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ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर राहुल गांधी ने डॉक्यूमेंट्री रिलीज कर सरकार को घेरा, बोले-रक्षा रणनीति से इसका कोई संबंध नहीं

नयी दिल्ली | विश्व पर्यावरण दिवस पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप के दौरे की एक डॉक्यूमेंट्री रिलीज करके, मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर एक बार फिर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि मोदी सरकार के ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट का रक्षा रणनीति से कोई लेना-देना नहीं है, बल्कि ये इकोलॉजी को बिगाड़ने वाला जरूर है। राहुल गांधी ने कहा कि, मैं पर्यावरण के अनुकूल संतुलित विकास का पक्षधर हूं। लेकिन यहां का घना जंगल उजाड़ा जाएगा।

1.5 करोड़ पेड़ काटे जा रहे हैं। मूंगा चट्टानों का नामोनिशान मिटाया जा रहा है। सैनिक और आदिवासी विस्थापित होंगे। इसलिए क्योंकि एक बिजनेसमैन, देश की सबसे महत्वपूर्ण और इकोलॉजिकल भूमि पर होटल और कसीनों बनाना चाहता है। 16 मिनट की डॉक्यमेंट्री में राहुल गांधी ने अंडमान और निकोबार द्वीप की अहमियत पर जोर देते हुए ये समझाने का प्रयास किया हैकि वह देश की पारिस्थितकी तंत्र के लिए क्यों बेहद जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यहां वन अधिकार अधिनियम का खुला उल्लंघन हो रहा है। राहुल गांधी का तर्क है कि ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट कोई रक्षा रणनीति नहीं है। आईएनएस बाज का विस्तार कीजिए-हम सरकार को समर्थन करेंगे। नौसेना पांच साल से विस्तार की मांग उठा रही है, लेकिन उसे नजरंदाज किया गया। न तो ट्रांशिपमेंट पोर्ट के लिए है, क्योंकि केरल में पहले ही मेनलैंड पर पोर्ट बन रहा है। राहुल गांधी के मुताबिक, इस परियोजना में लगभग 1.5 करोड़ पेड़ काटे जाएंगे।

कोरल रीफ (मूंगा चट्टानें) नक्शे से मिटा दी जाएंगी। राहुल गांधी ने कहा कि देश का हर युवा इस बात को बखूबी समझता है कि चंद पैसों के मुनाफे के लिए हमारी अनमोल प्रकृति को नष्ट नहीं किया जा सकता है। अंडमान और निकोबार द्वीप के लिए केंद्र सरकार ने ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट बनाया है। लागत 72,000 करोड़ से 92,000 करोड़ के बीच है। इसका उद्देश्य ये है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की समुद्री रक्षा रणनीति मजबूत की जा सके। ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट वर्ष 2025 से 2035 तक, तीन चरणों में पूरा किया जाना है। यह परियोजना 166.10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली है। इसमें 130.75 वर्ग किलोमीटर वन भूमि यानी वन क्षेत्र है और 35.35 वर्ग किलोमीटर राजस्व भूमि। यहां चरणबद्ध तरीके से बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा।

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