अधिकारी पति-पत्नी और लिपिक की अंधेरगर्दी से महिला कल्याण विभाग मे हो रहा खेल… | Soochana Sansar

अधिकारी पति-पत्नी और लिपिक की अंधेरगर्दी से महिला कल्याण विभाग मे हो रहा खेल…

@आशीष सागर दीक्षित, बाँदा।

  • मामला जिला प्रोबेशन / एडिशनल डायरेक्टर जिला प्रोबेशन अधिकारी / महिला कल्याण विभाग से जुड़ा है।


बाँदा के महिला कल्याण विभाग / ज़िला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय मे भ्रष्टाचार की भसड़ मची है। हाल ही जेम पोर्टल पर मानव संसाधन आपूर्ति हेतु पड़ी बिड/निविदा मे एक ही व्यक्ति की दो फर्मों को चयन किया गया। फिर कूटरचित दस्तावेजों की जुगाड़बाजी से डीपीओ मीनू सिंह एवं एडी. डीपीओ पुष्पेंद्र सिंह,लिपिक पंकज मिश्रा की तिकड़ी द्वारा वकील अहमद नाम के व्यक्ति की फर्म को यह निविदा सौंप दी गई। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कमेटी की डीएम साहिबा अध्यक्ष है। वकील अहमद की दो फर्म क्रमशः जॉब्स इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड व जॉब्स इम्फराटेक प्राइवेट लिमिटेड को क्वालीफाईड किया गया था। एल 1 और एल 2 एक ही व्यक्ति की कंपनी है। जबकि एल 3 आरएस इंटरप्राइजेज आनर सुषमा धीमान को इसलिए शामिल किया गया ताकि निविदा कैंसिल होने से बची रहे। निविदा गाइडलाइंस मुताबिक तीन फर्मो का क्वालीफाई करना आवश्यक है। वहीं एक बिड/निविदा मे एक ही फर्म आवेदन कर सकती है। जबकि यहां एक ही आनर वकील अहमद की दो फर्म बिड/निविदा मे शामिल की गई। वहीं उक्त दोनों को क्वालीफाई चयन भी किया गया। जिसमें जाब्स इंफ्राटेक को मैन-पावर सप्लाई का नया काम दिया गया। जबकि इसी व्यक्ति वकील अहमद की एक अन्य फर्म जाब्स इंटरप्राइजेज पहले से मैन-पावर सप्लाई कर रही है। उक्त दोनों के जीएसटी नम्बर के साथ अंकित मोबाइल नम्बर एक ही है।”

बाँदा। ज़िले के सरकारी तंत्र मे चौतरफा भ्रष्टाचार की भांग कैसे पड़ी है इसकी बानगी मे यह खबर पढ़ना चाहिए। जिला महिला कल्याण विभाग / ज़िला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती मीनू सिंह है। वहीं इनके पतिदेव श्री पुष्पेंद्र सिंह चित्रकूट मंडल मे बाँदा मुख्यालय पर ही एडिशनल डायरेक्टर महिला कल्याण विभाग/ ज़िला प्रोबेशन अधिकारी है। यह जुगल जोड़ी और विभाग का लिपिक पंकज मिश्रा मिलकर जहां सरकारी वित्तीय बजट को खाकसार / बंदरबांट कर रहें है। वहीं अपने चहेतों को ही जेम पोर्टल के मार्फ़त निविदा देकर काम भी देते है।

उदाहरण के लिए हाल ही मे दिनांक 7.03.2025 को जेम पोर्टल पर महिला कल्याण विभाग बाँदा ने एक बिड/निविदा डलवाई। जिसमे निविदा खुलने व बन्द होने की तारीख जिम पोर्टल पर एक ही है। समय मे आधे घण्टे का फर्क रखा गया है। बिड पेशकश वैधता बन्द होने की मियाद 90 दिन रखी गई है। क्रेता ईमेल आईडी [email protected] है। गौरतलब है इस बिड बोली का क्रमांक नम्बर GEM/2025/B/5996084 है। यह जिम पोर्टल पर दिनांक 22.02.2025 को दिनांकित है।


वकील अहमद की दो फर्म का जीएसटी नम्बर अलग लेकिन मोबाइल नम्बर एक-


महिला कल्याण अधिकारी/ ज़िला प्रोबेशन अधिकारी ने जेम पोर्टल पर गत मार्च माह जो निविदा ओपन कराई थी। उसमे करीब 157 फर्मे शामिल हुई थी। जिसमें 3 चुनी गई। इन तीन मे दो कंपनी वकील अहमद की है। जिसका जीएसटी नम्बर क्रमशः जाब्स इंटरप्राइजेज GST-09AQAPA1763G1Z8 है। मोबाइल नम्बर 9919786000 अंकित है। वहीं जाब्स इम्फराटेक प्राइवेट लिमिटेड का GST-09AAFCJ7963B1ZE है। मोबाइल नम्बर इसमे भी 9919786000 ही अंकित है। एल 1 और एल 2 कम्पनी दोनों का आनर वकील अहमद है। वहीं एल 3 कंपनी आरएस इंटरप्राइजेज के दस्तावेज अपठनीय एवं ब्लर है। जिन्हें जूम करके जिम पोर्टल पर पढ़ा भी नही जा सकता है। ऐसे मे सवाल यह है कि बिड मे प्रतिभागी 157 कंपनी को एक ही कारण दर्शाकर निविदा से डिस्क्वालिफाई किया गया। वहीं इन तीन कंपनी को क्वालीफाई करने मे बिड निविदा की गाइडलाइंस मानक अर्थात One Bid Per Bidder की शर्त को कूड़ेदान मे फेंक दिया गया।

जब एक ही फर्म /आनर एक निविदा मे शामिल हो सकती है। तब वकील अहमद की दो फर्म जिसका आनर एक ही आदमी है उसको कमेटी ने किस आधार पर 157 फर्मो मे से चयन करते हुए क्वालीफाई कराया है? क्या यह अंधेरगर्दी जिलाधिकारी श्रीमती जे.रीभा जी के संज्ञान मे है ? तब जबकिं डीएम साहिबा इस कमेटी की अध्यक्षता करती है। वहीं ज़िला ट्रेजरी/कोषागार अधिकारी /सीटीओ दस्तावेज जांचकर्ता है। बड़ी बात है कि महिला कल्याण विभाग मे इस बिड के सहारे मानव संसाधन सप्लाई का काम पाए वकील अहमद की कंपनी जाब्स इम्फराटेक प्राइवेट लिमिटेड की को-आनर / डायरेक्टर शबीना है। वहीं एक अन्य को- डायरेक्टर अनिल है। लेकिन शबीना व वकील अहमद का बिड डॉक्यूमेंट मे मोबाइल नम्बर 9919786000 एक ही अंकित है।


निविदा मे शामिल अन्य लोगों ने उठाये सवाल, कौन है दलाल-

ज़िला प्रोबेशन अधिकारी/ महिला कल्याण विभाग मे मची इस वित्तीय और तकनीकी गड़बड़ी व सुनियोजित भ्रष्टाचार को देखकर निविदा प्रतिभागी भौचक्के है। उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि इस बिड की एमडी / जमानत राशि 10 लाख रुपया है। जो डिमांड ड्राफ्ट या चेक के जरिये जमा होनी थी। वहीं उन्होंने सूचना संसार एवं प्रेस ट्रस्ट आफ बुंदेलखंड को दस्तावेजों की प्रति देते हुए इसका खुलासा करने की बात कही है। साथ ही इस मामले को हाईकोर्ट तक ले जाने की बात कही है। उनके इस हौसले पर सूचना संसार महिला कल्याण विभाग के इस बिड घोटाले को उजागर कर रहा है। जाहिर है फर्म के माध्यम से सप्लाई मानव संसाधन मे भी घूसखोरी की कालिख पोती गई होगी। क्योंकि बिना रिश्वतखोरी किये प्राइवेट कंपनी बेरोजगार को नौकरी अपवाद मे दे रहीं है। पूरा सिस्टम इस बिड मे संलिप्त है। शिकायत करने वालों ने ज़िलाधिकारी बाँदा श्रीमती जे.रीभा से उनके बतौर कमेटी अध्यक्ष होने के नाते निष्पक्ष जांच / कार्यवाही की मांग कर रहा है। इसमे दोषी व्यक्तियों पर कार्यवाही करते हुए वकील अहमद की जालसाजी के मद्देनजर फर्म ब्लैकलिस्ट की जाए। ताकि बिड मे शामिल अन्य फर्मो को सीधा संदेश माननीय मुख्यमंत्री की ज़ीरो टॉलरेंस वाली सरकार से दिया जा सके। देखना होगा कि इस विभागीय भ्रष्टाचार पर अधिकारियों के माथे शिकन आती है । या महिला कल्याण विभाग इन अशिकारी पति-पत्नी व लिपिक की पैबंद पर यूं ही कागजी गुलजार रहेगा।

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