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उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले पत्रकार की निर्मम हत्या के खिलाफ स्थानीय पत्रकारों ने प्रदर्शन किया

बहराइच, 10 मार्च । उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में सीतापुर के पत्रकार राघवेंद्र बाजपेई की निर्मम हत्या के खिलाफ स्थानीय पत्रकारों ने तीव्र आक्रोश व्यक्त करते हुए एक संगठित और प्रभावशाली प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष आयोजित किया गया, जिसमें श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिला अध्यक्ष संजय मिश्रा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकार शामिल हुए। इस दौरान, पत्रकारों ने राघवेंद्र बाजपेई की हत्या में शामिल सभी दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी और उन्हें कठोरतम सजा देने की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। इस अवसर पर, एक ज्ञापन भी जिलाधिकारी को सौंपा गया, जिसमें राज्य सरकार से एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की अपील की गई।

श्रचना के साथ ही, श्रमजीवी पत्रकार यूनियन ने राज्य सरकार से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन की भी मांग की, ताकि पत्रकारों पर होने वाले इस प्रकार के गंभीर अपराधों की जांच को त्वरित और प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।

पत्रकारों ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में की जानी चाहिए, ताकि न्याय प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। प्रदर्शन में वरिष्ठ पत्रकारों का एक बड़ा समूह भी उपस्थित था, जिनमें हेमंत मिश्रा, कल्बे अब्बास, बच्चे भारती,संतोष श्रीवास्तव, जितेन्द्र दीक्षित, राहुल यादव, अद्वैत भूषण श्रीवास्तव, प्रभंजन शुक्ला ,फहीम किदवई,के के सक्सेना, अनीस सिद्दीकी,परवेज रिजवी,एसएमएस जैदी,रमन सोनी,अटल सिंह,अरुण दीक्षित, सहित शामिल थे।

सभी पत्रकारों ने मिलकर इस सफर में एकजुटता दिखाई और इस दुखद घटना की निंदा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, और इस तरह की घटनाएं पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर एक गंभीर आघात हैं।

इस प्रदर्शन ने दिखाया कि राघवेंद्र बाजपेई की हत्या केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि समग्र पत्रकारिता समुदाय के लिए भी एक बड़े खतरे का प्रतीक है। पत्रकारों ने सरकार से अपील की कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई अन्य पत्रकार इस प्रकार की दर्दनाक स्थिति का सामना न करे।

पत्रकारों के इस विरोध प्रदर्शन ने उनके एकजुटता और साहस का एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है। सभी ने एकजुट होकर न्याय की मांग करते हुए कहा कि पत्रकारों के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। इस घटना ने पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर तीखे सवाल उठाए हैं, यह स्पष्ट करता है कि न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बल्कि सुरक्षा भी पत्रकारों के अधिकारों का अभिन्न हिस्सा है।

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