णय लेना और न्याय के प्रति प्रतिबद्ध रहना आवश्यक है।
2017 से पहले की स्थिति का जिक्र
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 से पहले की स्थिति और इसके बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने कानून-व्यवस्था, निवेश और विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने की दिशा में काम किया है। उन्होंने माफिया के खिलाफ कार्रवाई और निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने को भी प्रदेश के बदलाव से जोड़ा। केंद्र सरकार के कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाए जाने की चर्चा की।
पांच महत्वपूर्ण तारीखों का उल्लेख
योगी आदित्यनाथ ने देश के इतिहास की पांच महत्वपूर्ण तारीखों का उल्लेख करते हुए कहा कि 15 अगस्त 1947 को देश की आजादी, 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने, 25 जून 1975 को आपातकाल, वर्ष 2006 और 16 मई 2014 को इस मुकदमे की अलग-अलग तारीखों के रूप में देखा जा सकता है। उन्होंने 16 मई 2014 को देश की राजनीति में आए बदलाव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुए सुधारों का उल्लेख किया।
पेशे के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुकदमे में प्रतिवादी किसी व्यक्ति या राजनीतिक दल को नहीं, बल्कि उस यथास्थितिवादी सोच को माना जाना चाहिए जो बदलाव और विकास की संभावनाओं को स्वीकार नहीं करती। ऐसी सोच के सामने तथ्यों, साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर अपना पक्ष रखना होगा। उन्होंने विधि के विद्यार्थियों को निरंतर अध्ययन, सत्यनिष्ठा और अपने पेशे के प्रति प्रतिबद्धता बनाए रखने का संदेश दिया।
समारोह में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। समारोह में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं तथा मेधावियों को पदक देकर सम्मानित किया गया।



