
लखनऊ। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने विभाग में कार्यरत आउटसोर्स और अंशकालिक श्रमिकों को साप्ताहिक अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकाश, इंश्योरेंस, पीएफ सहित अन्य लाभ दिया जाना तत्काल सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं।

इन कर्मियों को हर महीने वेतन पर्ची देने के साथ ही 15 दिन के अंदर आउटसोर्स के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मियों को पहचान पत्र देने के लिए कहा है। समाज कल्याण विभाग द्वारा शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर भागीदारी प्रेक्षागृह में आयोजित ‘श्रम संवाद-2026’ कार्यक्रम में मंत्री ने कहा कि नए लेबर कोड्स और आउटसोर्स सेवा निगम के गठन के माध्यम से सरकार ने इन कर्मियों के लिए छुट्टियां, काम के घंटे और वेतन भुगतान की प्रक्रिया को पारदर्शी और अनिवार्य बना दिया है। इनके अधिकारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान की गई है।
नए नियमों के अनुसार, किसी भी आउटसोर्स या अनुबंध कर्मी से लगातार सात दिन काम लेना अवैध होगा। छह दिन निरंतर काम के बाद एक दिन का सवैतनिक अवकाश देना अनिवार्य किया गया है। कार्य के घंटे आठ से नौ घंटे निर्धारित किए गए हैं। अधिक काम लिए जाने पर ओवरटाइम देना होगा।
कर्मचारियों को प्रति वर्ष 10 आकस्मिक अवकाश, छह माह की सेवा पूरी करने पर 15 दिन का चिकित्सीय अवकाश के साथ ही प्रति वर्ष 15 दिन का अर्जित अवकाश मिलेगा जो अगले वर्ष के लिए कैरी फारवर्ड की सुविधा के साथ है। महिला कर्मचारियों को प्रसूति अवकाश दिए जाने के नियम का कड़ाई से पालन किया जाना सुनिश्चित किया गया है।
एक अप्रैल से प्रभावी आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से बिचौलियों के शोषण को जड़ से समाप्त किया जा रहा है। अकुशल श्रमिकों के लिए 11,000 और कुशल श्रमिकों के लिए 13,500 रुपये न्यूनतम मजदूरी की दरें निर्धारित की गई हैं। कार्यक्रम में श्रम विभाग के अधिकारियों ने नए लेबर कोड्स की जानकारी दी। समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत, यूपी सिडको के चेयरमैन वाईपी सिंह, उपाध्यक्ष अनुगम विश्वनाथ तथा निदेशक जनजाति कल्याण शिव प्रसाद ने श्रमिकों के कल्याण के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।



