
- सहयोगी एक अन्य राजपूत महिला के साथ स्वास्थ्य टीम ने जिला अस्पताल मे कराया भर्ती।
- गत दिसंबर माह मे एफआईआर के मद्देनजर भागदौड़ और बीमार माताजी को खून देने से आई स्वास्थ्य मे गिरावट।
फिर दो माह से लगातार भागदौड़ एवं सिस्टम की यातना से दलित महिला अवसादग्रस्त व बीमार।
बाँदा। विद्याधाम समिति / चिंगारी प्रमुख राजाभैया से जुड़े दुष्कर्म, अपहरण, हत्या के प्रयास मामलें पर चल रही जांच के क्रम मे पुलिस टीम रविवार को दलित पीड़िता को साथ लेकर मानिकपुर पहुंची थी।
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जानकारी अनुसार रविवार 9 फरवरी को अपहरण वाली एफआईआर ( 2 फरवरी को लिखी गई। ) मे बरामदगी स्थल / मौका मुआयना के लिये अतर्रा क्षेत्राधिकारी / पुलिस टीम के पीड़िता को साथ लेकर गई थी।बतलाते चले कि दोनों पीड़िता 4 फरवरी से अनशन के बाद 9 फरवरी से ‘हंगर स्ट्राइक / भूखहड़ताल’ पर है। पुलिस टीम के साथ ओहन रेलवे ट्रैक पहुंची महिला ने अपहरण बरामदगी स्थल ओहन जंगल रेलवे ट्रैक व ओहन स्टेशन का सीओ साहब को निरीक्षण करने मे मदद की। वहीं घटनास्थल का मुआयना व स्टेशन कर्मचारियों से पुलिस ने संवाद किया है। उल्लेखनीय है कि आज दलित महिला की तबीयत बिगड़ी है। वहीं 13 फरवरी को राजाभैया के स्टे मामले पर हाईकोर्ट मे है सुनवाई होनी है।

इधर अपहरण वाली 2 फरवरी की एफआईआर के बाद से अभियुक्तों का मानसिक दबाव व उनके द्वारा किये जा रहे मिथ्या दोषारोपण / प्रदर्शन से दोनों पीड़िता व्यवस्था से आहत और असंतोष मे है। उन्होंने अपने जीवन को खतरा बतलाते हुए न्याय की मांग सूबे के मुख्यमंत्री से की है।

गौरतलब है कि पीड़िताओं के परिचितों के मुताबिक पीड़ित अनशनकारी राजपूत महिला ने राजाभैया यादव के चिंगारी / विद्याधाम समिति के षड्यंत्र और दशहत से आजिज आकर अपने बच्चों को अतर्रा / बाँदा से हटा दिया है। उनका कहना है कि प्रशासन से भरोसा उठ रहा है। वे पशोपेश मे है। उन्होंने उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री से न्याय की गुहार लगाई है। 5 दिसंबर से फरवरी माह तक वे संघर्षरत है। वहीं अभियुक्तों को स्थानीय व्यवस्था का संरक्षण है। आज पीड़ित के न्यायिक बयान होने थे जो तबियत बिगड़ने से पूरे नही हो सके है।
( खबर अपडेट सूत्रानुसार जारी )….



