
यात्रियाें की खानपान सामग्री लेकर भागने वाले बंदरों पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे ने अपने बजट को भी बढ़ा दिया है। अब स्टेशन पर एक शिफ्ट में दो मंकी हैँडलर तैनात होंगे। यह अपनी लंगूरों की आवाज से बंदरों को भगाएंगे। रेलवे इस काम के लिए छह महीने में 5.95 लाख रुपये खर्च करेगा। मंकी हैंडलर तैनात करने के लिए रेलवे ने टेंडर भी जारी कर दिए हैं।
लखनऊ रेलवे स्टेशन के मेन लाइन के सात और साइड लाइन के दो प्लेटफार्म हैं। बंदरों का झुंड लोको वर्कशाप की ओर से पैदल पुल के जरिए प्लेटफार्म एक तक आ जाता है। यहां प्लेटफार्माें के अलावा द्वितीय श्रेणी प्रवेश हाल के पास, पार्सल, रेल आरक्षण केंद्र की ओर बंदरों का झुंड यात्रियों की खानपान की सामग्री को उठा ले जाता है। कई बार बंदर यात्रियों पर झपट्टा तक मार देते हैं।

मंकी हैंडलर होता था तैनात
इसे रोकने के लिए अब तक प्रत्येक पाली के लिए एक मंकी हैंडलर तैनात होता था। एक छोर पर मंकी हैंडलर अपनी लंगूर की आवाज से बंदरों को भगाता था तो वह दूसरे छोर पर पहुंच जाते थे। ऐसे में अब असरदार कार्रवाई के लिए रेलवे ने नए सिरे से मंकी हैंडलर तैनात करने का टेंडर जारी किया है।
पहली शिफ्ट सुबह आठ से रात आठ और दूसरी शिफ्ट रात आठ से सुबह आठ बजे की होगी। अब प्रत्येक शिफ्ट में दो मंकी हैंडलर रखे जाएंगे। ऐसे में 24 घंटे में चार मंकी हैंडलर की तैनाती रहेगी। प्रत्येक मंकी हैंडलर के लिए 24810 रुपये का मानदेय तय होगा। रेलवे ने छह माह के लिए 5.95 लाख रुपये के भुगतान के आदेश वित्त अनुभाग से जारी करवा दिया है।



