
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की पहल से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। पूर्वांचल के सात जिलों की करीब 50 हजार महिलाएं अब डिजिटल तकनीक के जरिए डेयरी कारोबार का संचालन कर रही हैं। मोबाइल एप आधारित इस व्यवस्था ने डेयरी क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ हजारों महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया है।
वाराणसी, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर, सोनभद्र, बलिया और भदोही जिलों में काशी दुग्ध उत्पादक संस्था के डिजिटल डेयरी नेटवर्क से जुड़ी महिलाएं प्रतिदिन दो लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह और कारोबार कर रही हैं। गांवों में स्थापित दुग्ध संग्रह केंद्रों पर दूध की मात्रा और गुणवत्ता की जांच डिजिटल मशीनों के माध्यम से की जाती है, जबकि पूरा रिकॉर्ड मोबाइल एप ‘काशी ई-डेयरी’ पर उपलब्ध रहता है।
मोबाइल एप से संभाल रहीं दूध संग्रह और भुगतान रिकॉर्ड
डिजिटल डेयरी नेटवर्क के तहत महिलाएं दूध संग्रह, फैट जांच, बिक्री, भुगतान और दैनिक रिकॉर्ड प्रबंधन का कार्य मोबाइल एप के जरिए कर रही हैं। इससे कारोबार में पारदर्शिता आई है और किसानों व पशुपालकों को सटीक जानकारी तुरंत उपलब्ध हो रही है।
दूध खरीद से लेकर भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने से किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना कम हुई है। पशुपालकों को उनके दूध की मात्रा, फैट प्रतिशत और भुगतान की स्थिति की जानकारी रियल टाइम में मिलती है।

हर 10 दिन में डीबीटी से सीधे खातों में पहुंच रही राशि
इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि दूध बेचने वाले पशुपालकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जाता है। हर 10 दिन के अंतराल पर डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से राशि जमा की जाती है।
इस व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है, जिससे ग्रामीणों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलने लगा है और भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बन गई है।
12 हजार महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’
डिजिटल डेयरी मॉडल का सकारात्मक प्रभाव महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। संस्था से जुड़ी करीब 12 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।
नियमित आय और तकनीकी दक्षता के कारण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे केवल पशुपालन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डिजिटल माध्यमों से व्यवसाय संचालन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण विकास का सफल मॉडल
पूर्वांचल में विकसित यह डिजिटल डेयरी नेटवर्क महिला सशक्तीकरण, डिजिटल साक्षरता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का सफल उदाहरण बनकर सामने आया है। इससे डेयरी क्षेत्र में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ा है और गांवों में रोजगार तथा आय के नए अवसर सृजित हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल भविष्य में प्रदेश के अन्य जिलों में भी ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
क्या है डिजिटल डेयरी नेटवर्क?
डिजिटल डेयरी नेटवर्क के तहत दुग्ध संग्रह केंद्रों को मोबाइल एप और आधुनिक डिजिटल उपकरणों से जोड़ा गया है। दूध की मात्रा, गुणवत्ता, भुगतान और दैनिक कारोबार की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जाती है। इससे किसानों और पशुपालकों को पारदर्शी, विश्वसनीय और समयबद्ध सेवाओं का लाभ मिल रहा है।



